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फरीदाबाद में 60% पूर्वांचल के लोग, होली में दिखेगी यूपी-बिहार की झलक

Wed, 23 Mar 2016 12:36 PM IST
पूजा शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
पूजा शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Wed, 23 Mar 2016 12:36 PM IST
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people of purvanchal make holi in his style in faridabad
holi around the world - फोटो : reckontalk

होली का त्योहार उत्साहपूर्वक मनाने के लिए पूर्वांचलवासियों ने जोर-शोर से तैयारियां शुरू कर दी हैं। यहां रह रहे करीब 60 फीसदी पूर्वांचलवासियों का होली खेलने का अंदाज देखकर आप यूपी और बिहार की संस्कृति से रू-ब-रू होंगे।

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जिस तरह पूर्वांवल के शहरों में होलिका पूजन, देवर-भाभी के बीच होली खेलने, कपड़ा फाड़ होली खेलने का क्रेज हैं, वहीं क्रेज सूर्या विहार, पल्ला, दयालबाग, ग्रीनफील्ड, एनआईटी, डबुआ आदि में रह रहे लाखों पूर्वांचलवासियों के सर चढ़कर बोलेगा।
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पूर्वांचल में देवर भाभी के बीच होली खेलने का क्रेज रहता है। सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। इसमें फाग गाए जाते हैं और बिहार की संस्कृति व सभ्यता का परिचय लघु नाटकों के माध्यम से दिया जाता है।
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शहर में भी पूर्वांचल मंच व प्रोत्साहन मंच की ओर से यूपी व बिहार की संस्कृति की झलक उजागर करने की पूरी तैयारी की जा रही है। यहां आयोजित होने वाले होली मिलन समारोह में बिहार से कलाकारों को बुलाया गया है, जो नृत्य व भोजपुरी होली गीतों पर प्रस्तुति देंगे।

बिहार में गुलाल व अबीर से तो होली खेली ही जाती है, लेकिन बिहार में कपड़ा फाड़ होली खेलने के लिए लोग काफी उत्साहित रहते हैं। होलिका दहन की राख को भी लोग एक दूसरे पर लगाने से नहीं छोड़ते हैं।

होली खेलने के दौरान एक दूसरे पर कीचड़ फेंका जाता है। होली खेलने के  दौरान पुरुष एक दूसरे के कपड़ों को फाड़ डालते हैं और शरीर को रंग डालते हैं।

पूजन से होती है शुरुआत : बिहार निवासी अजय सिन्हा ने बताया कि बसंत पंचमी पर गली मुहल्ले में चौराहे पर लकड़ियों को इककर होलिका तैयार की जाती है। इसके बाद से होलिका दहन तक इसमें लकड़ियां बढ़ाते रहते हैं। दहन के दिन होलिका पूजन करते हैं। इसमें मेवा, पिड़कियां चढ़ाकर परिवार के स्वस्थ व खुशहाल रहने की कामना की जाती है। दहन स्थल पर म्यूजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं। 

पहनावा होता है खास : राजीव कुमार ने बताया कि बिहार में होली खेलने के पहनावा भी खास होता है। होली पर पुरुष मलमल का कुर्ता व वाइट टोपी पहनते हैं, जबकि महिलाएं लाल और पीले रंग की साड़ी पहनती है। बदलते परिवेश में काफी बदलाव आ गया है। अब लोग जींस के ऊपर सफेद कुर्ता पहन लेते हैं और उसके ऊपर मार्केट में होली पर बिकने वाली कैप लगा लेते हैं। 

देवर भाभी की मजाक : अर्चना ने बताया कि बिहार में होली का त्योहार देवर भाभी के लिए काफी मायने रखता है। परिवार में शामिल नई बहू के लिए होली का त्योहार काफी खास होता है। देवर भाभी को रंग लगाने के लिए उत्साहित रहते है, जबकि भाभी बचने का प्रयास करती है, दोनों के बीच हंसी मजाक चलता है। परिवार के बुजुर्ग बहू को होली पर उपहार देते हैं।

क्या कहते है लोग :बिहार में बिल्कुल मथुरा-वृंदावन के अंदाज में होली खेली जाती है। मधुबन में होली खेलन आया रे, आज ब्रज में होली रे आदि रसिया गीत के साथ लोग सुबह से ही रंगों में सराबोर नजर आते है।  दोपहर में नहाने के बाद नए कपड़े पहने जाते है और फिर अपने रिश्तेदारों व जानकारों के यहां जाकर होली की बधाई दी जाती है। 
-अभय सिन्हा, ग्रीनफील्ड कॉलोनी 

बिहार की होली के हुड़दंग का क्या कहना, महिला और पुरुष होली के रंग में सराबोर रहते हैं। होली पर ढेर सारे पकवान बनाए जाते हैं, होली की तैयारी 15 दिन पहले शुरू हो जाती है। रंग खेलने वाले दिन सुबह से ही पकौड़ी, दही भल्ले व अन्य व्यंजन खाने का दौर शुरू हो जाता है। 

- बीपी सिंह, एनएचपीसी  

होली पर बिहार जाने का मन करता है, लेकिन हर बार रेलवे रिजर्वेशन न मिलने या फिर किसी काम के आने पर नहीं जा पाते हैं। हालांकि यहां भी बिहार के रहने वाले लोगों की सं या काफी है, जिससे यहां होली पर बिहार की झलक व आनंद मिल जाता है। बिहार की होली को मिस करते हैं। 
- विजय सिंह, न्यू तिलपत

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