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निर्भया के दोषियों को फांसी देने की तिथि तय करने पर फैसला सुरक्षित, अगली सुनवाई 23 को
Sun, 07 Apr 2019 05:51 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 07 Apr 2019 05:51 AM IST
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पटियाला हाउस अदालत ने निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड मामले में चारों दोषियों की फांसी की तारीख तय करने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत इस मामले में अगली सुनवाई 23 अप्रैल को करेगी।
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निर्भया के दोषियों को जल्द फांसी देने की मांग उसके माता-पिता ने पटियाला हाउस अदालत में दायर की है। शनिवार को इस पर सुनवाई के दौरान अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 23 अप्रैल की तारीख तय कर दी। इस बीच, अदालत यह भी तय करेगी कि बगैर क्यूरेटिव याचिका के निपटारे के दोषियों को फांसी की तारीख तय की जा सकती है या नहीं।
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इससे पहले, पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि सभी दोषियों ने फांसी की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल की है। ऐसे में उन्हें अभी फांसी नहीं दी जा सकती। जेल सुपरिंटेंडेंट ने भी अदालत को बताया कि अगस्त 2018 में चार दोषियों में से एक ने कहा था कि वह सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल करेगा। दूसरी ओर, निर्भया के अभिभावकों की तरफ से दायर याचिका में दावा किया गया था कि चारों दोषियों में से किसी की भी दया याचिका या क्यूरेटिव याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित नहीं है।
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उल्लेखनीय है कि दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 की रात एक निजी बस में अपने दोस्त के चढ़ी निर्भया के साथ चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। बेहद गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के लगातार प्रयास के बावजूद हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे सिंगापुर के अस्पताल भेजा गया था। वहां उसने दम तोड़ दिया था।
इस मामले के एक आरोपी ने जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी। एक अन्य नाबालिग अपराधी को कोर्ट ने 3 साल के लिए बाल सुधार गृह में भेजने की सजा सुनाई थी। अन्य चार आरोपियों को निचली अदालत में फांसी की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद अपराधियों ने फांसी की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल की। सभी स्थानों से इनकी याचिका को खारिज कर फांसी की सजा को बरकरार रखा गया। दया याचिका खारिज होने के बाद दोषियों के पास फांसी की सजा रद्द कराने के लिए सिर्फ क्यूरेटिव याचिका का ही विकल्प बचा है।