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प्रद्युम्न हत्याकांड : जेजे बोर्ड ने इस नए एक्ट को ध्यान में रखकर दिया बालिग करार

Thu, 21 Dec 2017 09:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Thu, 21 Dec 2017 09:27 AM IST
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on the basis of new juvenile justice act, court tried accused as an adult
ryan international - फोटो : सुदर्शन झा

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा आरोपी छात्र का मामला सेशन कोर्ट में स्थानांतरित किए जाने का फैसला जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में संशोधन को ध्यान में रखकर दिया गया है।

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इस कानून में हुए बदलाव के बाद हत्या और रेप जैसे जघन्य अपराध में शामिल 16 साल से ज्यादा उम्र के किशोर पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हुआ है। अपनी तरह का हरियाणा का यह पहला मामला है।
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 इस मामले को स्थानांतरित किए जाने में न केवल सोशल इनवेस्टिगेशन, साइकोलॉजिकल टेस्ट रिपोर्ट बल्कि सीबीआई की क्राइम थ्योरी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मामले को जुवेनाइल बोर्ड में ही रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर के पैतरे भी काम नहीं आए।

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हाइपर है आरोपी छात्र

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ryan international - फोटो : सुदर्शन झा

सूत्रों के अनुसार सोशल इनवेस्टिगेशन रिपोर्ट में सामने आया था कि छात्र थोड़ी-थोड़ी बात पर हाइपर हो जाता है। एक बार वह शराब के नशे में मिला था। परिजनों के झगड़े से वह अक्सर तनाव में रहता था। इसके अलावा एक बार उसने पानी के टैंक में जहर मिलाने की भी साजिश रची थी।

पीटीएम और एग्जाम टालना चाहता था
पीजीआई रोहतक के साइकोलॉजी विभाग के डॉक्टर द्वारा छात्र की मनोस्थिति की जांच की गई। इसके अलावा सीबीआई द्वारा बोर्ड के समक्ष छात्र की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें उसने स्वीकार किया है कि स्कूल में पीटीएम व एग्जाम को टालने के लिए घटना को अंजाम दिया

मामला वापस बोर्ड में चलाने के लिए फैसले को चुनौती देने की तैयारी

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ryan international - फोटो : सुदर्शन झा

आरोपी छात्र के परिजन इस फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। आरोपी के वकील का कहना है कि सिर्फ दो टीचरों की रिपोर्ट के आधार पर किया गया यह निर्णय गलत है। उधर, प्रद्युम्न के वकील भी इससे निपटने की तैयारी में जुट गए हैं।

आरोपी के अधिवक्ता संदीप अनेजा ने कहा कि रायन स्कूल की केवल दो टीचरों द्वारा ही छात्र के खिलाफ रिपोर्ट दी गई है जबकि पास-पड़ोस और छात्र के दोस्तों द्वारा उसकी रिपोर्ट सकारात्मक दी गई है।

डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि छात्र का आईक्यू लेवल औसतन है। ऐसे में वह इस तरह की साजिश रचने के काबिल नहीं है। सीबीआई द्वारा बोर्ड के समक्ष यह थ्योरी बताई है कि छात्र पीटीएम व परीक्षा टालना चाहता था, ऐसे में उसने हत्या की योजना बनाई थी।

यदि सीबीआई की थ्योरी पर बात की जाए तो उसकी मनोदशा वयस्कों की तरह नहीं है। इसलिए उस पर नाबालिग की तरह मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उधर, प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर ने कहा कि बोर्ड ने सभी रिपोर्ट को मद्देनजर रखते हुए ऐतिहासिक फैसला दिया है।

आरोपी छात्र द्वारा बेहद ही संगीन अपराध को अंजाम दिया गया है।  उधर, अधिवक्ता सुशील टेकरीवाल ने कहा कि बोर्ड के इस फैसले के बाद आरोपी पर वयस्कों की तरह ही ट्रायल चलेगा। सजा होने पर 21 वर्ष की उम्र तक उसे बाल सुधार गृह में रखा जाएगा उसके बाद उसे जेल में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। 

कानून के जानकार की राय

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ryan international - फोटो : सुदर्शन झा

नया जुवेनाइल कानून दोषपूर्ण है। कानून निश्चित होता है लेकिन इस कानून में अनिश्चितता है। हत्या व बलात्कार जैसे जघन्य मामले में 16 से 18 वर्ष के बीच के किसी आरोपी पर नाबालिग के तौर भी मामला चल सकता है और किसी आरोपी पर बालिग के तौर पर भी। यह सही नहीं है। कानून एक समान होना चाहिए। नए कानून के तहत जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड यह तय करता है कि 16 से 18 वर्ष केआरोपी पर मामला बालिग केतौर पर चलना चाहिए या नहीं। ऐसे में इस कानून के दुरुपयोग का अंदेशा रहता है। हाई-प्रोफाइल मामलों में जनमानस की सोच और मीडिया का प्रभाव भी बोर्ड के फैसले पर असर डाल सकता, ऐसी आशंका रहती है। कानून में बदलाव असंतोषजनक और मनमाना है। - संजय हेगडे, वरिष्ठ वकील

बाथरूम में मिली थी प्रद्युम्न की बॉडी

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ryan international - फोटो : सुदर्शन झा

08 सितंबर : स्कूल में प्रद्युम्न की गला रेतकर हत्या। पुलिस ने मुख्य आरोपी के तौर पर कंडक्टर अशोक को गिरफ्तार किया
09 सितंबर : पुलिस की थ्योरी पर उठे सवाल, सीबीआई जांच की मांग शुरू। अशोक के परिजनों ने फंसाने का लगाया आरोप। एसआईटी गठित
15 सितंबर : मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच व स्कूल प्रशासन को अधीन लेने का किया ऐलान
22 सितंबर : प्रद्युम्न के पिता का सीबीआई जांच शुरू कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान। शाम को सीबीआई ने दर्ज किए एफआईआरए
07 नवंबर : सीबीआई ने स्कूल के 11वीं कक्षा के छात्र को आरोपी मानते हुए हिरासत में लिया
13 नवंबर : प्रद्युम्न के पिता ने आरोपी छात्र को व्यस्क की तरह मामला चलाने की याचिका दायर की, बोर्ड ने सोशल इनवेस्टिगेशन रिपोर्ट मांगी।
21 नवंबर : अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश ने कंडक्टर अशोक को जमानत दी।
20 दिसंबर : जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाने का फैसला दिया।

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