फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   pm narendra modi will distribute e rickshaw to transgenders in noida

क्या प्रधानमंत्री मोदी के गिफ्ट से दूर हो पाएगी इन ट्रांसजेंडर्स के ‘खून के रिश्ते’ की तलाश

Sun, 03 Apr 2016 01:17 PM IST
सुशील पांडेय/अमर उजाला, नोएडा
सुशील पांडेय/अमर उजाला, नोएडा Updated Sun, 03 Apr 2016 01:17 PM IST
सार

  • ट्रांसजेंडर्स को अपने ‘खून के रिश्ते’ की तलाश
  • ई-रिक्शा के फाइनेंस में नॉमिनी की समस्या सबसे ज्यादा
  • कइयों के पास वोटर आईडी और आधार कार्ड भी नहीं
  • मुख्यधारा के समाज के साथ जुड़ने का ट्रांसजेंडर्स के पास मौका

विज्ञापन
pm narendra modi will distribute e rickshaw to transgenders in noida
- फोटो : राजन राय

विस्तार

मूलरूप से बदायूं और स्थानीय तौर पर दिल्ली निवासी ट्रांसजेंडर बुबली को अपने माता-पिता की तलाश है। वजह, ई-रिक्शा के फाइनेंस के दौरान नॉमिनी के कॉलम में माता-पिता में से किसी का नाम लिखना जरूरी है। अब वह दुखी है और कह रही है, ‘ काश, आज मेरे माता-पिता साथ होते तो मुख्यधारा के समाज से जुड़ने का एक अच्छा मौका उसे मिल जाता।’

विज्ञापन


दरअसल, नोएडा में आगामी 5 अप्रैल को पीएम मोदी के हाथों ट्रांसजेंडर्स को भी ई-रिक्शा मिलना है। इसके लिए भारतीय माइक्रो क्रेडिट (बीएमसी) की ओर से दिल्ली-एनसीआर में 21 ट्रांसजेंडर्स का चयन ई-रिक्शा के फाइनेंस के लिए किया गया है।
विज्ञापन


हालांकि, पूरी अड़चन फाइनेंस के नियमों को लेकर आ रही है। कागजी कार्रवाई के दौरान कई स्थानों पर माता-पिता का नाम लिखना जरूरी होता है। लेकिन ट्रांसजेंडर्स के साथ दिक्कत यह आ रही है कि इनके माता-पिता का पता उपलब्ध ही नहीं है। अधिकांश ने बचपन में ही अपना घर छोड़ दिया या फिर इनके माता-पिता ने ही इन्हें घर से निकाल दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

ग्रुप में नॉमिनी बनाने का बीएमसी का फैसला

pm narendra modi will distribute e rickshaw to transgenders in noida
अब जब जरूरत है तो इन्हें उनकी कमी खल रही है। बीएमसी के लिए निधि फाउंडेशन ने महिलाओं व ट्रांसजेंडर्स को चिह्नित करने का काम किया है।

फाउंडेशन की अध्यक्ष निधि शर्मा और सलाहकार अभिजीत सिन्हा का कहना है कि ऐसा तबका मुख्यधारा के समाज से कटा हुआ है। जब इन्हें जुड़ने का मौका मिल रहा है तो इनके पग-पग पर बाधाएं सामने आ रही हैं। लिहाजा इन्हें बेहद दुख हो रहा है।

फाइनेंस के दौरान माता-पिता के नहीं होने पर नॉमिनी के तौर पर ग्रुप के ट्रांसजेंडर्स को ही एक-दूसरे को बनाने का फैसला बीएमसी ने किया है ताकि इन्हें भी रोजगार का हक मिल सके। बीएमसी का कहना है कि इनके साथ काफी परेशानियां हैं। लेकिन इनके पास भी मुख्यधारा के समाज में रहने का हक है।

नॉमिनी की जानकारी अब तक नहीं

pm narendra modi will distribute e rickshaw to transgenders in noida

फाइनेंस प्रदाता कंपनी ने जब फॉर्म भरने के दौरान ट्रांसजेंडर्स से नॉमिनी का नाम भरने को कहा तो उन्हें कुछ भी नहीं पता था। जब उनसे माता-पिता या किसी खून के रिश्ते का नाम यहां भरने को कहा तो वह मायूस हो गई।

मैं तो मां भी नहीं बन सकती : जब किसी खून के रिश्ते के बारे में एक ट्रांसजेंडर्स से पूछा गया तो वह बेहद मायूसी में बोली कि बचपन में ही उसे घर से निकाल दिया अब किस पर भरोसा करे। मैं तो मां भी नहीं सकती। अगर ऐसा होता तो कम से कम बेटा-बेटी पर तो भरोसा किया जा सकता था।

वोटर या आधार कार्ड नहीं बन पाया : कई ट्रांसजेंडर्स ऐसे हैं कि उनके पास न तो वोटर आई कार्ड है न ही आधार कार्ड। कुछ के पास हैं भी तो इनमें से एक ही है। इससे इनको ई-रिक्शा के फाइनेंस कराने में मुश्किल पेश आ रही हैं।

आज हमारे माता-पिता होते तो इस मौके पर वह हमारा साथ देते। हमें बेहद दुख है।- शीना, नोएडा
खून का रिश्ता ही कुछ और होता है। अब हम नॉमिनी बनाने के लिए किस पर भरोसा करें।- रुबिना, नोएडा
हम भी मुख्यधारा के समाज के साथ जुड़ना चाहते हैं लेकिन हमारे रिश्तेदारों के नहीं होने से इसमें समस्या आ रही है।- रूबी, नोएडा

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed