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हादसे के बादः एक ही मोहल्ले से जब तीनों दोस्तों की उठी अर्थियां तो छलक पड़े लोगों की आंखों से आंसू...

Mon, 12 Oct 2020 04:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा शुजात आलम, नई दिल्ली
शुजात आलम, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 12 Oct 2020 04:33 AM IST
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People of the locality mourns over demise of three friends in delhi
तीनों दोस्त... - फोटो : amar ujala

पूरे पांडव नगर इलाके में रविवार को मातम का माहौल था। दोपहर बाद जैसे ही तीनों दोस्तों के शव उनके घर पहुंचे तो घरों में कोहराम मच गया। राजेश और तरुण अपने परिवार के इकलौते लड़के थे। थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल पर जब तीनों ही दोस्तों की अर्थियां घर से उठीं तो हर किसी की आंखों से आंसू छलक आए। पांडव नगर इलाके में स्थानीय दुकानदारों ने भी इलाके के तीन युवकों की मौत की वजह से अपनी-अपनी दुकानें बंद रखीं। चरणजीत, राजेश, तरुण और परवीन एक ही साथ पूर्वी दिल्ली स्थित केंद्रीय विद्यालय में पढ़े थे। हर वीकएंड पर सभी दोस्त जरूर मिलते और बाहर जाकर पार्टी करते थे। यहां तक राजेश ने कुछ सालों से नोएडा जाकर रहना शुरू कर दिया था, लेकिन वह शनिवार-रविवार को पांडव नगर ही आ जाता था।

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जानकारी के अनुसार तीनों मृतक पांडव नगर के बी-ब्लॉक में रहते थे। चरणदीप के परिवार में पिता कमलजीत सिंह, मां परमजीत कौर, पत्नी सोनिया सिंह,  एक बेटा खुशवीर (6) और बेटी पीयू (10) है। कमलजीत सिंह एक अंग्रेजी दैनिक से फोटो पत्रकार रिटायर हुए हैं। चरण भी उसी दैनिक के नोएडा स्थित आईटी विभाग में नौकरी करता था। राजेश का पूरा परिवार बी-ब्लॉक पांडव नगर में रहता है। कुछ सालों पूर्व वह अपनी पत्नी वीना, बेटी गौरी (10) और चाहत (5) के साथ नोएडा सेक्टर-74 के एक फ्लैट में शिफ्ट हो गया था। वह हर शनिवार रविवार को पांडव नगर ही आ जाता था। राजेश का महिपालपुर में दफ्तर था। वह एक कोरियर कंपनी में ऊंचे पद पर तैनात था। तरुण के परिवार में पत्नी तृप्ति और एक बेटी वंशु है। राजेश और तरुण परिवार अकेले ही कमाने वाले थे। तीनों की मौत ने उनके परिवार को बुरी तरह तोड़ दिया है। राजेश और तरण के परिजनों को चिंता सता रही है कि अब उनका परिवार कैसे चलेगा।
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फ्लाईओवर पर था अंधेरा, परिजनों का आरोप
चरणदीप व बाकी मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया कि हादसे के समय शादीपुर फ्लाईओवर पर अंधेरा था। अंधेरा होने की वजह से शायद कार चला रहे राजेश को ट्रैक्टर ट्राली दिखाई नहीं दी और कार की उससे भिड़ंत हो गई। यदि फ्लाईओवर पर लाइट होती तो शायद हादसा टल जाता। ट्रैक्टर में यदि पंक्चर हो भी गया था तो चालक को कोइ रिफ्लैक्टर या चमकदार वस्तु ट्राली के पीछे लगाना चाहिए था। लेकिन चालक की बड़ी लापरवाही की वजह से तीनों दोस्तों की जान चली गई, जबकि चौथे की हालत नाजुक बनी हुई है।
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कार की रफ्तार 100 से अधिक: पुलिस सूत्र
मामले की छानबीन कर रहे पुलिस सूत्रों ने दावा किया है कि रफ्तार हादसे के लिए एक बड़ी वजह बना है। दरअस्ल देर रात को सड़क पर ट्रैफिक न के बराबर था। ऐसे में कार चालक ने बेहद तेज गति से कार को दौड़ा दिया। फ्लाईओवर पर चढ़ते समय कार की रफ्तार और तेज कर दी गई। अचानक सामने खड़ी ट्राली कार चालक को शायद नहीं दिखाई दी और कार उससे भिड़ गई। हादसे में कार का अगला हिस्सा लगभग खत्म हो गया। बड़ी ही मशक्कत के बाद मृतक व घायलों को कार से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।


राजधानी की सड़कों पर बिना नियम के धड़ल्ले से चलते ट्रैक्टर...
राजधानी में बिना नंबर प्लेट और नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ट्रैक्टर खूब चल रहे हैं। न तो इनमें लाइट होती है और न ही पीछे की ओर कोई रिफ्लैक्टर लगा होता है। ट्राली लगाकर तो यह और भी खतरनाक हो जाते हैं। अक्सर अंधेरी सड़कों पर वाहन चालक इन ट्रैक्टरों की वजह से धोखा खा जाते हैं। चारों दोस्तों के साथ भी ऐसा ही हुआ। अंधेरा होने के कारण चारों दोस्त हादसे का शिकार हो गए।

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