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बिना गंभीर आरोप तिहाड़ में सड़ रही महिला कैदी

Mon, 24 Aug 2015 11:57 AM IST
Updated Mon, 24 Aug 2015 11:57 AM IST
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not serious allegation on female prisonersbut still languishing in Tihar

हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल में गंभीर अपराध न होने के बावजूद बंद 152 विचाराधीन महिला कैदियों को रिहा न करने व उनकी दुर्दशा पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने डीएसएलएसए को इन सभी की रिहाई जल्द से जल्द सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

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मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने कहा कि उक्त 152 महिलाएं करीब छह माह से भी ज्यादा अवधि से जेल में हैं और उन पर कोई भी गंभीर आरोप नहीं है।
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अदालत ने कहा कि बिना किसी सुनवाई के इस प्रकार से महिलाएं जेल में सड़ रही हैं। खंडपीठ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय व यह अदालत विभिन्न अवसरों पर विचाराधीन कैदियों को रिहा करने के संबंध में दिशा निर्देश जारी कर चुकी है।

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आधी से भी ज्यादा सजा काट चुकी है

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खंडपीठ ने कहा कि हमें यह आदेश दुख के साथ पास करना पड़ रहा है कि डीएसएलएसए के पैनल पर नियुक्त वकील व विभिन्न अन्य कमेटियां तिहाड़ जेल का निरीक्षण करती हैं और इसके बावजूद महिलाओं की ऐसी हालत है। अदालत ने कहा कि जिन पर गंभीर आरोप नहीं उन्हें इस प्रकार जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।

खंडपीठ ने यह निर्देश तिहाड़ जेल नंबर 6 के अधीक्षक द्वारा दायर रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद दिया है। रिपोर्ट में कहा गया था कि जेल में बंद 622 में से 47 को तुरंत रिहा करने की जरूरत है क्योंकि वे अपने अपराध में होने वाली संभावित सजा में से आधी से भी ज्यादा सजा काट चुकी है जबकि 105 अन्य पर भी गंभीर आरोप नहीं है।

इससे पूर्व जेल प्रशासन ने पेश रिपोर्ट में कहा कि तिहाड़ जेल नंबर छह में वर्तमान में 622 महिला कैदी है जिनमें से 463 विचाराधीन व 159 सजायाफ्ता है। इनमें से 155 पर हत्या, अपहरण व रेप के मामलों में मुकदमा चल है रहा है और 47 अपनी संभावित सजा में से आधी पूरी कर चुकी है।

43 प्रतिशत महिलाएं निचले तबके से हैं

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वहीं दिल्ली कानूनी सहायता बोर्ड ने कहा कि जेल में बंद महिलाओं को सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के तहत कानूनी सहायता व अन्य प्रकार की सहायता प्रदान की जा रही है।


फिलहाल जेल में बंद 43 प्रतिशत महिलाएं निचले तबके से हैं। जेल प्रशासन ने पेश रिपोर्ट में बताया कि जेल संख्या छह में 400 कैदियों को रखने की क्षमता है लेकिन वहां 622 महिला कैदियों को रखा गया है।

खंडपीठ सर्वोच्च न्यायालय के जज कुरियन जोसफ द्वारा मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र पर संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है। 622 महिला कैदियों ने उन्हें पत्र लिखकर अपनी दयनीय हालत से अवगत करवाया था।

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