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पीएम केयर्स फंड को आरटीआई के दायरे में लाने की याचिका पर पीएमओ ने हाईकोर्ट में जताई आपत्ति
Thu, 11 Jun 2020 12:09 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अरुण कुमार, नई दिल्ली
अरुण कुमार, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Thu, 11 Jun 2020 12:09 PM IST
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पीएमओ
- फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला, नई दिल्ली
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पीएम केयर्स फंड को सार्वजनिक प्राधिकरण के रूप में घोषित करने की मांग वाली याचिका पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने बुधवार को हाईकोर्ट में आपत्ति जताई। हाल ही में ऐसी ही एक याचिका को हाईकोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया था। न्यायमूर्ति नवीन चावला ने बुधवार को इस याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की।
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इस दौरान पीएमओ की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस याचिका के तहत पीएम केयर्स फंड को आरटीआई के दायरे में लाने की मांग पर अनुचित बताया। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल करेंगे कि याचिका पर विचार क्यों नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अगस्त की तारीख तय कर दी।
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यह याचिका सम्यक अग्रवाल की ओर से अधिवक्ता देबोप्रियो मौलिक और आयुष श्रीवास्तव के माध्यम से दायर की गई। इस याचिका में केंद्रीय जनसूचना अधिकारी (सीपीआईओ) और पीएमओ द्वारा 2 जून को दिए गए उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें पीएमओ ने पीएमओ और सीपीआईओ ने पीएम केयर्स फंड से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया था।
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पीएमओ ने दलील दी थर कि पीएम केयर्स फंड आरटीआई के तहत आने वाला सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है। इसके चलते याची ने यह याचिका दायर करके सीपीएमओ को इस संबंध में आदेश देने की मांग की। याचिका में कहा गया कि पीएमओर ने 28 मार्च को कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने के लिए पीएम केयर्स फंड की स्थापना की जानकारी दी थी।
इसमें पीएमओ ने लोगों से अपील की थी कि वह कोरोना से जंग में सरकार का साथ दें और ज्यादा से ज्यादा दान करें। इसमें यह भी कहा गया था कि दान की गई राशि पर टैक्स में छूट मिलेगी। याचिकाकर्ता ने एक मई को एक आरटीआई के जरिए पीएम केयर्स फंड के ट्रस्ट के दस्तावेज, जिस पर फंड का गठन हुआ वह पत्र या दस्तावेज और सभी नोट शीट, पत्र, संचार मेमो और आदेश या पत्र की प्रति की मांग की थी, जिसपर पीएमओ ने कोई भी दस्तावेज उपलब्ध करवाने से इंकार कर दिया था। इसके साथ इस संबंध में दायर एक याचिका को मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायाशीध प्रतीक जालान की पीठ ने खारिज कर दिया था।