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पेरेंट्स और छात्र को देना होगा रैगिंग नहीं करने का वचनपत्र 

Tue, 02 Jul 2019 06:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Tue, 02 Jul 2019 06:53 AM IST
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Parents and students will have to give Promissory note for no ragging 
UGC

देश के सभी विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक सत्र 2019-20 में दाखिला लेने वाले सभी विद्यार्थियों और पेरेंट्स को अब हर वर्ष रैगिंग से दूर रहने का ऑनलाइन वचनपत्र (अंडरटेकिंग) भी देना होगा। 

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इसमें लिखा जाएगा कि वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एंटी रैगिंग रेगुलेशन 2016 (संशोधित) के नियमों का पालन करेंगे। विवि प्रबंधन को रैगिंग रोकने के लिए हॉस्टल, मैस, कैंटीन, टायलेट और बस स्टैंड का औचक निरीक्षण भी करना होगा। यदि कोई नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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यूजीसी के सचिव प्रो. रजनीश जैन की ओर से सोमवार को सभी राज्यों के मुख्य सचिव और 750 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखा गया है। यूजीसी के नियमों को सेंट्रल, स्टेट, निजी, डीम्ड -टू-बी यूनिवर्सिटी समेत अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू करना अनिवार्य है। 
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इसमें आईआईटी, मेडिकल कॉलेज, आईआईएम, एनआईटी भी शामिल हैं। प्रो. जैन के मुताबिक, किसी भी छात्र (नए या पुराने) पर रंग, नस्ल, धर्म, जाति, नृजातीय, लिंग (ट्रांसजेंडर सहित), यौन झुकाव, रूपरंग, राष्ट्रीयता, क्षेत्रीयता, भाषायी पहचान, जन्मस्थान, निवास स्थान, आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर शारीरिक अथवा मानसिक गलत आचरण (जिसमें दंबगई व बहिष्करण शामिल हैं) आदि सभी रैगिंग की श्रेणी में आता है। इनमें से किसी भी शब्द का प्रयोग करने पर रैगिंग के तहत मामला दर्ज होगा। 

नियमित काउंसलिंग से छात्रों के व्यवहार पर रखें नजर

यूजीसी का मानना है कि नए छात्रों के व्यवहार में यदि थोड़ा भी परिवर्तन आता है तो उससे बातचीत करें। छात्रों को परेशानी में देखने पर उनकी नियमित काउंसलिंग करें, ताकि वे अपनी दिक्कत काउंसलर से साझा कर सके। यदि व्यवहार में दिक्कत नजर आती है तो ऐसे विद्यार्थियों की गतिविधियों की भी जानकारी लें। कहीं ऐसा ना हो कि कोई सीनियर छात्र, फैकल्टी या कोई अन्य छात्र को परेशान तो नहीं कर रहा है। 

आवेदन और नए सत्र में ब्रोशर से रैगिंग रोकने पर करें काम
यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को दाखिला आवेदन पत्र के अलावा नए सत्र की शुुरुआत में ऐसे ब्रोशर कैंपस में लगाने का निर्देश दिया है, जिसमें रैगिंग की जानकारी, उसकी रोकथाम के लिए यूजीसी रेगुलेशन, नियम व सजा का प्रावधान की विस्तार से जानकारी होने चाहिए। रैगिंग रोकने संबंधी कमेटी भी गठित करने का निर्देश दिया है।

इस कमेटी के सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर व फोटो विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड होने चाहिए, ताकि छात्र दिक्कत के समय सीधे कमेटी सदस्यों से मदद ले सके। इसके अलावा कैंपस में सीसीटीवी लगाने का भी निर्देश दिया है। 

रैगिंग मामलों के वीडियो वेबसाइट पर अपलोड
देश में अभी तक जितने भी रैगिंग के मामले दर्ज हुए हैं उससे जुड़े पीड़ित छात्र और परिजनों के वीडियो वेबसाइट पर अपलोड किए हैं। इसमें दोषी छात्रों के वीडियो भी शामिल हैं।

इसके अलावा यूजीसी ने राष्ट्रीय टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800 -180-5522 और ईमेल helpline@antiragging.in भी तैयार किया है, ताकि छात्र यहां भी शिकायत भेज सकता है। शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखी जाएगी। 
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