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Delhi NCR News: बांग्लादेश की जेल में बंद कैदी को समय से पहले रिहा करने का आदेश
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-आसिफ बांग्लादेश का नागरिक है और 2021 में उसे भारत से बांग्लादेश भेज दिया गया था
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने बांग्लादेश की जेल में बंद उम्रकैद की सजा काट रहे आसिफ उर्फ नईम को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया है। आसिफ बांग्लादेश का नागरिक है और 2021 में उसे भारत से बांग्लादेश भेज दिया गया था। उसे वर्ष 2004 में मानसरोवर पार्क इलाके में दर्ज एक डकैती और हत्या में जनवरी 2010 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वह 21 साल से अधिक समय तक जेल में रह चुका है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने 30 जुलाई 2025 के सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (एसआरबी) के आदेश को रद्द कर दिया। एसआरबी ने जुलाई 2025 में उसकी समय से पहले रिहाई की मांग ठुकरा दी थी।
हाई कोर्ट ने कहा कि जेल रिकॉर्ड के अनुसार, आसिफ का व्यवहार संतोषजनक रहा है। अदालत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि दो सप्ताह के भीतर आवश्यक आदेश जारी कर मामले को आगे बढ़ाया जाए। साथ ही, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के माध्यम से बांग्लादेश की संबंधित जेल प्राधिकरण को आधिकारिक तौर पर जानकारी दी जाए, ताकि आदेश का पालन हो सके। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी कैदी को दूसरे देश भेजे जाने से उसकी सजा में राहत देने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता। सजा में कमी या माफी देने का अधिकार सजा सुनाने वाले देश के पास ही रहता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने बांग्लादेश की जेल में बंद उम्रकैद की सजा काट रहे आसिफ उर्फ नईम को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया है। आसिफ बांग्लादेश का नागरिक है और 2021 में उसे भारत से बांग्लादेश भेज दिया गया था। उसे वर्ष 2004 में मानसरोवर पार्क इलाके में दर्ज एक डकैती और हत्या में जनवरी 2010 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वह 21 साल से अधिक समय तक जेल में रह चुका है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने 30 जुलाई 2025 के सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (एसआरबी) के आदेश को रद्द कर दिया। एसआरबी ने जुलाई 2025 में उसकी समय से पहले रिहाई की मांग ठुकरा दी थी।
हाई कोर्ट ने कहा कि जेल रिकॉर्ड के अनुसार, आसिफ का व्यवहार संतोषजनक रहा है। अदालत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि दो सप्ताह के भीतर आवश्यक आदेश जारी कर मामले को आगे बढ़ाया जाए। साथ ही, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के माध्यम से बांग्लादेश की संबंधित जेल प्राधिकरण को आधिकारिक तौर पर जानकारी दी जाए, ताकि आदेश का पालन हो सके। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी कैदी को दूसरे देश भेजे जाने से उसकी सजा में राहत देने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता। सजा में कमी या माफी देने का अधिकार सजा सुनाने वाले देश के पास ही रहता है।
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