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हाईकोर्ट: यह कोरोना की दूसरी लहर नहीं सुनामी है, ऑक्सीजन आपूर्ति में बाधा डालने वाले को लटका दिया जाएगा

Sat, 24 Apr 2021 12:00 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 24 Apr 2021 12:00 PM IST
सार

उच्च न्यायालय ने राजधानी में कोविड-19 की दूसरी लहर के तहत कोरोना के मामलों में भारी वृद्धि को सुनामी करार दिया है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी अधिकारी या व्यक्ति अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति में बाधा डालने की कोशिश करता है तो उसे लटका दिया जाएगा।

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Oxygen Crisis Delhi maharaja agrasen hospital move high court for oxygen supply court angry on delhi and delhi says give our quota else system will collapse
दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : ANI

विस्तार

उच्च न्यायालय ने राजधानी में कोविड-19 की दूसरी लहर के तहत कोरोना के मामलों में भारी वृद्धि को सुनामी करार दिया है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी अधिकारी या व्यक्ति अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति में बाधा डालने की कोशिश करता है तो उसे लटका दिया जाएगा। अदालत ने केंद्र व दिल्ली सरकार से दूसरी लहर से निपटने की तैयारियों के बारे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

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देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के मामलों के 15 मई तक चरम पर पहुंचने के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर के अध्ययन का हवाला देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने शनिवार को सख्त लहजे में केंद्र सरकार से पूछा है कि इससे निपटने की क्या तैयारी है? हाईकोर्ट ने केंद्र व दिल्ली सरकार को कोरोना के चरम से निपटने की तैयारियों के बारे में 26 अप्रैल को रिपोर्ट देने का निर्देश भी दिया। 
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और रेखा पल्ली की खंडपीठ ने दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में बढ़ते ऑक्सीजन संकट के मुद्दे पर शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी की। खंडपीठ ने कहा कि हम ऑक्सीजन में बाधा डालने वाले हर आदमी को फांसी देंगे।
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अदालत ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह ऑक्सीजन आपूर्ति की पिकअप में बाधा डालने वाले केंद्रीय, राज्य या स्थानीय प्रशासन के किसी भी अधिकारी का एक उदाहरण दे, हम किसी को नहीं बख्शेंगे। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह स्थानीय प्रशासन के ऐसे अधिकारियों के बारे में भी केंद्र को सूचित करे ताकि वह उनके खिलाफ कार्रवाई कर सके।

खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि वायरल बीमारी से मृत्यु दर कम होती है और जिन लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, वे अंतत: मर जाते हैं। अदालत ने कहा कि समस्या तब आती है, जब जिन लोगों को बचाया जा सकता था, वे भी मर रहे हैं। मृत्यु दर को कम करने की जरूरत है।

अदालत ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के वैज्ञानिकों के एक दल द्वारा किए गए अध्ययन का जिक्र करते हुए कहा कि कोविड की लहर मई के मध्य में और तेज होगी। अदालत ने कहा कि हम इसे एक लहर कह रहे हैं, यह वास्तव में सुनामी है। अदालत ने केंद्र से पूछा कि मामले बढ़ने पर बुनियादी ढांचे, अस्पतालों, चिकित्सा कर्मचारियों, दवाओं, टीकों और ऑक्सीजन के लिए क्या उपाय किए गए हैं।

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मई और जून में मामलों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो सकती है और देश को इसके लिए तैयार रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और अन्य लोग इस पर काम कर रहे हैं और उन्होंने ऑक्सीजन आयात करने का फैसला किया है और जहां भी संभव है वहां से ऑक्सीजन पैदा करने की संभावना भी तलाश रहे हैं।

अदालत गंभीर रूप से बीमार कोविड रोगियों के इलाज के लिए ऑक्सीजन की कमी को लेकर यहां महाराजा अग्रसेन अस्पताल, जयपुर गोल्डन अस्पताल, बत्रा अस्पताल और सरोज सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है।
 
अदालत ने केंद्र से पूछा कि आप ने हमें 21 अप्रैल को आश्वासन दिया था कि 480 मीट्रिक टन प्रतिदिन दिल्ली पहुंच जाएगी। हमें बताएं कि यह कब आएगी? अदालत ने यह सवाल दिल्ली सरकार के उस तर्क पर पूछा कि कुछ दिनों में केवल 380 मीट्रिक टन ऑक्सीजन प्रतिदिन मिली जबकि शुक्रवार को मात्र 300 मीट्रिक टन के आसपास ही मिली है। 

अदालत ने सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के अधिकारियों से भी सवाल किया कि केंद्र द्वारा उसे आवंटित ऑक्सीजन की आपूर्ति कराने के लिए टैंकरों को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने क्या प्रयास किए हैं।

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