गोपनीय रखी जाएगी खालिद की रिमांड की प्रक्रिया
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देशद्रोह के आरोपी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बन भट्टाचार्य की सुनवाई पर हाईकोर्ट ने कहा है कि तीनों छात्रों की हिरासत की प्रक्रिया सुरक्षित स्थान पर पूरी की जाएगी।
इतना ही नहीं हिरासत प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय भी रखा जाएगा। कोर्ट के आदेश के अनुसार रिमांड प्रक्रिया हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की निगरानी में होगी। जबकि डीसीपी प्रेम नाथ किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए उनका सहयोग करेंगे।
गौरतलब है कि उमर खालिद और अनिर्बन ने घटनाक्रम के तहत देर रात पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया। इस मामले का मास्टरमाइंड खालिद को बताया जा रहा है।
इससे पहले उमर खालिद को पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस आरके पुरम पुलिस स्टेशन से बसंत कुंज लेकर गई थी। बसंत कुंज थाने में ही उमर खालिद पर देशद्रोह का मामला दर्ज है। यहां पूछताछ के बाद खालिद की मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पेशी हुई।
देशद्रोह के आरोपी छात्र उमर खालिद और अनिर्बन भट्टाचार्य दोनों छात्रों को कोर्ट में पेश किया जाना था। लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते अब छात्रों की पेशी थाने में ही होगी। इससे पहले हाईकोर्ट ने दोनों को राहत देने से इनकार कर दिया था।
देर रात दोनों जेएनयू सिक्योरिटी की गाड़ी से वसंतकुंज थाने पहुंचे। यहां से उन्हें मेडिकल के लिए एम्स ले जाया गया था। खालिद और अनिर्बन समेत अन्य छात्रों के खिलाफ संसद हमले के दोषी अफजल गुरू के समर्थन में 9 फरवरी को विवादित कार्यक्रम आयोजित करने और राष्ट्रविरोधी नारेबाजी करने का केस दर्ज है।
सरेंडर करने से पहले जेएनयू कैंपस में छात्रों की मीटिंग हुई
सरेंडर करने से पहले जेएनयू कैंपस में छात्रों की मीटिंग हुई। इसमें छात्रसंघ उपाध्यक्ष शेहला राशिद ने कहा कि बुधवार से नए सिरे से लड़ाई लड़ी जाएगी। मीटिंग के बाद छात्र सरेंडर के लिए निकले।
इस मामले में सबसे पहले पुलिस ने कन्हैया को गिरफ्तार किया था लेकिन बाकी आरोपी 12 फरवरी से फरार थे। रविवार रात को खालिद व अन्य पांच आरोपी जेएनयू परिसर में देखे गए तब से ही इनकी गिरफ्तारी या सरेंडर के कयास चल रहे थे।
उमर, अनिर्बन के अलावा आशुतोष, रामा नागा और अनंत प्रकाश आरोपी हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ 20 फरवरी को लुकआउट नोटिस जारी किया था।
हाईकोर्ट ने दे दिया था दोनों को झटका
इससे पहले मंगलवार को दिन में हाईकोर्ट ने जेएनयू के दो छात्रों उमर खालिद व अनिर्बन भट्टाचार्य के उनके समक्ष समर्पण की इजाजत देने से इंकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि दोनों की सुरक्षा के मद्देनजर समर्पण पर विचार किया जाएगा।
दोनों छात्र पुलिस के समक्ष समर्पण करने के लिए तैयार भी हो गए। अदालत में सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित हो गई। साथ ही इन छात्रों को जेएनयू परिसर में घुसकर गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को निर्देश देने संबंधी याचिका खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी के समक्ष खालिद व भट्टाचार्य की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कामनी जायसवाल ने तर्क रखा कि पुलिस ने उनके मुवक्किलों को फर्जी मामले में फंसाया है।
'सुबूत नहीं कि दोनों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए'
उन्होंने दर्ज प्राथमिकी का हवाला देते हुए कहा कि पूरी प्राथमिकता में उनके मुवक्किल के खिलाफ एक भी सबूत नहीं है कि उन्होंने जेएनयू परिसर में देश विरोधी व पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए।
उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल पुलिस को जांच में सहयोग देना चाहते है लेकिन उनकी जान को खतरा है इसलिए वे सुरक्षित रूप से इस अदालत के समक्ष समर्पण करना चाहते है।
पुलिस ने इस मामले में कन्हैया कुमार को गिरफ्तार किया लेकिन पुलिस हिरासत में उसकी पटियाला हाउस कोर्ट में दो बार वकीलों ने पिटाई कर दी। सर्वोच्च न्यायालय ने पांच सदस्यीय वकीलों की कमेटी को पटियाला हाउस में भेजा तो उनके साथ भी दुर्व्यवहार किया गया।
इसलिए की थी सुरक्षा के बीच समर्पण की मांग
हिंसक घटनाओं को देखते हुए ही सर्वोच्च न्यायाल ने सुनवाई सीधे इस अदालत में तय की है। पुलिस कन्हैया व अन्य को सुरक्षा प्रदान करने में असफल रही है।
स्वयं पुलिस आयुक्त को सीधे सुरक्षा का आदेश दिया गया लेकिन इसके बावजूद घटना दोहराई गई। उन्होंने एक टीवी चैनल के स्टिंग का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी वकील सरेआम कह रहे है कि वे इन छात्रों की हत्या कर देंगे, उन पर पैट्रोल बम से हमला करेंगे।
स्पष्ट है कि उनके मुवक्किलों के जीवन को खतरा है ऐसे में वे मात्र सुरक्षित तरीके से इस अदालत के समक्ष समर्पण की मांग कर रहे हैं।
अदालत ने कहा कि उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाएगी
न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने उनके तर्क को खारिज करते हुए कहा कि समर्पण इस अदालत में क्यों। आप प्रक्रिया को समझे, मनमानी न करें।
अदालत ने कहा कि समर्पण या फिर गिरफ्तारी के 24 घंटों के भीतर पुलिस को आरोपी को अदालत में पेश करना पड़ता है। पुलिस की जिम्मेदारी है आरोपी को पूरी सुरक्षा दी जाए।
अदालत ने कहा कि उनके मुवक्किलों को पूरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी। आप पुलिस के समक्ष समर्पण करें। समर्पण गुप्त तरीके से करवाया जाएगा।
इसलिए नहीं कर रहे थे अबतक समर्पण
दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने पांच आरोपी छात्रों को चेतावनी दी कि वे जांच में सहयोग करें नहीं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करने के सभी विकल्प खुले हैं।
उन्होंने कहा कि जेएनयू की घटना के दौरान देशद्रोही भाषण दिए गए और नारे लगाए गए। हम यह भी जानते हैं कि कुछ लोग इसमें शामिल थे जो इसके तुरंत बाद गायब हो गए और अब लौट कर वापस आए हैं।
दिल्ली पुलिस आयुक्त बस्सी ने कहा, ‘आज हम जेएनयू के उन पांच छात्रों में कुछ सदबुद्धि आने तक का इंतजार कर सकते हैं ताकि वे पुलिस के साथ सहयोग करें।’
छात्रों को आशंका, जो कन्हैया के साथ हुआ वह हमारे साथ न हो
देशद्रोह के आरोपी जेएनयू के पांचों छात्र ने कहा है कि उनके पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह पुलिस के साथ पूछताछ के लिए तैयार हैं।
जेएनयू छात्र संघ के महासचिव रामा नागा ने कहा कि हम इसलिए गायब हुए थे क्योंकि हमें डर था कि जो कन्हैया के साथ हुआ वह हमारे साथ भी हो सकता था।
पुलिस हमसे पूछताछ कर सकती है लेकिन हमें कोई समन नहीं मिला है।