निर्भया के बाद भी नहीं बदली इस थाने की तस्वीर
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16 दिसंबर 2012 दिल्ली गैंगरेप के बाद गैंगरेप रोकने के लिए जितनी समितियां बनीं उन सबने इस बात पर जरूर जोर दिया कि पुलिस स्टेशनों पर पुलिस बल की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, खासतौर से महिला पुलिस की।
इन सारी सिफारिशों के बाद भी हालात जस के तस हैं। वसंत विहार पुलिस स्टेशन जहां 16 दिसंबर के गैंगरेप के बाद घटना की एफआईआर दर्ज कराई गई थी वहां की हालत तो और भी खराब है।
यहां की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है मगर महिलाओं के खिलाफ अपराध जरूर बढ़ गया है।
बढ़ा अपराध पर नहीं बढ़े पुलिसकर्मी
वसंत विहार थाने में 2014 के अप्रैल महीने तक जहां 17 छेड़छाड़ के मामले दर्ज हुए थे वहीं इस साल इनकी संख्या 50 है। वहीं इसी अवधि में रेप केस की संख्या पिछले साल जहां 9 थी इस बार बढ़कर 15 हो गई है।
दक्षिण जिला के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कहते हैं कि अपराध की संख्या भले ही बढ़ गई हो लेकिन इन मामलों की छानबीन के लिए वसंत विहार थाने में केवल दो महिला सब-इंस्पेक्टर हैं, जो केवल रेप और ऐसे ही जघन्य अपराधों के लिए हैं।
वहीं छेड़छाड़, शोषण और मनचलों द्वारा पीछा किए जाने जैसे मामले तो पुरूष पुलिसकर्मी ही देखते हैं। हाल ही में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने रेप, छेड़छाड़, चेन छिनैती और हत्या जैसे अपराधों की जद में आने वाले चार सबसे प्रभावित क्षेत्र चिंहित किए हैं। पुलिस जल्द ही इन क्षेत्रों में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए कदम उठाने जा रही है।
2764 नागरिकों पर है एक पुलिसकर्मी
एक अध्ययन से निकले आंकड़े साफ करते हैं कि सच में राजधानी के कुछ इलाके महिलाओं के लिए कितने असुरक्षित हैं। इस लिस्ट में वसंत विहार का नाम 15 रेप केस और 50 छेड़छाड़ के मामलों के साथ सबसे ऊपर है।
7 किमी के अधिकार क्षेत्र वाले वसंत विहार थाने में उत्तर भारत की सबसे महंगी संपत्तियां भी आती हैं। इनमें महंगी रिहाइशी कॉलोनियां, शिक्षण संस्थान और व्यापारिक इकाईयां भी शामिल हैं।
वसंत विहार थाने के लिए 174 पुलिसकर्मियों की स्वीकृति है लेकिन यहां केवल 144 पुलिसकर्मी ही काम करते हैं। इस तरह से देखा जाए तो 2,764 नागरिकों पर एक पुलिसकर्मी नियुक्त है।