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आर्थिक सहायता देने के लिए प्रवासियों से स्थायी पता और आधार कार्ड न मांगे सरकार: दिल्ली हाईकोर्ट
Sun, 05 Jul 2020 08:52 AM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sun, 05 Jul 2020 08:52 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों को सहायता देने के लिए उनके स्थायी पते या आधार कार्ड की जानकारी न ली जाए, ताकि मजदूरों के लिए अपना पंजीकरण या उसका नवीनीकरण कराना परेशानी का सबब साबित ना हो। पीठ इस याचिका पर अगली सुनवाई 9 जुलाई को करेगी।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली के भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड से कहा है कि प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण करने के लिए उनका स्थायी पता व आधार कार्ड मांगना न्यायसंगत नहीं है।
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मजदूर काम की तलाश में अपना पता बदलते रहते हैं, ऐसे में वे अपना स्थायी पता कैसे दे सकते हैं? मजदूरों का पंजीकरण करते समय उनके वर्तमान काम के स्थान के आधार पर उनका नाम, पता और काम की जगह की पंजीकरण संख्या के आधार पर उनका पंजीकरण किया जाए।
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यह याचिका एक सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार अलेदिया की ओर से वकील शिवेन वर्मा के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया कि प्रवासी मजदूरों के पंजीकरण के दौरान उनका स्थायी पता और आधार कार्ड की जानकारी मांगी जा रही हैं।
इन तथ्यों के अभाव में काफी मजदूर पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं, जिस कारण उन्हें लॉकडाउन में सरकारी आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही है। इसके साथ ही याचिका में कहा गया कि भारत के अलग-अलग ग्रामीण क्षेत्रों से आए मजदूरों को उनकी सही जन्मतिथि नहीं पता है और इसलिए आधार कार्ड में भी उनकी जन्मतिथि गलत हो सकती है, जिससे उनका पंजीकण होने में परेशानी हो रही है।
इस बाबत याची ने हाईकोर्ट से मांग की है कि दिल्ली सरकार को इस संबंध में निर्देश दिए जाएं कि मजूदरों के पंजीकरण के लिए उनका स्थायी पता या आधार कार्ड की जानकारी अनिवार्य रूप से ना मांगी जाए।