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एम्स में मरीजों की कलाई पर मिल सकते हैं रिस्ट बैंड, ओपीडी में मरीजों की देखभाल कर रहे मैनेजर
Tue, 25 Dec 2018 05:16 AM IST
Vikas Kumar
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 25 Dec 2018 05:16 AM IST
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एम्स दिल्ली
- फोटो : फाइल फोटो
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जल्द ही देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स में मरीजों की कलाई पर आपको तरह-तरह के रंगों वाले रिस्ट बैंड दिखाई दे सकते हैं। अस्पताल में आने वाले मरीज और उनके तीमारदारों में संस्थान के प्रति भरोसा कायम करने और उन्हें बेहतर सुविधाएं देने के लिए ये पहल आगामी दिनों में की जा सकती है। देशभर के एम्स को लेकर गठित सेंट्रल इंस्टीट्यूट बॉडी (सीआईबी) ने ऐसा करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को सिफारिश की है।
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बताया जा रहा है कि मंत्रालय ने इन सिफारिशों को लेकर सभी एम्स से सलाह भी मांगी है। उधर, दिल्ली एम्स के सूत्रों की मानें तो बोर्ड की सिफारिशों को लेकर प्रबंधन भी इस दिशा में पहल पर विचार कर रहा है। बोर्ड ये भी चाहता है कि स्माइल एंड केयर अभियान पूरे देश के एम्स में चलाया जाए ताकि मरीजों का भरोसा जीता जा सके। हाल ही में संपन्न सीआईबी की बैठक में अस्पताल में मरीजों की परेशानी कम करने के लिए एजेंडा भी रखा गया। इसके तहत दिल्ली एम्स की तारीफ करते हुए कहा गया कि यहां मरीजों के लिए ओपीडी में बाकायदा पेशेंट केयर मैनेजर तैनात किए गए हैं। करीब 52 मैनेजर व कोऑर्डिनेटर मरीज और उनके परिजनों को ओपीडी, डॉक्टर कक्ष, ऑपरेशन, प्रयोगशाला, दवा और कैंटीन-पार्किंग से जुड़ी जानकारियां दे रहे हैं। ताकि मरीज और उनके घरवाले संस्थान में आकर एम्स परिसर में इधर से उधर धक्के न खाएं। बोर्ड ने अन्य एम्स को अपने यहां इस पहल पर जोर देने की अपील की है।
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सीआईबी का मानना है कि एम्स आने के बाद बेहतर अनुभव लेकर वापस घर जाना मरीजों के लिए जरूरी है। इसलिए मरीजों की प्रतिक्रियाएं लेने पर भी जोर देना चाहिए। साथ ही उन्होंने ये भी सलाह दी है कि मरीजों के कार्ड रंगीन हों या फिर मरीजों की कलाई पर रंगीन रिस्ट बैंड होने चाहिए। ताकि उन्हें देख स्टॉफ समझ सके कि ये मरीज किस विभाग का है।
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- प्रशिक्षित काउंसलरों की तैनाती जरूरी
बोर्ड ने मंत्रालय के समक्ष ये प्रस्ताव भी रखा कि अस्पतालों में मरीजों की भीड़ के कारण ज्यादा दबाव रहता है। मरीज, तीमारदार और स्टाफ सभी इससे परेशान रहते हैं। कई बार अस्पतालों में विवाद और मारपीट तक की स्थिति देखने को मिलती है। जबकि मरीज को इलाज के साथ-साथ उसकी काउंसलिंग की जिम्मेदारी भी उपचार करने वाली टीम की होती है। इसलिए सभी एम्स को प्रशिक्षित काउंसलर तैनात करने चाहिए।