अब बच्चों के खौफ में जी रहे हैं दिल्ली के टीचर
पिछले महीने तुगलकाबाद के स्कूल में कक्षा नौंवी के एक स्टूडेंट ने स्कूल प्रिंसिपल को खौफजदा कर दिया। उसने कम्प्यूटर तोड़ा, टेलीविजन को कुचल दिया और फर्नीचर के साथ भी तोड़फोड़ करने लगा। प्रिंसिपल ने जब ऑफिस छोड़ा तो उनके कान के पीछे से खून बह रहा था।
छात्र को पिछले नवंबर में स्कूल में तोड़फोड़ और आतंक फैलाने के एवज में वहां से निकाल दिया गया, लेकिन लम्बे समय तक उस बच्चे का खौफ स्कूल में बना रहा।
पिछले साल अगस्त में मदनपुर खदर में एक सीनियर टीचर ने जब एक बच्चे को डांटा तो बच्चे और उसके पैरेन्ट्स ने मिलकर टीचर की पिटाई कर दी, जिसकी वजह से उन्हें एक हफ्ते से ज्यादा अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
58 साल की टीचर के बाल पकड़कर खींच डाले
2011 में आठवीं क्लास के एक स्टूडेन्ट ने रोहिणी में 58 साल की टीचर के बाल पकड़ कर खींच लिए, लात मारी और नुकीली वस्तु से उनकी ठुड्डी पर वार किया। ये घटना उस वक्त हुई जब टीचर ने परीक्षा के दौरान स्टूडेंट्स से नोट्स मांगा और तेज बोलने से मना किया। अन्य टीचर्च ने रोकने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
सरकारी स्कूलों में ज्यादातर टीचर्स ने मुंह पर उंगली रखकर आना शुरू कर दिया है। वे जानते हैं कि बच्चों से कुछ कहना अपनी मुसीबत को दावत देना है। इस तरह की घटनाओं से दिल्ली के सरकारी स्कूल भरे पड़े हैं। जहां शोर मचाने से मना करने पर टीचर्स को बच्चों के टॉर्चर का शिकार होना पड़ रहा है।
गवर्नमेन्ट स्कूल एसोसिएशन के मुताबिक पिछले अगस्त से अब तक टीचर्स को बच्चों के द्वारा प्रताड़ित करने के छह मामले सामने आ चुके हैं। ये भले ही भरोसा करने में मुश्किल लगते हों, लेकिन सच्चाई यही है।
बच्चे टीचर्स के प्रति सम्मान को लगातार खोते जा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह बुरी संगत और सरकारी नीतियों में खामिया है जिसकी वजह से बच्चे इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने लगे हैं।
बच्चे ने प्रिंसिपल के सामने टीचर को मारा थप्पड़ा
एक बच्चे ने प्रिसिंपल के सामने ही टीचर को थप्पड़ मार दिया। वहीं दूसरी ओर एक अन्य बच्चा और उसके पैरन्ट्स एक टीचर को इस कदर कोसते रहे जब तक वो टीचर तनाव में ही नहीं चला गया।
एक अन्य टीचर की कहानी पर गौर करें तो वो कहती हैं कि गैस्ट टीचर तो इन स्कू्ल्स में एक बार आने के बाद दोबारा नहीं आना चाहते, लेकिन हमें तो रोजाना इसी तरह के माहौल में दिन गुजारने पड़ रहे हैं।
जब एक टीचर ने बच्चे के काम ना करने पर पैरेन्ट्स से शिकायत करने की बात कही तो बच्चे ने बदला लेने के लिए टीचर की कार के पहियों से हवा ही निकाल दी। दूसरे ही दिन टीचर के ड्राइवर की दूसरे सीनियर लड़कों ने पिटाई भी कर दी। वह आगे कहती हैं कि और हम सोचते हैं कि टीचिंग एक सम्मानजनक क्षेत्र है।
स्थितियां बद से बद्तर होती जा रही हैं
हमारे पास 16 लाख स्टूडेन्ट्स हैं, लेकिन स्थितियां सुधरने के बजाय बद से बदतर होती जा रही हैं। ऐसे में हमें इस तरह की परिस्थिति से निपटने के लिए हर स्कूल के लिए इमरजेंसी रिस्पॉंस टीम बनाने के लिए कहा गया है लेकिन वो भी कुछ जगहों तक सीमित है।
ज्यादा गंभीर मामलों में भी बच्चों के खिलाफ एक्शन नहीं लिया जा सकता है, क्योंकि ये जुवेनाइल के अन्तर्गत आते हैं। ऐसे में सिर्फ ये कहा जाता है कि स्कूलों को दरवाजे बंद कर और बच्चों के लिए कांउसलर रखकर इन परिस्थितियों से निपटना चाहिए, लेकिन क्या ये संभव है।