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Medha Patkar: मेधा पाटकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी, मानहानि मामले में सजा पर सवाल
Wed, 23 Apr 2025 10:29 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: श्याम जी.
Updated Wed, 23 Apr 2025 10:29 PM IST
सार
साकेत कोर्ट ने मेधा पाटकर के खिलाफ मानहानि मामले में गैर-जमानती वारंट जारी किया, क्योंकि उन्होंने जुर्माना और प्रोबेशन बॉन्ड जमा नहीं किया। अदालत ने चेतावनी दी कि अनुपालन न करने पर सजा पर पुनर्विचार हो सकता है।
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मेधा पाटकर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
साकेत कोर्ट ने बुधवार को नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। अदालत ने उन्हें उपराज्यपाल वीके सक्सेना की तरफ से दायर मानहानि के मामले में प्रोबेशन बॉन्ड जमा करने और एक लाख रुपये का जुर्माना जमा करने के लिए कहा था। सक्सेना ने यह मामला 23 साल पहले दायर किया था, जब वह गुजरात में एक एनजीओ के प्रमुख थे।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने पाटकर को मानहानि मामले में दोषी ठहराया था। साथ ही आठ अप्रैल को उन्हें अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर रिहा कर दिया था, जबकि उन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की शर्त रखी थी। बुधवार को मामला पाटकर की उपस्थिति, परिवीक्षा बॉन्ड प्रस्तुत करने और जुर्माना राशि जमा करने के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
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सुनवाई के दौरान सक्सेना के वकील गजिंदर कुमार ने कहा कि पाटकर न तो अदालत में पेश हुईं और न ही उन्होंने अदालत के निर्देशों का पालन किया। ऐसे में अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख तीन मई के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त के माध्यम से पाटकर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। अदालत ने कहा कि अदालत के पास पाटकर को बलपूर्वक पेश करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। न्यायाधीश ने कहा कि अगर वह अदालत का आदेश नहीं मानती हैं, तो कोर्ट को उदार सजा पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा और सजा पर आदेश बदलना होगा।
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