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सेना में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध केस की सुनवाई में मौजूद रहेंगे केवल संबंधित पक्ष

Wed, 22 Jul 2020 06:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 22 Jul 2020 06:36 AM IST
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Only related parties will be present in the hearing of the ban of social media in the army
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)

दिल्ली हाई कोर्ट ने सैन्य अधिकारियों पर सोशल मीडिया के प्रयोग पर प्रतिबन्ध के खिलाफ जम्मू और कश्मीर के लेफ्टिनेंट कर्नल पी के चौधरी कि ओर से दायर याचिका पर सिर्फ संबंधित पक्षों की मौजूदगी में सुनवाई का आदेश दिया है। 

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इस याचिका में सेना के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसके तहत सांय अधिकारियों को फेसबुक और इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स को डिलीट करने का आदेश दिया गया था। केंद्र के वकील ने आग्रह किया कि सेना द्वारा लिया गया यह बहुत संवेदनशील निर्णय है और जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। इसके बाद पीठ ने सिर्फ संबंधित पक्षों की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू की।
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न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ और न्यायमूर्ति आशा मेनन की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई के दौरान केंद्र के वकील काअनुरोध स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि केवल मामले से जुड़े वकीलों को ही सुनवाई में शामिल किया जाए तथा मीडिया समेत सभी अन्य को वेबलिंक से हटा दिया जाए। सुनवाई में हिस्सा लेने वालों के मुताबिक हाई कोर्ट ने याचिका पर विचार किए जाने के मुद्दे पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। पीठ इस दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल पी के चौधरी की ओर से सेना के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्हें पीठ ने या तो सेना के आदेश का पालन करने या अपना इस्तीफा देने को कहा था। 
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कर्नल की तरफ से पेश वकील द्वारा जिरह शुरू करने से पहले ही केंद्र सरकार के स्थायी वकील अजय दिगपाल ने कहा कि ‘‘यह संवेदनशील मामला है और मैं सिर्फ संबंधित पक्षों की मौजूदगी में सुनवाई का अनुरोध करता हैं । मामले से जो जुड़े हुए नहीं हैं उन्हें हटने के लिए कहा जा सकता है ।’’ 

उन्होंने कहा कि खुफिया सूचना पर विचार-विमर्श करने के बाद सेना ने यह संवेदनशील फैसला किया जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है । वहीं सैन्य अधिकारी के वकील ने कहा कि उन्हें कोई दिक्कत नहीं है अगर सुनवाई के दौरान सिर्फ संबंधित पक्ष ही मौजूद रहें। हालांकि उन्होंने कहा कि इस निर्णय में कोई गोपनीयता वाली बात नहीं है क्योंकि सेना ने अपने सभी अधिकारियों को पत्र जारी किया है और मीडिया को भी इस बारे में अवगत कराया गया था। 

इससे पहले हाई कोर्ट ने सैन्य अधिकारी कि याचिका पर कोई भी वन्तरिम रहत देने से इंकार कर दिया था और कहा था कि उनके पास विकल है या तो वह संगठन का आदेश मानें या फिर अपने पद से इस्तीफ़ा दे दें। याचिका ने दिए गए तथ्य के मुताबिक छह जून की नीति के तहत भारतीय सेना के सभी कर्मियों को आदेश दिया गया है कि वे फेसबुक, इंस्टाग्राम और 87 अन्य ऐप पर अपने अकाउंट बंद करें।


इसके विरोध ने चौधरी ने कहा कि जब वह अकाउंट बंद कर देंगे तो उनके फेसबुक अकाउंट में सभी डेटा, संपर्क और दोस्तों से संपर्क टूट जाएगा जिसे फिर ‘‘बहाल करना मुश्किल’’ होगा। उन्होंने कहा था कि विदेश में रहने वाली बहन से भी वह फेसबुक के जरिए संपर्क करते हैं। 

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