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Delhi: अब कैंसर मरीजों को टारगेट थेरेपी देना होगा आसान, सफदरजंग अस्पताल में शुरू हुई जीन सीक्वेंसिंग
Fri, 09 Jun 2023 07:57 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Fri, 09 Jun 2023 07:57 AM IST
सार
सफदरजंग अस्पताल में नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) की सुविधा शुरू की गई है। यह किसी सरकारी अस्पताल में देश में पहली एडवांस जीन सीक्वेंसिंग सुविधा है।
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सफदरजंग अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कैंसर के मरीजों को टारगेट थेरेपी देना अब और आसान हो जाएगा। साथ ही बच्चों में होने वाले अनुवांशिक रोग की पहचान भी जल्द हो पाएगी। इसके लिए सफदरजंग अस्पताल में नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) की सुविधा शुरू की गई है। यह किसी सरकारी अस्पताल में देश में पहली एडवांस जीन सीक्वेंसिंग सुविधा है। इसकी मदद से पता चल पाएगा कि कैंसर के लिए कौन से जीन जिम्मेदार हैं। इसके बाद जीन को टारगेट करके थेरेपी दी जा सकेगी। इसके अलावा टीबी के मरीजों के लिए भी यह काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।
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बृहस्पतिवार को सफदरजंग अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) सुविधा के साथ मॉलिक्यूलर लैब का उद्घाटन चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीएल शेरवाल, ओएसडी डॉ. वंदना तलवार और प्रिंसिपल डॉ. गीतिका खन्ना ने किया। इस मौके पर पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील रंगा, प्रभारी मॉलिक्यूलर लैब डॉ. मुकुल सिंह सहित अन्य उपस्थित रहे।
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एनजीएस की मदद से बीमारी के कारणों को पता लगेगा
डॉ. शेरवाल ने बताया कि इस लैब की मदद से मरीजों के उपचार में सुधार आएगा। एनजीएस की मदद से पता कर पाएंगे कि किसी मरीज में बीमारी का कारण क्या है। उसी आधार पर डॉक्टर उसका उपचार भी केंद्रित कर सकेगा। इससे उपचार में सुधार तो होगा ही साथ ही मरीजों के ठीक होने का समय भी बेहतर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आणविक निदान सुविधा सभी प्रकार के कैंसर से पीड़ित रोगियों के लिए फायदेमंद होगी। अस्पताल में डीएनए सीक्वेंसिंग करने के बाद कैंसर मरीजों को लक्षित चिकित्सा दे पाएंगे।
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बच्चों के उपचार में होगा सुधार
विभाग प्रमुख डॉ. सुनील रंगा ने कहा कि सुविधा शुरू होने के बाद बच्चों में उपचार में सुधार होगा। यह सुविधा ल्यूकेमिया वाले छोटे बच्चों के लिए भी फायदेमंद होगी। साथ ही इम्युनोडेफिशिएंसी रोगों वाले रोगी और एमडीआर-तपेदिक जैसे रोगाणुरोधी प्रतिरोध में भी फायदेमंद होगी।
शोध को मिलेगा बढ़ावा
एनजीएस की सुविधा से आणविक जीव विज्ञान के क्षेत्र में मूल शोध करने में मदद मिलेगी। इसकी सहायता से जीन में होने वाले बदलाव की पहचान से पता कर सकेंगे कि रोग की जटिलता क्यों बढ़ रही है। कोरोना में बदलाव के लिए भी जीन सीक्वेंसिंग की गई थी जिससे कोरोना के बदलते रूप का पता चल सका। ऐसे में अब अन्य रोगों में होने वाले बदलाव के लिए जीन सीक्वेंसिंग करके पता लगाया जा सकेगा कि इसमें क्या बदलाव हो रहा है। जिससे आने वाले दिनों में इन रोगों के उपचार के लिए भी प्रयास किया जा सकेगा।