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Delhi: सोनिया-राहुल गांधी की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, नेशनल हेराल्ड मामले में कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

Mon, 14 Jul 2025 11:26 AM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Mon, 14 Jul 2025 11:26 AM IST
सार

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सोमवार को नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोर्ट में सुनवाई पूरी हुई। जिसके बाद कोर्ट ने आदेश को सुरक्षित रख लिया है और 29 जुलाई को आदेश आएगा।

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order reserved and pronounced on July 29 After full debate in National Herald case
सोनिया गांधी और राहुल गांधी। (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आज नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने मामले में 29 जुलाई को फैसला सुनाने के लिए तारीख तय की है।
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इससे पहले बीती सुनवाई को नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राउज एवेन्यू कोर्ट स्थित विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में कहा था कि कांग्रेस पार्टी को दान देने वालों के साथ धोखाधड़ी की गई। ईडी के अनुसार, कांग्रेस को दान देने वालों में से कुछ लोगों को पार्टी टिकट भी दिए गए। इससे यह साफ होता है कि दानदाताओं के साथ छल हुआ है। ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने दलील दी कि गांधी परिवार का दावा गलत है कि उनका एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) पर कोई नियंत्रण नहीं था। उन्होंने कहा कि एजेएल ही नेशनल हेराल्ड का मूल प्रकाशक है और इसे गांधी परिवार नियंत्रित करता रहा है। मामले में अगली सुनवाई 14 जुलाई तय की गई थी। 

ईडी का कांग्रेस नेताओं पर है ये आरोप
इस केस में प्रवर्तन निदेशालय ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, दिवंगत कांग्रेसी नेता मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और प्राइवेट कंपनी यंग इंडियन पर साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है। ED का दावा है कि यंग इंडियन कंपनी ने धोखाधड़ी से एजेएल की करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कब्जा किया।

यंग इंडियन में गांधी परिवार की हिस्सेदारी पर सवाल
ईडी का कहना है कि राहुल और सोनिया गांधी की यंग इंडियन में 76 फीसदी हिस्सेदारी है। इसी हिस्सेदारी के जरिए उन्होंने एजेएल की संपत्तियों पर नियंत्रण पाया। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सिर्फ 90 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले में इतनी बड़ी संपत्ति यंग इंडियन के कब्जे में आ गई, जो मनी लॉन्ड्रिंग कानून का उल्लंघन है।

सोनिया गांधी की तरफ से भी दी गई सफाई
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में अपनी दलीलें पूरी की थीं। उन्होंने भी कहा कि इस मामले में कोई धोखाधड़ी नहीं हुई है और पूरी प्रक्रिया कानूनी ढंग से हुई थी। वहीं, इससे पहले तीन जुलाई को ईडी की ओर से कहा गया था कि गांधी परिवार यंग इंडियन के असली मालिक हैं और कंपनी पर पूरा नियंत्रण उन्हीं का है।

किन धाराओं में केस दर्ज, कौन-कौन आरोपी?
इडी ने गांधी परिवार और अन्य लोगों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धारा तीन (मनी लॉन्ड्रिंग) और धारा चार (मनी लॉन्ड्रिंग की सजा) के तहत चार्जशीट दाखिल की है। इस केस में सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डॉटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड भी आरोपी हैं। 

ये भी पढ़ें: नेशनल हेराल्ड केस में नया मोड़: राहुल गांधी के वकील ने कहा- कांग्रेस ने AJL को बेचने नहीं, बचाने की कोशिश की


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