दिल्ली में रहना गैस चैंबर में रहने जैसा: हाईकोर्ट
राजधानी में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। यहां रहना गैस चैंबर में रहने जैसा है। यह कहना है दिल्ली हाईकोर्ट का। अदालत ने कहा कि प्रदूषण मुख्य कारण धूलकण और यातायात जाम के कारण निकलने वाला धुआं है।
अदालत ने सरकार को निर्माण संबंधी नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने को कहा है। इसके अलावा यातायात को सुचारु रूप से चलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति बीडी अहमद और संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने प्रदूषण रोकने के लिए व्यापक कार्रवाई संबंधी विस्तृत योजना रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई 21 दिसंबर को होगी।
यहां रहना मुश्किल हो गया है
अदालत ने राजधानी में बढ़ते प्रदूषण पर कड़ी चिंता जताते हुए कहा कि यहां रहना मुश्किल हो गया है। अदालत ने कहा कि भवन निर्माण के दौरान धूल के कणों को रोकने के लिए दिशानिर्देश तय हैं लेकिन उसका उल्लंघन होने की वजह से धूल के कण वायु में जाने से प्रदूषण बढ़ रहा है।
अदालत ने सरकार के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये जुर्माने के प्रावधान की बात कही गई थी। अदालत ने कहा कि एक भवन के निर्माण पर 50 हजार रुपये का जुर्माना कुछ भी नहीं है।
नियमों का उल्लंघन होने पर निर्माण कार्य पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए। निर्माण स्थल पर पर्दा लगाना जरूरी है। इसी प्रकार सरकार कामकाज जैसे सड़क इत्यादि बनाने के दौरान भी वहां धूल न हो इसके लिए बार-बार पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए।
रोक लगाने के लिए चेतावनी दे और कार्रवाई करे
इसी प्रकार एनजीटी ने राजधानी में कूड़ा व पत्तियों को जलाने पर रोक लगा रखी है ताकि वायू प्रदूषण न हो, बावजूद इसके उल्लंघन हो रहा है। अदालत ने सरकार को विज्ञापन देकर इस प्रकार पर रोक लगाने के लिए चेतावनी दे और कार्रवाई करे।
अदालत ने कहा कि इसी प्रकार भीड़ वाली सड़कों पर यातायात सुचारु रूप से चलाने की दिशा में काम किया जाए। अदालत ने कहा कि स्वयं यातायात डीसीपी ने माना है कि 14 स्थानों पर ज्यादा ट्रैफिक होने से जाम लगा रहता है। अदालत ने ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम शुरू करने और यातायात को ड्राइविंग लेन में चलाने को कहा।
अदालत का ध्यान विवाह व अन्य समारोहों में आतिशबाजी के उपयोग पर दिलाया गया। अदालत ने दिल्ली सरकार को आतिशबाजी के अत्यधिक उपयोग के प्रति लोगों को हतोत्साहित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को भी यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि हाईकोर्ट के हर रूम व अन्य क्षेत्र जहां आम लोग आते हैं, वहां वायु को साफ रखा जाए।