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अब दूरदराज इलाकों में शिक्षकों के साथ पंचायत करेगी शिक्षा जारी रखने में मदद

Thu, 20 Aug 2020 05:08 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 20 Aug 2020 05:08 PM IST
सार

- नई गाइडलाइन ऑनलाइन क्लास या शिक्षा से जुड़े रहने के लिए डिजिटल संसाधन उपलब्ध न होने वाले छात्रों पर फोकस

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Now panchayat will work with teachers to reach education till the last end
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अब ग्रामीण व दूर-दराज के छात्रों को शिक्षा से जोड़ने के पंचायत मदद करेगी। जिन छात्रों के पास पढ़ाई जारी रखने के लिए डिजिटल संशाधन नहीं होगा, उन्हें शिक्षक द्वारा तैयार नोट पंचायत पहुंचाएगी। केंद्र सरकार ने राज्यों की ऑनलाइन क्लास और सीबीएसई सर्वे रिपोर्ट आधार पर पहली से 12वीं कक्षा के छात्रों के नई गाइडलाइन तैयार की है।

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इसी गाइडलाइन में ऐसे छात्रों की मदद के लिए पंचायत को जोड़ने का प्रावधान किया गया है। पंचायत शिक्षक के नोट बच्चे के घर तक पहुंचाने के साथ-साथ गांव के सामुदायिक केंद्र या सुविधा केंद्र में लगे टीवी को भी ऑनलाइन क्लास से जोड़ेंगे।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बुधवार देर शाम एनसीईआरटी विशेषज्ञों द्वारा तैयार नई गाइडलाइन जारी की। गाइडलाइन तीन भागों में विभाजित है। पहले वर्ग में जिन छात्रों के पास पढ़ाई के लिए कोई डिजिटल संशाधन नही है। ऐसे छात्रों के लिए पंचायत, स्वयं सहायता समूह आदि ग्रुप को जोड़ा जाएगा। पंचायत और स्वयं सहायता समूह ऐसे छात्रों के घरों तक शिक्षकों द्वारा तैयार नोट पहुंचाएंगे।
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इसके अलावा सामाजिक दूरी काध्यान रखते हुए सामुदायिक केंद्र के टीवी में दूरदर्शन या किसी अन्य निजी सर्विस प्रोवाइडर के शिक्षा चैनल से  छात्रों को जोड़गा। इसमें तय समय पर अलग-अलग क्लास लगाने का प्रावधान किया गया है। यदि किसी पंचायत में टीवी नहीं होगा, तो वे लगवा सकेंगे।

इसके अलावा ऐसे वर्ग के छोटी कक्षा के छात्रों को कार्य पुस्तिका, कार्यशीट आदि के माध्यम से शिक्षा से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा दूसरे वर्ग में ऐसे छात्र हैं, जिनके पास सीमित  डिजिटल संसाधन उपलब्ध हैं। जबकि तीसरे वर्ग में छात्रों  के पास ऑनलाइन शिक्षा के लिए डिजिटल संसाधन उपलब्ध हैं।

विशेष चिह्नि से अशिक्षित अभिभावकों को समझाएंः
गाइडलाइन में अशिक्षित अभिभावकों के लिए पहली बार खास प्रावधान किया गया है। ऐसे परिवारों को विशेष चिह्नि समझाएं जाएं। इससे उन्हें पता लगता रहेगा कि उनका बच्चे पढ़ाई कर रहा है या नहीं? हर दिन शिक्षक स्वयं या फिर पंचायत प्रतिनिधि को बच्चे की नोटबुक में उसकी परफारमेंस के आधार पर चिह्नि बनाएगा। इससे अभिभावक को  कमी या सुधार की जानकारी मिल जाया करेगी। गाइडलाइन में चार प्रकार के आसान चिह्नि या साइन भी बताए गए हैं।

गणित और साइंस विषय में सबसे अधिक दिक्कतः
सीबीएसई के गूगल सर्वे में सामने आया है कि गणित और साइंस विषय को समझने में छात्रों को सबसे अधिक दिक्कत आ रही है। 45.20 फीसदी छात्र मैथ्स,30.60 फीसदी लैंग्वेज,20 फीसदी साइंस,11.80 फीसदी सोशल साइंस व दस फीसदी छात्र फिजिकल एजुकेशन विषय को ऑनलाइन क्लास में नहीं समझ पा रहे हैं। एनसीईआरटी द्वारा जारी अकेडमिक कैलेंडर के तहत पढ़ाई के लिए48.40 छात्र ही जागरूक हैं। वहीं, 82 फीसदी छात्र मोबाइल, 20.40 फीसदी लैपटॉप,3.10 फीसदी टीवी, 0.50 फीसदी रेडियो और 35.70 फीसदी छात्र किताबों से पढ़ाई कर रहे हैं।


21 फीसदी छात्र खुश तो 27 फीसदी ऑनलाइन पढ़ाई से दुखीः
इस सर्वे में 21.40 फीसदी छात्र ऑनलाइन क्लासरूम से खुश तो 26.90 फीसदी छात्र नाखुश थे। क्योंकि उनहें दिक्कत आ रही हैं। वहीं, 39.70 संतुष्ठ और 12 फीसदी छात्रों को लगता है कि यह एक  बोझ है।

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