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मरीज के शरीर में अब पांच किडनियां: दो बार गुर्दा प्रत्यारोपण रहा असफल, तीसरी बार में कामयाबी; यह बोले डॉक्टर

Wed, 26 Feb 2025 07:33 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद Published by: आकाश दुबे Updated Wed, 26 Feb 2025 07:33 PM IST
सार

फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में देवेंद्र बारलेवार नाम के मरीज की एक सर्जरी की गई। वह 15 वर्षों से क्रोनिक किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। अब वह स्वस्थ महसूस कर रहे हैं।

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Patient gets rare kidney transplant in Faridabad will now live with five kidneys
दुर्लभ किडनी प्रत्यारोपण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में एक 47 वर्षीय व्यक्ति का दुर्लभ गुर्दा (किडनी) प्रत्यारोपण हुआ। अब मरीज के शरीर में कुल पांच गुर्दे हैं। इससे पूर्व दो बार गुर्दा प्रत्यारोपण विफल होने के बाद मरीज को तीसरा गुर्दा लगाया गया। सर्जरी सफल होने के बाद मरीज अब स्वस्थ है। अब वह पांच गुर्दे के साथ अपना जीवन व्यतीत करेंगे।

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फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में देवेंद्र बारलेवार नाम के मरीज की एक सर्जरी की गई। वह 15 वर्षों से क्रोनिक किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। वर्ष 2010 में उनके दो असफल किडनी के प्रत्यारोपण हुए थे। यूरोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अहमद कमाल ने बताया कि 2022 में कोविड-19 से ग्रसित होने के बाद उनकी हालत और खराब हो गई।

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50 वर्षीय मस्तिष्क-मृत किसान के परिवार ने उनको किडनी दान करने का फैसला किया तो बारलेवार के लिए आशा की किरण जगी। पिछले माह की गई चार घंटे की सर्जरी में तीसरा गुर्दा प्रत्यारोपित किया गया। सर्जरी के दौरान चार गैर-कार्यशील किडनी के चलते ऑपरेशन में बहुत जटिलताएं आईं।

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डायलिसिस पर चल रहे देवेंद्र बेहद कमजोर हो गए थे
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि लंबे समय से डायलिसिस पर चल रहे देवेंद्र बेहद कमजोर हो गए थे। सर्जरी प्रक्रिया के दौरान सर्जन को मौजूदा चीरे वाली हर्निया के कारण पांचवीं किडनी के लिए कम जगह की समस्या का सामना करना पड़ा। इसके अलावा पेट की रक्त वाहिकाओं से नए गुर्दे को जोड़ना आवश्यक था। पिछली सर्जरी में स्टैंडर्ड वेसल्स का उपयोग किया गया था। 

क्रिएटिनिन स्तर ऑपरेशन के दो सप्ताह के भीतर सामान्य
बारलेवार का क्रिएटिनिन स्तर ऑपरेशन के दो सप्ताह के भीतर सामान्य हो गया, जिससे वह डायलिसिस मुक्त जीवन जी सकेंगे। ऑपरेशन के बाद देवेंद्र बारलेवार ने कहा कि दो असफल किडनी ट्रांसप्लांट से गुजरना काफी चुनौतीपूर्ण था। जब मुझे कोई उम्मीद नहीं दिखी तो डॉक्टरों ने मुझे जीवन जीने की राह दिखाई। आज मैं स्वतंत्र रूप से रोजमर्रा की चीजों को कर सकता हूं। उन्होंने कहा कि अब वह स्वस्थ महसूस कर रहे हैं।

गौतमबुद्धनगर में हुई पहली रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी... देखें संबंधित वीडियो-

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