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इस मेले में चार साल से नहीं आ रहे पाकिस्तानी शिल्पकार पर भारतीयों ने जारी रखा है कारोबार
भोला पांडेय/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 09 Feb 2017 08:33 PM IST
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सूरजकुंड मेले में लगा पाकिस्तानी स्टॉल।
- फोटो : अमर उजाला
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आतंकी घटनाओं के बाद दोनों मुल्कों (भारत-पाकिस्तान) के बीच तनाव बेशक जारी हो और एक दूसरे के यहां आने जाने पर रोक हो लेकिन शिल्पकारी आज भी सीमापार से आती-जाती है। 31वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले में पाकिस्तानी शिल्पकारी देखने को मिल रही है।
पाक शिल्पकारी को बेचने के लिए पाकिस्तान से तो कोई शिल्पकार नहीं आया है मगर एक भारतीय कारोबारी जरूर उनकी कला को मेले में बेच रहा है। व्यापारी की मानें तो ओनेक्स स्टोन पर की गई पाकिस्तानी शिल्पकारी की सप्लाई पूरी दुनिया में होती है।
अमर उजाला से बातचीत करते हुए खगड़िया, बिहार निवासी कारोबारी शौकत अली ने बताया कि दो मुल्कों के बीच पैदा हुए तनाव के चलते ही पाकिस्तानी शिल्पकार अब मेले में पिछले चार साल से नहीं आ पाते हैं।
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पाक शिल्पकारी को बेचने के लिए पाकिस्तान से तो कोई शिल्पकार नहीं आया है मगर एक भारतीय कारोबारी जरूर उनकी कला को मेले में बेच रहा है। व्यापारी की मानें तो ओनेक्स स्टोन पर की गई पाकिस्तानी शिल्पकारी की सप्लाई पूरी दुनिया में होती है।
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अमर उजाला से बातचीत करते हुए खगड़िया, बिहार निवासी कारोबारी शौकत अली ने बताया कि दो मुल्कों के बीच पैदा हुए तनाव के चलते ही पाकिस्तानी शिल्पकार अब मेले में पिछले चार साल से नहीं आ पाते हैं।
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कोलकाता पोर्ट के जरिए आता है सामान
मेले में खरीदारी करतीं युवतियां।
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे में वह पाकिस्तानी शिल्पकार से संपर्क कर ओनेक्स स्टोन के बने सामान को कंटेनर के जरिए यहां मंगाकर मेले में बेचते हैं। उन्होंने बताया कि ओनेक्स स्टोन पाकिस्तान के क्वेटा शहर के अलावा दुनिया के किसी भी हिस्से में नहीं मिलता।
इसकी खासियत ये है कि लाइफ टाइम इसका कोई मेंटिनेंस नहीं होता। साथ ही कलर हमेशा एक जैसा बना रहता है। इस पत्थर से ज्यादातर सजावटी सामान बनाया जाता है।
शौकत अली ने बताया कि ओनेक्स पत्थर के बने सामानों को कंटेनर के जरिए कोलकाता पोर्ट से लाया जाता है। इस बार मेले में टाइटैनिक पहली बार मंगाया गया है। कोलकाता के एक मार्बल कारोबारी राजेश कुमार ने ऑर्डर देकर टाइटैनिक को मंगाया है।
मेला खत्म होने के बाद टाइटैनिक को उनके पास भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी शिल्पकार धार्मिक चीजें भी बनाते हैं लेकिन उसके लिए पहले ऑर्डर करना पड़ता है।
इसकी खासियत ये है कि लाइफ टाइम इसका कोई मेंटिनेंस नहीं होता। साथ ही कलर हमेशा एक जैसा बना रहता है। इस पत्थर से ज्यादातर सजावटी सामान बनाया जाता है।
शौकत अली ने बताया कि ओनेक्स पत्थर के बने सामानों को कंटेनर के जरिए कोलकाता पोर्ट से लाया जाता है। इस बार मेले में टाइटैनिक पहली बार मंगाया गया है। कोलकाता के एक मार्बल कारोबारी राजेश कुमार ने ऑर्डर देकर टाइटैनिक को मंगाया है।
मेला खत्म होने के बाद टाइटैनिक को उनके पास भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी शिल्पकार धार्मिक चीजें भी बनाते हैं लेकिन उसके लिए पहले ऑर्डर करना पड़ता है।