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Delhi NCR News: प्रदूषण पर अब लाइव नजर, आईआईटी दिल्ली बताएगा प्रदूषण का कारण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2026 08:36 PM IST
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रियल-टाइम स्टडी जल्द शुरू होगी, पीएम10 पर रहेगा फोकस
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सुपर-साइट फिर होगी चालू, हॉटस्पॉट मॉनिटरिंग और लाइव डैशबोर्ड से तैयार होगी नई रणनीति

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदूषण से लड़ाई अब डेटा के आधार पर लड़ी जाएगी। दिल्ली सरकार ने आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। इससे पता चलेगा कि राजधानी की हवा खराब करने में कौन से स्रोत ज्यादा जिम्मेदार हैं और किस इलाके में कब कार्रवाई जरूरी है।
आईआईटी दिल्ली रियल-टाइम स्टडी के माध्यम से बताएगा कि हवा में प्रदूषण कहां से आ रहा है, कौन से कारण इसे बढ़ा रहे हैं और किस समय ज्यादा असर पड़ रहा है। इस योजना को लेकर बुधवार को पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की अध्यक्षता में अहम बैठक हुई। इसमें आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने विस्तृत रूप से प्रस्तुति दी है। इसके बाद मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी मंजूरी प्रक्रियाएं तेजी से पूरी की जाएं, ताकि परियोजना जल्द शुरू की जा सके।
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पीएम10 पर खास फोकस रहेगा

ये स्टडी पांच साल तक चलेगी और इसमें पीएम10 पर विशेष फोकस रहेगा। अभी तक कई अध्ययन पीएम2.5 पर केंद्रित रहे हैं, लेकिन दिल्ली में धूल और बड़े कणों वाले प्रदूषण की भी भूमिका है। ऐसे में पीएम10 की सही पहचान और निगरानी से नई नीति बनाने में मदद मिलेगी। इस परियोजना की सबसे अहम कड़ी दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी की सुपर-साइट को फिर से चालू करना है। इसे आधुनिक उपकरणों से जोड़ा जाएगा। साथ ही मोबाइल मॉनिटरिंग यूनिट्स भी तैनात होंगी, जो अलग-अलग इलाकों और प्रदूषण हॉटस्पॉट्स में जाकर हवा की जांच करेंगी।
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वर्ल्ड-क्लास प्लेटफॉर्म बनाने की तैयारी
इस स्टडी के तहत राजधानी को वर्ल्ड-क्लास एयर क्वालिटी इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म मिलेगा। इसमें लाइव डैशबोर्ड, साप्ताहिक अपडेट, मासिक रिपोर्ट, हॉटस्पॉट विश्लेषण और नीति संबंधी सुझाव शामिल होंगे। इससे सरकार को तुरंत फैसले लेने में आसानी होगी। मंत्री ने कहा कि हवा की गुणवत्ता सुधारना सरकार की प्राथमिकता है। ये अध्ययन बताएगा कि कौन से कदम जमीन पर असर दिखा रहे हैं और किन क्षेत्रों में अतिरिक्त काम की जरूरत है। अध्ययन के दौरान मौसम, स्थानीय उत्सर्जन, बाहरी क्षेत्रों से आने वाले प्रदूषण और मौसमी बदलावों का भी विश्लेषण किया जाएगा। सोनीपत और दिल्ली के आंकड़ों की तुलना कर यह समझने की कोशिश होगी कि बाहर से आने वाला प्रदूषण कितना असर डाल रहा है। परियोजना के तहत डीपीसीसी कर्मचारियों को आधुनिक उपकरण चलाने, डेटा विश्लेषण और मॉडलिंग की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। हर प्रमुख हॉटस्पॉट पर कम से कम 30 दिन की मौसमी सैंपलिंग होगी।
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