ग्राउंड रिपोर्ट: वीआईपी इलाका, दूतावास और पुलिस का पहरा; फिर भी शाम होते ही महिलाओं को सताता है डर
कालकाजी पार्क में हुई दुष्कर्म की घटना के बाद जब इन कॉलेजों के आसपास अमर उजाला ने सुरक्षा का जायजा लिया तो इस इलाके से रोजाना गुजरने वाली महिलाओं ने बताया कि कॉलेज के आसपास रास्तों में डर बना रहता है। वहीं, कुछ हिस्सों में पर्याप्त रोशनी भी नहीं थी।
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चाणक्यपुरी साउथ कैंपस क्षेत्र के पास स्थित है। यह दिल्ली का वह इलाका है, जहां कई देशों का दूतावास हैं, वीआईपी आवाजाही है और सुरक्षा के लिए पुलिस की मौजूदगी हमेशा नजर आती है। हालांकि शाम ढलते ही इलाके की कुछ सड़कों और रास्तों पर कॉलेज से निकलने वाली छात्राओं और कामकाजी महिलाओं काे डर का एहसास होने लगता है। इस मुख्य सड़क पर शाम के वक्त तक चलने वाली दो महिला कॉलेज, मैत्री और जीसस एंड मैरी कॉलेज है। इसके आसपास दिन में सामान्य दिखने वाला माहौल शाम होते-होते कई जगह अंधेरे और सुनसान रास्तों में बदल जाता है।
कालकाजी पार्क में हुई दुष्कर्म की घटना के बाद जब इन कॉलेजों के आसपास अमर उजाला ने सुरक्षा का जायजा लिया तो इस इलाके से रोजाना गुजरने वाली महिलाओं ने बताया कि कॉलेज के आसपास रास्तों में डर बना रहता है। वहीं, कुछ हिस्सों में पर्याप्त रोशनी भी नहीं थी।
इलाके में पड़ताल के दौरान मुख्य मार्गों पर पुलिस की मौजूदगी दिखाई दी, लेकिन पीछे की ओर जाने वाले कुछ रास्तों पर रोशनी कम मिली। मैत्री कॉलेज और जीसस एंड मैरी कॉलेज के आसपास के इलाकों में असुरक्षा का एक दूसरा पहलू भी सामने आया।
कॉलेज की दीवार से सटी बनी हरी पट्टी जिसमें पेड़-पौधों की हरियाली के साथ-साथ घना अंधेरा भी नजर आता है। वहीं, पास में ही कोरियाई दूतावास के ठीक पीछे संजय कैंप झुग्गी क्षेत्र है। इसी के पास दो पार्क भी हैं, जिसमें घना अंधेरा छाया हुआ था। एक महिला ने बताया कि पार्क में कुछ लोग अक्सर नशा करते हुए दिखाई देते हैं। उसी रास्ते से गुजरने वाली मेनका के मुताबिक, ऐसे लोगों की मौजूदगी और शाम के समय सुनसान पड़ते रास्ते उन्हें असहज करते हैं।
दो दिन से पीछा कर रहे दो युवक, चेहरा ढका रहता है
जीसस एंड मैरी कॉलेज मार्ग के पास मिली तीन कामकाजी महिलाओं में से एक कविता ने बताया कि पिछले दो दिनों से दो युवक उसका पीछा कर रहे हैं। कविता के मुताबिक, दोनों में से एक युवक चेहरा ढककर रहता है। उसने बताया कि रास्ते के साथ-साथ मेट्रो में भी युवक उसके सामने आया था। कविता के मुताबिक, युवक ने उससे कहा, आज तुम जल्दी आ गई...। इस बात से उसे और डर लगा कि उसका पीछा करने वाले युवक उसकी दिनचर्या पर नजर रख रहे हैं। उसके साथ मौजूद दो अन्य महिलाओं ने भी शाम के समय इस इलाके से अकेले निकलने को लेकर डर की बात कही। उनका कहना था कि दिल्ली में अंधेरे में निकलते समय आसपास के लोगों और रास्ते को लेकर सतर्क रहना पड़ता है।
गेट के बाद सुरक्षा पर सवाल
छात्राओं की चिंता सिर्फ कॉलेज परिसर तक सीमित नहीं है। असली सवाल कॉलेज के गेट से शुरू होकर बस स्टॉप, मेट्रो स्टेशन, पार्किंग या घर की ओर जाने वाले रास्ते तक पहुंचता है। जिस इलाके को राजधानी के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है, वहां भी अगर कुछ हिस्सों में रोशनी कम है और महिलाओं का पीछा किए जाने का डर है तो सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी तस्वीर पर सवाल उठना स्वाभाविक हो जाता है।