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नागरिकता संशोधन विधेयक पर शरणार्थी शिविरों में रह रहे लोगों ने क्या कहा...

Thu, 12 Dec 2019 06:32 AM IST
Vikas Kumar परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 12 Dec 2019 06:32 AM IST
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Opinion of people living in refugee camps on Citizenship Amendment Bill
शरणार्थी शिविर में रह रहे हिंदू - फोटो : अमर उजाला

धर्म के आधार पर बंटवारा तब हुआ था, जब हिंदुस्तान की जमीन पर खून से सीमाएं खींच दी गईं। उस वक्त हिंदू-मुस्लिम की राजनीति नहीं होती तो लोग अपने घरों में होते। आज जब वर्षों बाद हिंदुओं को उनका अधिकार मिल रहा है तो फिर ये विरोध क्यों? ये कहना है 70 वर्षीय उस बुजुर्ग लक्ष्मी देवी का, जो तीर्थयात्रा के बहाने से अपने परिवार सहित पाकिस्तान के सिंध से भारत आईं। वे उन 120 हिंदू परिवारों के साथ मजनूं का टीला स्थित शरणार्थी शिविर में रह रही हैं, जो पाकिस्तान से भागकर अपने वतन वापस आए हैं। शरीर से लाचार और अभाव की जिंदगी जी रहीं लक्ष्मी देवी का कहना है कि न उन्हें गद्दा चाहिए, न खाना। न घर चाहिए और न ही नौकरी। उन्हें बस अपना वतन चाहिए, और कुछ नहीं। 800 लोगों की आबादी वाले इस शिविर में नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 का पूरी गर्मजोशी के साथ स्वागत किया जा रहा है।

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इसी शिविर से चंद कदम आगे तिब्बती शरणार्थियों का रिहायशी इलाका है, जहां हर कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए नागरिकता संशोधन विधेयक का स्वागत कर रहा है। यहां ज्यादातर बौद्घ धर्म के अनुयायी रहते हैं। वहीं कुछ जैन और ईसाई धर्म के अनुयायी भी आसपास रहते हैं। 
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ठीक इसके विपरीत कालिंदी कुंज इलाके में स्थित रोहिंग्या मुस्लिमों के शिविर में लोग डरे-सहमे से हैं। बर्मा से भागकर यहां तक पहुंचे ये लोग अब अपने देश वापस जाना नहीं चाहते हैं। अमर उजाला ने जब इनसे पूछा कि राज्यसभा में विधेयक पारित हो गया तो क्या आप अपने वतन वापस जाना चाहेंगे? तो इनका जवाब था, मर जाएंगे, लड़ जाएंगे पर अपने देश वापस नहीं जाएंगे। बर्मा की लड़ाई से अपने परिवार को बचाने के लिए वे भागकर आए थे। उन्होंने वहां उस मंजर को देखा है जब अपनों की सरेआम हत्या कर दी गई थी, इसलिए वे सरकार से अपील कर रहे हैं कि उन्हें भारत में ही रहने दिया जाए। ये लोग पिछले 6 से 8 वर्ष से यहां रह रहे हैं।
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हाथ में तिरंगा, घर में पीएम मोदी

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शरणार्थी शिविरों में रह रहे पाकिस्तान से आए हिंदू - फोटो : अमर उजाला

मजनूं का टीला स्थित हिंदू शरणार्थियों के घर में बुधवार को खुशियां देखने को मिलीं। इन्हें उम्मीद है कि अब जल्द ही इन्हें भी भारत में मताधिकार मिल सकेगा। अपने हाथ में तिरंगा और कमीज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोटो चिपकाए यहां के युवा खुशियां मना रहे हैं। वहीं कई घरों की दीवारों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोटो भी देखने को मिला।
 

सरकार से बिजली भी नहीं मिली

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शरणार्थी शिविर में रह रहे हिंदू - फोटो : अमर उजाला

इस शिविर में रहने वाले लोगों का कहना है कि हमें सरकार से बिजली भी नहीं मिली है। न ही कुछ और। हम मेहनत करने में विश्वास रखते हैं। सुखनंद प्रधान का कहना है कि मेहनत करके अपना जीवन यापन कर रहे हैं। हमें इसके सिवाय कुछ और नहीं चाहिए, बस हमें अपना वतन चाहिए। 

रोहिंग्या शिविर : मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रहे

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बस्ती में रह रहे रोहिंग्या मुस्लिम - फोटो : अमर उजाला

अभावों की जिंदगी रोहिंग्या शिविर में रह रहे लोग भी जी रहे हैं। ये लोग भी दिन भर मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। हालांकि इन लोगों से जब वतन वापसी के बारे में सवाल करो तो कोई अपने घर में चला जाता है तो कोई बात ही नहीं करता। कुछ लोगों के साथ अभी भी बातचीत के लिए भाषाई समस्या मिली है। मोहम्मद शेख का कहना है कि वे घर वापस नहीं जाना चाहते। वे दिल्ली में ऑटो रिक्शा चलाते हैं। वहीं जुबेर का कहना है कि वह मर जाएंगे, लड़ जाएंगे, लेकिन अपना घर छोड़कर नहीं जाएंगे। वहीं महिला शबनम का कहना है कि बर्मा में लड़ाई हुई, जिसमें उनके रिश्तेदारों को मार डाला गया। वहां से बचने के लिए वे भारत आए थे। यहां वे अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, सरकार उन्हें वापस न भेजे। बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी सेवाओं के लिए यहां भी रह रहे करीब 90 परिवार जद्दोजहद कर रहे हैं। मोहम्मद हुसैन का कहना है कि जब भारत में बाकी सभी धर्म के शरणार्थियों का स्वागत किया जा रहा है तो मुस्लिम धर्म के लोगों को सम्मान क्यों नहीं मिलना चाहिए? वहीं शिविर में ही रह रहे राशिद का कहना है कि सरकार हमेशा से ही उन्हें और बाकी लोगों को अपराधी साबित करने पर जुटी रहती है। दिल्ली में कहीं भी घटना होती है तो नेता उसे रोहिंग्या मुस्लिमों से जोड़ने लगते हैं। उन्होंने हाल ही में हुए तैमूर नगर कांड और हरी नगर की घटनाओं का जिक्र भी किया।

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पाकिस्तान से आई शर्णार्थी लक्ष्मी देवी - फोटो : अमर उजाला
पाक हिंदुओं के दिल्ली में यहां हैं शिविर 
आदर्श नगर, रोहिणी सेक्टर-11, गोपालपुर, मजनूं का टीला, मजलिस पार्क, रजोकरी। 

रोहिंग्या मुस्लिमों के शिविर 
कालिंदी कुंज, न्यू अशोक नगर, तैमूर नगर, सरिता विहार, बदरपुर, वसंत कुंज। 

एक नजर
. दिल्ली में 2 लाख से ज्यादा शरणार्थी हैं जिनमें से करीब 11 हजार पाक हिंदूओं की आबादी है। 
. दिल्ली में रोहिंग्या मुस्लिमों और पाक हिंदूओं के अलावा श्रीलंका, बांग्लादेश और तिब्बत से आए शरणार्थी भी हैं। करीब 5 हजार म्यामांर से आए शरणार्थी हैं।
. भारत में श्रीलंका और तिब्बत के 2 लाख शरणार्थियों को सरकार सुरक्षा और अन्य सुविधाएं प्रदान करती है। इसी वर्ष 30 नवंबर तक इनमें से 40 हजार शरणार्थी यूएन रिफ्यूजी एजेंसी यूएनएचसीआर के तहत पंजीकृत हैं। 
. भारत में करीब 5 लाख श्रीलंका, 1.5 लाख तिब्बत और 6 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी शरणार्थियों का अनुमान है। भारत सरकार के अनुसार 40 हजार रोहिंग्या मुस्लिम हैं। 
. ठीक इसी तरह भारत के कर्नाटक, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और जम्मू कश्मीर में सर्वाधिक तिब्बती शरणार्थी हैं। 

बातचीत
2011 में हम अपने परिवार के साथ दिल्ली आए थे। तब से यही रह रहे हैं। मैं और मेरा भाई पास में ही कॉलेज है वहां हम पढ़ने जाते हैं। हमें अच्छा लग रहा है कि जल्द ही हम भी कॉलेज के बाकी दोस्तों की तरह खुद को भारतीय कहेंगे।
-शोभराज, हिंदू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरे देश को साथ देना चाहिए। वे हिंदुओं का साथ दे रहे हैं। हमारे दुख और पीड़ा को समझने के लिए पीएम का आभार।
- ताराचंद, शरणार्थी

बेटा बिछड़ गया था। फिर वह वापस अपने वतन आ गया तो इसमें अब औरों को क्या परेशानी है। दुनिया भर में मुस्लिम देशों की भरमार है, लेकिन भारत एक हिंदू राष्ट्र है। अगर सरकार हमें वह अधिकार दे रही है तो विरोध क्यों?
- सुखनंद प्रधान, शरणार्थी
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