{"_id":"65b961821e3662f3b5085b85","slug":"now-aiims-will-fix-broken-teeth-with-3d-printing-2024-01-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi : अब 3डी प्रिंटिंग से टूटे दांत जोड़ेगा एम्स, आईआईटी के साथ तैयार किया तार; लगाने में होगी आसानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi : अब 3डी प्रिंटिंग से टूटे दांत जोड़ेगा एम्स, आईआईटी के साथ तैयार किया तार; लगाने में होगी आसानी
Wed, 31 Jan 2024 02:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 31 Jan 2024 02:43 AM IST
सार
एम्स के दंत चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (सीडीईआर) के बाल चिकित्सा और निवारक दंत चिकित्सा विभाग ने आईआईटी दिल्ली के इंजीनियर और एम्स फॉरेंसिक लैब के डॉक्टरों के साथ मिलकर डेंटल ट्रॉमा स्प्लिंट तैयार किया है।
विज्ञापन
Aiims delhi, एम्स, दिल्ली एम्स
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
दुर्घटना में टूटे दांत को एम्स 3डी प्रिंटिंग से जोड़ेगा। एम्स के दंत चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (सीडीईआर) के बाल चिकित्सा और निवारक दंत चिकित्सा विभाग ने आईआईटी दिल्ली के इंजीनियर और एम्स फॉरेंसिक लैब के डॉक्टरों के साथ मिलकर डेंटल ट्रॉमा स्प्लिंट तैयार किया है। तार 3डी मुद्रित सिलिकॉन आधारित डिजाइन पर तैयार किया गया है। तार लगाने से टूटा दांत अपनी जगह से नहीं हिलेगा, वहीं घाव भरने की गति भी तेज होगी। सामान्य तार लगाने के दौरान होने वाले खून के रिसाव से संक्रमण की आशंका भी खत्म हो जाएगी।
विज्ञापन
विभाग के डॉ. सौरभ शर्मा ने कहा कि भारतीय लोगों के जबड़े को ध्यान में रखते हुए स्पिलंट में 66 एमएम का तार लगाया गया है। इसे आसानी से दांत के आगे के हिस्से में फिक्स किया जा सकता है। तार को फिक्स करने के दौरान होने वाले खून के रिसाव को जैली में रोका जा सकेगा। अभी दांत को जोड़ने के लिए सामान्य तार का इस्तेमाल होता है। इन तार को लगाने के दौरान अक्सर दांत हिल जाते हैं। इसके अलावा पुराने तार को लगाने के दौरान खून का रिसाव भी हो जाता है जिससे संक्रमण होने का खतरा रहता है,जबकि 3 डी प्रिंटिंग से तैयार यह तार आसानी से फिक्स हो जाता है। इसमें एक ही तार है। यह मजबूत होने के साथ सुंदर भी है।
विज्ञापन
ट्रायल में मिले बेहतर परिणाम
डॉ. सौरभ शर्मा ने कहा कि पुराने तरीके से लगाए जाने वाले तार व 3डी प्रिंटिंग से लगाए गए तार का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। इस दौरान हुए ट्रायल में पांच शवों पर दोनों तरीके से तार लगाए गए। इसके परिणाम लगभग एक जैसे आए। वहीं दुर्घटना में आए लोगों के दांत भी जोड़े गए। इसमें भी परिणाम बेहतर पाए गए। इसके अलावा खून के रिसाव से होने वाले संक्रमण को रोका जा सका। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में अभी और ट्रायल होंगे।
विज्ञापन
टूटते हैं आगे के दांत
एम्स में आने वाले मरीजों के आंकड़े के अनुसार हादसे के बाद अधिकतर लोगों के दांत आधे टूटे होते हैं,जबकि काफी लोगों के हिल जाते हैं। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि मुंह के बल गिरने पर आगे के दांत को सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
सैनिकों के घाव को भरेगा एम्स का उपकरण
दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों में घायल होने वाले सैनिकों और लोगों के घाव को जल्द ही एम्स का उपकरण ठीक करेगा। यह उपकरण घाव में होने वाले रिसाव को सोखकर ऑक्सीजन का संचार करेगा। इससे न केवल घाव जल्द ठीक होगा, बल्कि उस जगह पर सुस्त हुई नसें भी फिर से काम करने लगेंगी। ऐसा होने पर मरीज का घाव दोगुनी गति से ठीक होगा।
दरअसल एम्स में मंगलवार को रिसर्च डे पर अध्ययन को दिखाया गया। इसमें एम्स के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल बायोडिजाइन के पूर्व छात्रों ने उन्नत घाव भरने वाली प्रौद्योगिकी उत्पाद इनोहील को प्रदर्शित किया। इस उत्पाद का ट्रायल दो साल तक करीब 60 मरीजों पर किया गया। इसके परिणाम बेहतर आने के बाद डीआरडीओ ने इस उत्पाद की मांग की है। इनका इस्तेमाल दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्र में किया जा सकता है। जहां सैनिकों के घाव भरने में ज्यादा समय लगता है।
इस उत्पाद के बारे में शल्य चिकित्सा अनुशासन विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुषमा सागर ने बताया कि मौजूदा समय में घाव पर पट्टी लगाई जाती है। समय समय पर इसे बदलना पड़ता है। इसी के विकल्प के तौर पर एम्स के छात्रों ने इस उत्पाद का निर्माण किया है। पहले घाव पर एक फोम लगाया जाता है। उसके ऊपर एक परत होती है और फिर उसपर एक छन्नी होती है। वह छन्नी पाइप के सहारे मशीन से जुड़ जाती है। मशीन निगेटिव प्रेशर डालकर वैक्यूम बनाता है। जिससे घाव में होने वाला रिसाव मशीन में चला जाता है। इससे घाव जल्दी भरने लगता है। निगेटिव प्रेशर के साथ ऑक्सीजन भी होता है जिससे घाव के आसपास सुस्त हुई नसें भी फिर से सक्रिय हो जाएगी।