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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi: Opposition intensifies against the clearing of 1,800 houses and shops in Ali Village

दिल्ली: आली गांव में 1800 मकान-दुकान खाली कराने का विरोध तेज-धरना, आज से पुलिस बल की मौजूदगी में होगी कार्रवाई

Sun, 27 Sep 2026 01:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 27 Sep 2026 01:49 AM IST
सार

लोगों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपने घर नहीं छोड़ेंगे और कार्रवाई के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करेंगे। वहीं, विभाग न्यायालय के आदेश के तहत जमीन से कब्जा हटाने की तैयारी कर रहा है।

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विस्तार

दक्षिणी दिल्ली के आली गांव में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की जमीन पर बने करीब 1800 मकान-दुकानों को खाली कराने की कार्रवाई के विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन तेज कर दिया है। लोगों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपने घर नहीं छोड़ेंगे और कार्रवाई के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करेंगे। वहीं, विभाग न्यायालय के आदेश के तहत जमीन से कब्जा हटाने की तैयारी कर रहा है।

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आली चौक से शिव मंदिर तक पुश्ता रोड के दोनों ओर करीब 1500 मकान-दुकानों और पीर मोहल्ले में करीब 300 मकानों पर खाली करने के नोटिस चस्पा किए गए हैं। नोटिस में निर्धारित समयसीमा के भीतर मकान-दुकान खाली करने का निर्देश दिया गया है। समयसीमा समाप्त होने के बाद पुलिस बल की मदद से कब्जा हटाने की कार्रवाई की तैयारी है। रविवार से कार्रवाई शुरू हो सकती है।
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कार्रवाई के खिलाफ धरने पर बैठे लोग
नोटिस चस्पा होने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे घर खाली करने का आदेश स्वीकार नहीं करेंगे और एक भी मकान नहीं टूटने देंगे। लोगों ने कानूनी लड़ाई के साथ सड़क पर भी विरोध जारी रखने की बात कही है। उनका दावा है कि वे आजादी के बाद से यहां रह रहे हैं और उनके पास पहचान पत्र, बिजली-पानी के बिल समेत अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। लोगों ने पुनर्वास को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
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24 साल से चल रहा जमीन का विवाद
आली गांव में करीब 8.48 एकड़ जमीन पर कब्जे को लेकर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और स्थानीय लोगों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड और रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2002 में जमीन से संबंधित फैसला सिंचाई विभाग के पक्ष में आया था। वर्ष 2004 में जमीन के कुछ हिस्सों से कब्जा भी हटाया गया, लेकिन आबादी वाले हिस्से में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। पिछले वर्ष साकेत कोर्ट से भी विभाग के पक्ष में फैसला आने के बाद अब जमीन खाली कराने की कार्रवाई तेज हो गई है।

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