'केजरीवाल सरकार कहने में गलत कुछ नहीं'
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आम आदमी पार्टी (आप) सरकार यदि स्वयं को केजरीवाल सरकार के नाम से संबोधित करती है तो इसमें गलत क्या है। विज्ञापन में केजरीवाल सरकार लिखने या दिखाने में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन कैसे हो गया है।
हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता अजय माकन की विज्ञापन नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर संक्षिप्त सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने कहा कि हर सरकार स्वयं को अपने नेता के नाम से प्रचारित करती है।
यह हमने आम तौर पर सभी सरकारों के मामले में देखा है। अदालत ने कहा इसमें कोई दिक्कत नहीं है। अदालत ने इस मामले में अब सुनवाई 1 सितंबर तय की है।
अदालत ने फिलहाल दिल्ली सरकार को याची अजय माकन के उस तर्क भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है जिसमें माकन ने आरोप लगाया है कि सरकार अभी भी टीवी, रेडियो व समाचार पत्रों में विज्ञापन दे रही है। विज्ञापनों में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को महिमामंडित किया जा रहा है।
अजय माकन ने दी थी याचिका
माकन ने कहा है कि गत 29 जुलाई को मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने अदालत में कहा था कि उनके विज्ञापन सुप्रीम कोर्ट के किसी निर्देश का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं, लेकिन यह सरासर गलत है।
सरकार द्वारा जारी विज्ञापनों में मुख्यमंत्री की तस्वीर है। इनमें विपक्षी पार्टियों की अलोचना की जा रही है और मुख्यमंत्री का गुणगान किया जा रहा है जो सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष 29 जुलाई को सरकार द्वारा दिए गए विज्ञापनों की तस्वीर भी पेश की। इससे पूर्व 3 अगस्त को सरकार ने अदालत में बताया था कि पिछले तीन माह में उन्होंने विज्ञापन पर 22 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।