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इन लोगों की हालत जानकर सहम जाएंगे आप
मयंक तिवारी/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Mon, 20 Jan 2014 10:50 AM IST
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दिल्ली की तर्ज पर यहां नगर निगम ने बसों में रैन बसेरे तो शुरू कर दिए, पर इनमें रात काटनी भारी पड़ रही है। बसों की सीटें रैन बसेरों में रात बिताने वालों के लिए मुसीबत बन रही हैं। प्रशासन की जरा सी लापरवाही से इन लोगों को सीट के बीच दुबककर बिताने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अलग-अलग रैन बसेरों की अलग-अलग समस्याएं हैं।
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बसों में सीटों के कारण लोगों को सोने की जगह नहीं मिल रही है। कई जगह तो लोगों को बस के भीतर नहीं आने दिया जा रहा है। एक स्थान पर तो बस में जगह न होने के कारण लोगों को बिस्तर लेकर बाहर रात बिताना पड़ रहा है। रात बिताने वालों का कहना है कि पहले आओ पहले पाओ के आधार पर इन रैन बसेरों में जगह मिल रही है।
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समय: 9 बजे, स्थान: सेक्टर चार-सात चौक
हरियाणा रोडवेज की सिटी बस रैन बसेरे में तब्दील होकर खड़ी है। उसके भीतर 16 गद्दे व रजाई हैं मगर सोने वाला कोई नहीं। रैन बसेरा शुरू होने का तीसरा दिन है। पहले दिन आठ लोग आए थे दूसरे दिन पांच लोग और तीसरे दिन कोई नहीं है। बस के बगल में फ़ुटपाथ पर अलाव जल रहा है। वहां पर एक परिवार मैले-कुचैले कंबलों में लिपटा हुआ बैठा है। एक महिला से जानने का प्रयास किया गया कि वह बस के भीतर क्यों नहीं जा रही है तो उसका उत्तर कुछ अलग था। एक तो बस में सोने की जगह नहीं है, दूसरे छोटे-छोटे बच्चे हैं जो गंदगी कर देते हैं। गंदगी की चेतावनी के चलते उनको भीतर नहीं आने दिया जा रहा है।
समय: साढ़े नौ बजे, स्थान: रेलवे स्टेशन
यहां पर हरियाणा रोडवेज की बसें (55 क्यू-2392) हमेशा खड़ी रहती हैं। इस बस की सीट को हटाकर सपाट तरह से लोगों के सोने के लिए स्थान बनाया गया है। यहां पर 16 लोग सो रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर ठंड से ठिठुरने वालों की संख्या अधिक है। प्रशासन को एक या दो बस और खड़ी करनी चाहिए।
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बस में सो रहे वीरेंद्र यादव देवरिया से आए हुए थे। उनको निजी कंपनी में काम मिलना था, मगर अभी नहीं मिला है। दो दिन से वे इसी रैन बसेरे में रात गुजार रहे हैं। वे कहते हैं कि सुबह नहाने व तैयार होने की सुविधा और मिल जाए तो काम चल जाए। यहां पर सो रहे ज्यादातर लोग दिहाड़ी मजदूर थे। जो दिन में खड़े होकर सड़क पर काम की तलाश करते हैं। रात में रैन बसेरे में समय काट रहे हैं।
समय: 10 बजे, थान: शीतला माता मंदिर
शीतला माता मंदिर के पास रोडवेज की बस (एचआर-55आर-3512) खड़ी है। यहां पर बस की सीट के बीच की जगह में तीन लोग सो रहे हैं। नगर निगम के कर्मचारी की मानें तो लोग आते हैं बस में चढ़कर फिर वापस चले जाते हैं। जब तक सीट नहीं हटाई जाएगी तब तक बात नहीं बनेगी। 16 बिस्तरों का सेट उनके पास रखा हुआ है। जो भी व्यक्ति पहले आता है बिस्तर लेकर सीट के बीच की जगह पर कब्जा पहले मिल जाता है। जब तक सीटों को हटाकर समतल नहीं बनाया जाएगा तब तक बस में रैन बसेरा खोलने का उद्देश्य नहीं पूरा होगा।
समय: साढ़े दस बजे, स्थान: खाड़सा रोड
रोडवेज की बस सात बजे से खड़ी है। इसमें पांच लोग सो रहे हैं। बस के सामने करीब एक दर्जन बच्चे व बड़े अलाव सेक रहे हैं। उनकी मजबूरी है कि बस में जगह न होने पर सो नहीं सकते हैं। खुले आसमान के नीचे रात काटने के लिए मजबूर लोग बस से बिस्तर की मांग करते हैं और कहते हैं कि सुबह बिस्तर वापस दे देंगे। नगर निगम कर्मचारी की ओर से ना होती है। वे कहते हैं कि बस के भीतर आओ और बिस्तर लो।
यह भी पढ़ें: मौसम ने चौपट किया रेलवे का टाइम टेबल
ऐसे में कोई भी व्यक्ति बैठकर रात बिताने के लिए तैयार नहीं होता है। यहां पर एक दूसरी समस्या भी नजर आई। चालक बस को सड़क के बीच में ही खड़ा करके चला गया। दूसरी साइट के दुकान मालिकों की कार यहां खड़ी थी। उन्होंने सड़क के किनारे से कार नहीं हटाई, उल्टे कर्मचारी से इस बात पर भिड़ गए कि बस कहीं और खड़ी करो।
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बसों में सीटों के कारण लोगों को सोने की जगह नहीं मिल रही है। कई जगह तो लोगों को बस के भीतर नहीं आने दिया जा रहा है। एक स्थान पर तो बस में जगह न होने के कारण लोगों को बिस्तर लेकर बाहर रात बिताना पड़ रहा है। रात बिताने वालों का कहना है कि पहले आओ पहले पाओ के आधार पर इन रैन बसेरों में जगह मिल रही है।
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समय: 9 बजे, स्थान: सेक्टर चार-सात चौक
हरियाणा रोडवेज की सिटी बस रैन बसेरे में तब्दील होकर खड़ी है। उसके भीतर 16 गद्दे व रजाई हैं मगर सोने वाला कोई नहीं। रैन बसेरा शुरू होने का तीसरा दिन है। पहले दिन आठ लोग आए थे दूसरे दिन पांच लोग और तीसरे दिन कोई नहीं है। बस के बगल में फ़ुटपाथ पर अलाव जल रहा है। वहां पर एक परिवार मैले-कुचैले कंबलों में लिपटा हुआ बैठा है। एक महिला से जानने का प्रयास किया गया कि वह बस के भीतर क्यों नहीं जा रही है तो उसका उत्तर कुछ अलग था। एक तो बस में सोने की जगह नहीं है, दूसरे छोटे-छोटे बच्चे हैं जो गंदगी कर देते हैं। गंदगी की चेतावनी के चलते उनको भीतर नहीं आने दिया जा रहा है।
समय: साढ़े नौ बजे, स्थान: रेलवे स्टेशन
यहां पर हरियाणा रोडवेज की बसें (55 क्यू-2392) हमेशा खड़ी रहती हैं। इस बस की सीट को हटाकर सपाट तरह से लोगों के सोने के लिए स्थान बनाया गया है। यहां पर 16 लोग सो रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर ठंड से ठिठुरने वालों की संख्या अधिक है। प्रशासन को एक या दो बस और खड़ी करनी चाहिए।
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बस में सो रहे वीरेंद्र यादव देवरिया से आए हुए थे। उनको निजी कंपनी में काम मिलना था, मगर अभी नहीं मिला है। दो दिन से वे इसी रैन बसेरे में रात गुजार रहे हैं। वे कहते हैं कि सुबह नहाने व तैयार होने की सुविधा और मिल जाए तो काम चल जाए। यहां पर सो रहे ज्यादातर लोग दिहाड़ी मजदूर थे। जो दिन में खड़े होकर सड़क पर काम की तलाश करते हैं। रात में रैन बसेरे में समय काट रहे हैं।
समय: 10 बजे, थान: शीतला माता मंदिर
शीतला माता मंदिर के पास रोडवेज की बस (एचआर-55आर-3512) खड़ी है। यहां पर बस की सीट के बीच की जगह में तीन लोग सो रहे हैं। नगर निगम के कर्मचारी की मानें तो लोग आते हैं बस में चढ़कर फिर वापस चले जाते हैं। जब तक सीट नहीं हटाई जाएगी तब तक बात नहीं बनेगी। 16 बिस्तरों का सेट उनके पास रखा हुआ है। जो भी व्यक्ति पहले आता है बिस्तर लेकर सीट के बीच की जगह पर कब्जा पहले मिल जाता है। जब तक सीटों को हटाकर समतल नहीं बनाया जाएगा तब तक बस में रैन बसेरा खोलने का उद्देश्य नहीं पूरा होगा।
समय: साढ़े दस बजे, स्थान: खाड़सा रोड
रोडवेज की बस सात बजे से खड़ी है। इसमें पांच लोग सो रहे हैं। बस के सामने करीब एक दर्जन बच्चे व बड़े अलाव सेक रहे हैं। उनकी मजबूरी है कि बस में जगह न होने पर सो नहीं सकते हैं। खुले आसमान के नीचे रात काटने के लिए मजबूर लोग बस से बिस्तर की मांग करते हैं और कहते हैं कि सुबह बिस्तर वापस दे देंगे। नगर निगम कर्मचारी की ओर से ना होती है। वे कहते हैं कि बस के भीतर आओ और बिस्तर लो।
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