पहले नौकर के नाम पर बनाते थे एजेंट फिर कर देते थे कंगाल, पुलिस ने किया भंडाफोड़
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एसपी सिटी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि राजस्थान के दौसा के गुर्जर सिंटा गांव निवासी अर्जुन लाला सैनी ने पुलिस से शिकायत की थी कि वह बेरोजगार था। उसके पास नोएडा के सेक्टर-63 स्थित एग्रो बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड से फोन आया। उन्होंने पहले तो अपनी कंपनी का एजेंट बनाया और आसपास के लोगों और रिश्तेदारों को जुड़वाया।
जब कंपनी के लोगों ने करीब साढे़ तीन लाख रुपये उससे हड़प लिए तो उसका फोन उठाना बंद कर दिया। इस तरह छात्रों और युवाओं को अपने जाल में फंसाते थे। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने छापेमारी की तो 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की पहचान मेरठ निवासी जावेद, रविंद्र, सोहनवीर, आकाश, मोहम्मद कासिम, यतन उर्फ जौली, मुजफ्फरनगर के खतौली निवासी विपिन कुमार, बुढ़ाना निवासी फरमान व बागपत के दोघट निवासी अनित के रूप में हुई।
इस जालसाजी को करीब 5 माह से नोएडा से ही अंजाम दिया जा रहा था जबकि मेरठ में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद आरोपी नोएडा की ओर भागे थे। आरोपियों ने मुजफ्फरनगर और बागपत में भी इस तरह का गोरखधंधा किया था। आरोपियों ने कबूल किया कि वह लोन सहित कई माध्यमों से लोगों से ठगी करते थे। कुछ पैसे प्रोसेसिंग फीस के रूप में लेने के बाद फोन बदल देते थे।
पुलिस ने बताया कि आरोपी एक ग्राहक से एक ही नंबर से बात करते थे। उनका लक्ष्य होता था कि एक नंबर से अधिक से अधिक लोगों को ठगा जा सके। जब उस पर कॉल आती थी तो नंबर ही बंद कर दिए जाते थे। फर्जी फर्म के नाम से मोबाइल सिम लिए जाते थे। एसपी ने बताया कि मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत और अब नोएडा में करीब करोड़ों रुपये ठग चुके हैं।
अकेले नोएडा से करीब 40 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। गिरोह का लीडर जावेद था और वही सभी को दिशा-निर्देश देता था। सभी आरोपी इंजीनियर और अन्य टेक्निकल शिक्षा से युक्त थे। एक कंपनी द्वारा फर्जी काम करके भाग गई थी। जिसके वह स्वयं शिकार थे और उसी आइडिया को अपनाते हुए अन्य लोगों के साथ भी ठगी करनी शुरू कर दी।
नौकरी देकर उसके रिश्तेदारों से हड़पते थे रुपये
पीड़ित अर्जुन ने बताया कि आरोपियों द्वारा पहले व्यक्ति को नौकरी देने के नाम पर उसे एजेंट बनाया जाता था। फिर उससे ग्राहक बनवाए जाते और जब रुपये ऐंठ लिए जाते तो फोन बंद कर लेते थे। यही उसके साथ भी हुआ। दोस्त और रिश्तेदारों के लाखों रुपये जब उसने कंपनी में लगवा दिए और काम नहीं हुआ तो उन्होंने उससे पैसे मांगने शुरू कर दिए। जिससे उसे नोएडा आकर शिकायत करनी पड़ी। आरोपियों द्वारा अलग-अलग खातों में पैसा डलवाते थे।
मोबाइल कंपनियों से खरीदते थे डाटा
आरोपी किसी एक क्षेत्र के लोगों को ठगने के लिए मेाबाइल कंपनियों से डाटा निकलवाते थे और उसी क्षेत्र में ठगी करते थे। जब वह क्षेत्र पूरा हो जाता था तो दूसरे क्षेत्र में जाकर मोबाइल कंपनी से डाटा खरीदकर उस क्षेत्र के लोगों को ठगते थे।