104 मिनट में तय होगा दिल्ली से अलवर तक का सफर, 30 मिनट में गुरुग्राम
दिल्ली से मेरठ तक करीब 90 किलोमीटर की रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरीडोर परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद दूसरे चरण यानी दिल्ली से अलवर तक आरआरटीएस कॉरीडोर का भी खाका तैयार कर लिया गया है।
दिल्ली से गुरुग्राम और रेवाड़ी होते हुए अलवर तक 180.5 किलोमीटर लंबे कॉरीडोर का निर्माण किया जाएगा। हालांकि इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को अभी मंजूर नहीं मिली है। इस रैपिड कॉरीडोर के पूरा होने पर दिल्ली से अलवर तक का सफर महज 104 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। वहीं गुरुग्राम मात्र 30 मिनट में पहुंचा जा सकेगा।
इस कॉरीडोर पर सिग्नल व्यवस्था, टेलीकम्युनिकेशन और किराए आदि के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद होंगी। दिल्ली-अलवर कॉरीडोर की खूबियों को लेकर एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के जरिये शनिवार को भारतीय पर्यावास केंद्र में आरआरटीएस कॉरीडोर के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया था।
कार्यशाला में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के सदस्य सचिव बीके त्रिपाठी, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा व एनसीआरटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर विनय कुमार सिंह भी मौजूद थे।
गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए तीन चरणों में आरआरटीएस कॉरीडोर का निर्माण किया जाना है। इसके तहत तीसरे चरण में दिल्ली से पानीपत तक 111 किलोमीटर लंबे कॉरीडोर का निर्माण किया जाना है। 2016 में 37,539 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को छह वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस कॉरीडोर की विशेषता
180.5 किलोमीटर होगी इसकी लंबाई
124.5 किलोमीटर हिस्सा एलीवेटेड व शेष 56 भूमिगत होगा
कुल 19 स्टेशन बनेंगे, जिनमें 9 अंडरग्राउंड होंगे
180 किलोमीटर प्रति घंटा होगी स्पीड की अधिकतम सीमा
100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी सामान्य गति सीमा