आखिर चमकी रेहड़ी वाले की बेटी की प्रतिभा, जीत लिया स्वर्ण
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घर की आर्थिक स्थिति कमजोर हो तो किसी भी क्षेत्र में एक लड़की का करियर बना पाना आसान नहीं होता। ऐसे में किसी खेल को चुनकर उसमें शिखर तक पहुंचना किसी भी लड़की के लिए बड़ी उपलब्धि कहा जा सकता है।
फरीदाबाद में रेहड़ी लगाने वाले की बेटी परवीन निशा ने ऐसा ही कमाल कर दिखाया है। हाल ही में गुवाहाटी में संपन्न हुए 12वें साउथ एशियन गेम्स में परवीन निशा ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाकर अपने जिले व परिवार का नाम रोशन किया है।
परवीन भारतीय खो-खो टीम में बतौर उपकप्तान शामिल थी। सेक्टर-37 के नजदीक ताजपुर पहाड़ी पर रहने वाली परवीन निशा सात बहनें है। उनके पिता मोहम्मद जुम्मन बदरपुर-बॉर्डर पर पानी की रेहड़ी लगाते हैं।
सात बहनें खेल में बना रहीं भविष्य
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की मिसाल बन रही यह सातों बहने खो-खो खेल में अपना भविष्य संवार रही हैं।
परवीन से बड़ी तीन बहनें खुशनूद, समरिन और सहनाज भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं और छोटी तीनों बहनें भी स्कूल में खो-खो का प्रशिक्षण ले रही हैं।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बदरपुर बॉर्डर में 12वीं कक्षा में पढने वाली परवीन बताती हैं कि उन्हें खो-खो में आने के लिए उनकी बड़ी बहन खुशनूद ने प्रोत्साहित किया।
खिलाड़ी बन करना चाहती हैं घर की मदद
इसके बाद उन्होंने इसी खेल में अपना भविष्य बनाना लक्ष्य बना लिया है। वह खेल कोटे के जरिए अच्छी नौकरी प्राप्त करना चाहती हैं और अपने पापा की हर संभव मदद करना चाहती हैं।
परवीन निशा कहती है कि बचपन में यह फैसला करना किसी भी मां-बाप के लिए आसान नहीं होता कि उनका बच्चा खिलाड़ी बने, ऐसे में एक लडक़ी का तो बिल्कुल भी नहीं।
वे उसे पढ़ा-लिखाकर अफसर बनाना चाहते हैं, लेकिन उनके माता-पिता ने उनकी सातों बहनों को खेल के प्रशिक्षण के लिए खुली छूट दी है। माता-पिता के विश्वास के साथ ही वह और उनकी बहनें खो-खो खेल में ऊंचाईयां छू रही हैं।