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पड़ताल: आस्था कुंज पार्क में नशेड़ियो का अड्डा, 30 फीसदी हिस्सा अंधेरे में; वारदात के बाद भी नहीं बदले हालात

Sun, 27 Sep 2026 02:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 27 Sep 2026 02:11 AM IST
सार

घटना के पांच दिन बाद भी हालत जस के तस हैं। इस पार्क में 10 से ज्यादा खंडहर कमरे हैं। वहीं पार्क का 30 फीसदी हिस्सा अंधेरे में डूबा रहता है।

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Park Inspection: Aastha Kunj a haunt for drug addicts, 30% of the area in darkness
प्रतीक चित्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कालकाजी, अमर काॅलोनी, ईस्ट ऑफ कैलाश आदि कॉलोनियों को जोड़ने वाला आस्था कुंज पार्क सामूहिक दुष्कर्म के बाद चर्चा में है। घटना के पांच दिन बाद भी हालत जस के तस हैं। इस पार्क में 10 से ज्यादा खंडहर कमरे हैं। वहीं पार्क का 30 फीसदी हिस्सा अंधेरे में डूबा रहता है।

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आस्था कुंज में शनिवार सुबह न तो गार्ड रूम में कोई गार्ड मिला न मुख्य गेट पर सुरक्षा इंतजाम थे। 142 एकड़ में फैले आस्था कुंज पार्क के अंदर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था नहीं है। यहां 25 से ज्यादा एंट्री-एग्जिट पॉइंट हैं। एक शिफ्ट में महज नौ गार्ड तैनात हैं, जो खंडहर वाली जगह जाते ही नहीं। पुलिस की ओर से दिन और रात में नियमित गश्त की जा रही है, लेकिन यह नाकाफी है।
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पार्क में 10 खंडहर कमरे
स्थानीय लोगों के मुताबिक खंडहर पड़े कमरों में लोग नशा करते हैं। ऐसे में आम लोगों का सवाल है कि वारदात के बाद भी इन कमरों को अब तक सील क्यों नहीं किया गया। लोगों के अनुसार, दुष्कर्म के बाद भी अगर नशे के लिए इस्तेमाल हो रहे खाली कमरे खुले पड़े हैं, तो सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
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सीसीटीवी नहीं, कैमरे की नजर से बाहर पार्क के कई इलाके
आस्था कुंज पार्क में मुख्य द्वार के आसपास सीसीटीवी कैमरे की कोई व्यवस्था नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पार्क के कई इलाके सीसीटीवी की नजर में नहीं है। 142 एकड़ में फैले पार्क में कैमरों का मजबूत नेटवर्क होना जरूरी है। इससे न केवल प्रवेश और निकास पर नजर रखी जा सकती है, बल्कि पार्क के अंदर संदिग्ध गतिविधियों की भी निगरानी की जा सकती है।

हर रोज आने लगीं छेड़छाड़ की 3 से 4 पीसीआर कॉल
आस्था कुंज पार्क सामूहिक दुष्कर्म के बाद दिल्ली पुलिस के पुलिस कंट्रोल रूम (पीसीआर) को अधिक कॉल मिल रही हैं। एक जिले में प्रतिदिन 3 से 4 छेड़छाड़ की पीसीआर कॉल आती हैं। दिल्ली के सभी 15 जिलों में यह संख्या बढ़कर करीब 40 प्रतिदिन हो गई है।

दिल्ली पुलिस के एक विशेष आयुक्त ने इसकी पुष्टि की है। हालांकि, पुलिस टीम के मौके पर पहुंचने पर अक्सर कुछ नहीं मिलता। इनमें से ज्यादातर कॉल फर्जी होती हैं या घटनास्थल पर कोई मौजूद नहीं होता। पुलिस अधिकारी इन कॉल का विश्लेषण कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस और उपराज्यपाल पार्कों व अन्य स्थानों पर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। महिला टीमें स्कूलों और कॉलेजों में छात्राओं को जागरूक कर रही हैं। वे उन्हें पुलिस को सूचना देने और डरने की जरूरत न होने के बारे में बताती हैं। दिल्ली पुलिस ने 500 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम किए हैं। इसे पुलिस की ओर से जागरूकता का असर कहा जा सकता है या फिर सोशल मीडिया का असर।


महिलाओं के खिलाफ अपराध में परिचितों की भूमिका
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में परिचित ही आरोपी होते हैं। दुष्कर्म के लगभग 96 फीसदी से 96.8 फीसदी मामलों में आरोपी पीड़िता के जानकार होते हैं। इनमें पड़ोसी, दोस्त, रिश्तेदार या परिवार के सदस्य शामिल होते हैं। केवल 2 से 3 फीसदी मामलों में ही हमलावर अपरिचित होते हैं।

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