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अब पार्किंसन का इलाज हुआ आसान, डीयू के प्रोफेसर ने दवा खोजने का किया दावा

Wed, 29 Jan 2020 05:08 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 29 Jan 2020 05:08 AM IST
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Parkinson treatment is now easy, DU professor claims to have found drug
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

देशभर में पार्किंसन की बीमारी से जूझ रहे रोगियों के लिए अच्छी खबर है। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में केमिस्ट्री विभाग के एक प्रोफेसर ने पार्किंसन की दवा खोजने का दावा किया है। अब तक इस बीमारी के लिए कोई दवा ना होने से काफी दिक्कत आ रही थी।

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प्रोफेसर का दावा है कि इस दवा का प्री-क्लिनिकल ट्रॉयल हो चुका है। अब इसका इस्तेमाल व्यवसायिक तौर पर हो सकता है। इसके लिए यूएस कंपनी से बातचीत हो चुकी है और अब केवल नियम और शर्तें तय करना बाकी है। उम्मीद है यह दवा जल्द ही बाजार में उपलब्ध होगी। 
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डीयू के केमिस्ट्री विभाग में प्रोफेसर दीवान. एस. रावत ने बताया कि दवा बनाने के लिए वह वर्ष 2012 से लगातार स्टडी कर रहे थे। शुरुआत में इस दवा का इस्तेमाल मलेरिया बीमारी के लिए किया गया। फिर इसका प्रयोग रिपरपस ड्रग के रूप में किया। मलेरिया में क्लोरोक्यूनिस दवा का इस्तेमाल किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 1987 में नेचर नाम के एक जर्नल में एक एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी कि मलेरिया की दवा का इस्तेमाल पार्किंसन बीमारी में किया जा सकता है, लेकिन इस पर किसी ने काम नहीं किया। हमने अपनी स्टडी के लिए इस रिपोर्ट को आधार बनाया। 


इस स्टडी को पूरा करने में उनका सहयोग यूएस के बोस्टन स्थित मेकक्लीन अस्पताल ने किया। स्टडी की शुरुआत में ही इंडियन पेटेंट फाइल कर दिया था। उसके बाद वर्ष 2014 में यूएस पेटेंट कराया। प्रो रावत ने बताया कि यौगिक (कंपाउड) तैयार कर उनका बोस्टन के ही अस्पताल में परीक्षण किया गया। वहां दवा की सफलता के नतीजे काफी अच्छे मिले। वह कहते हैं कि अब बेहतर तरीके से इस बीमारी का इलाज संभव हो सकेगा।  

क्या है पार्किंसन बीमारी

बीमारी में व्यक्ति की याददाश्त चली जाती है। हाथ-पैर कांपते रहते हैं, किसी को पहचानने में रोगी को परेशानी होती है। रोगी अधिकतर आंखें बंद रखता है। 

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