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दिल्ली समेत तीन राज्यों में कांग्रेस और आप का गठबंधन, आलाकमान के पाले में गेंद

Thu, 07 Jun 2018 09:44 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 07 Jun 2018 09:44 AM IST
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party high command will decided on congress and aam aadmi party alliance
फाइल फोटो
आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर कांग्रेस के प्रदेश नेताओं में भले ही बेचैनी हो लेकिन उनका मानना है कि निर्णय आलाकमान को ही करना है। 
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उधर, आप के नेता, प्रदेश नेताओं की अपेक्षा सीधे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से संपर्क साधने में लगे हैं और दोनों ही पार्टियों का मानना है कि भाजपा को सत्ता में पुन: आने से रोकने के लिए गठबंधन तो करना ही होगा। अब आप दिल्ली व पंजाब में चार-चार व हरियाणा में एक सीट पर अपनी रजामंदी दे सकती है। 
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सूत्रों के अनुसार, भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस को हर हाल में आप से गठबंधन करना ही होगा। उधर, दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों में आप को कोई विशेष फायदा न होने पर आप भी किसी न किसी तरह संसद में अपना प्रतिनिधित्व बनाए रखना चाहती है। 
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वर्तमान में पंजाब में आप के चार सांसद हैं लेकिन तीन विद्रोह कर चुके हैं। आप की पंजाब में छवि को नुकसान हुआ है। आगामी लोकसभा चुनाव में उसे पुन: चार सीटें जीतने पर संदेह है। दिल्ली में भी पहले जैसी स्थिति नहीं है। 

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Rahul Gandhi
उधर, कांग्रेस आलाकमान मात्र दिल्ली को नहीं देख रही बल्कि पूरे देश में क्या स्थिति होगी, उसके ध्यानार्थ ही कोई निर्णय लेने के मूड में है। वर्तमान में एक-एक सीट की अहमियत बढ़ती जा रही है। कांग्रेस को भी पता है कि उसी का वोट बैंक आप के पास गया है। 

भाजपा वर्तमान में विधानसभा में भले ही चार की संख्या पर है लेकिन उसका वोट प्रतिशत अब भी पहले के समान 30 प्रतिशत से ज्यादा ही है। 
कांग्रेस के अंदरूनी सर्वे को स्वयं कांग्रेसी सही नहीं मान रहे। 

कांग्रेस का मानना है कि यदि आप से समझौता होता है तो फजीहत जरूर होगी लेकिन फायदा भी है। दरअसल, राजनीति में कोई धर्म नहीं होता। एक दूसरे की धुर विरोधी पार्टियों का गठजोड़ देखने को मिल रहा है। ऐसे में यदि इन दोनों का समझौता हो जाए तो कोई नई बात नहीं है। 

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kejriwal
वर्तमान में सभी विपक्षी पार्टियों का एकमात्र उद्देश्य भाजपा को हराना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भाजपा को हराना है तो गठजोड़ करना ही होगा। फिलहाल, आप कांग्रेस को दिल्ली में तीन सीटें देने पर राजी है लेकिन उसकी एवज में हरियाणा व पंजाब में सीटें मांग रही है। 

वहीं, दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस नेताओं को डर सता रहा है कि यदि अभी से गठबंधन की बात पूरी तरह से सामने आ गई तो उसे आप के खिलाफ दिल्ली की समस्याओं को लेकर लोगों के समक्ष जाने में दिक्कत होगी और वे कोई भी नया आंदोलन नहीं खड़ा कर पाएंगे।

यही कारण है कि प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन बार-बार गठबंधन से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि आलाकमान कोई निर्णय करेगा तो हमसे बात किए बिना नहीं होगा। उधर, आप के नेता भी इस मुद्दे पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। 
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