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यमुना प्राधिकरण भूमि घोटालाः सीबीआई की गुप्त जांच में रडार पर नामजद और मददगार

Mon, 06 Jan 2020 03:58 AM IST
संजीव कुमार झा जेपी शर्मा,अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
जेपी शर्मा,अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 06 Jan 2020 03:58 AM IST
सार

  • शासन की मंजूरी मिलने के बाद कभी भी सीबीआई शुरू कर सकती है 1500 करोड़ के घोटाले की गुप्त जांच  
  • यमुना प्राधिकरण के 126 करोड़ के भूमि घोटाले में सीबीआई की सीक्रेट जांच में सामने आया था रिश्वत कांड

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Nominee and helper on radar in CBI secret investigation in Yamuna Authority land scam
सांकेतिक चित्र - फोटो : Social Media

विस्तार

सीबीआई ने यमुना प्राधिकरण के 126 करोड़ के भूमि घोटाले के केस की सुपुर्दगी लेने से पूर्व गुप्त जांच की थी और इसमें रिश्वतकांड सामने आया था। अब प्रदेश के सबसे बड़े फर्जीवाड़ा माने जा रहे बाइक बोट धोखाधड़ी के मामले में शासन की मुहर लगने के बाद सीबीआई केस की सुपुर्दगी लेने से पहले गुप्त जांच करेगी।

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गुप्त जांच में सीबीआई की रडार पर नामजद मुख्य आरोपी के अलावा ठगी में मदद करने वाले भी शामिल होंगे। अहम है कि बाइक बोट फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपी संजय भाटी के बसपा का पूर्व लोकसभा प्रभारी होने के कारण लोग नेताओं और अफसर पर भी आरोपियों को शह देने का आरोप लगाते रहे हैं।
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एसएसपी वैभव कृष्ण ने यमुना प्राधिकरण के 126 करोड़ के भूमि घोटाले और 1500 करोड़ से अधिक के बाइक बोट फर्जीवाड़े की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश शासन से की थी। दोनों ही मामले में सीबीआई जांच के लिए एसएसपी ने रिमाइंडर शासन को भेजे थे।

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ठीक एक साल पहले सीबीआई ने यमुना प्राधिकरण घोटाले की जांच गुप्त रूप से की थी। इसी गुप्त जांच के दौरान सीबीआई ने अपने ही निरीक्षक वीएस राठौर को गिरफ्तार किया और एएसआई सुनील दत्त व यूपी पुलिस के एक अज्ञात अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप था कि घोटाले के आरोपी पूर्व तहसीलदार रणवीर सिंह से आरोपियों को जांच में मदद के नाम पर रिश्वत ली गई है।

यमुना प्राधिकरण के भूमि घोटाले की गुप्त जांच के बाद अभी हाल ही में सीबीआई ने केस की सुपुर्दगी लेकर जांच शुरू की है। अब, बाइक बोट फर्जीवाड़े की सीबीआई जांच को भी प्रदेश सरकार ने मंजूरी दे दी है।

केंद्र सरकार की मंजूरी मिलते ही इस मामले की सीबीआई गुप्त जांच शुरू कर देगी। बताया जा रहा है कि प्रदेश और केंद्र दोनों में एक ही पार्टी की सरकार होने के कारण इस मामले के अटकने की उम्मीद नहीं के बराबर है। कभी भी केंद्र सरकार सीबीआई को जांच के लिए निर्देशित कर सकती है। सीबीआई की गुप्त जांच की आहट से ही केस से जुड़े आरोपियों के अलावा उनके मददगार में भी डर का माहौल है।

जांच करने वालों की भी होती है निगरानी

सीबीआई के आला अधिकारी गुप्त जांच करने वाले अधिकारियों की भी निगरानी करते हैं। इसका पता यमुना प्राधिकरण के 128 करोड़ के घोटाले की गुप्त जांच के दौरान चला था। जांच अधिकारियों की निगरानी के चलते ही रिश्वतकांड का खुलासा हुआ था।

इसलिए गुप्त जांच करते हैं सीबीआई के अधिकारी

बताया जा रहा है कि सीबीआई के अधिकारी केस की सुपुर्दगी लेने से पूर्व गुप्त जांच करते हैं। सीबीआई के अधिकारी यह जांच केस की स्थिति के अलावा उसके स्तर का पता लगाने के लिए करते हैं। निचले स्तर के अधिकारी जांच के बाद सीबीआई के आला अधिकारियों को पूरी रिपोर्ट देते हैं। इसके बाद आला अधिकारी यह फैसला लेते हैं कि केस उनके स्तर का है या नहीं।

गुड्डी के केस की सीबीआई ने नहीं ली सुपुर्दगी

दादरी की गुड्डी की मई 2018 में हुई मौत के बाद मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर भूत-प्रेत का साया होने का आरोप लगा हत्या करने का केस दर्ज कराया था। पुलिस के मामले में कार्रवाई नहीं करने पर पीड़ित पक्ष हाईकोर्ट गया था और हाईकोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।

लेकिन इस केस की सीबीआई ने अब तक सुपुर्दगी लेकर जांच शुरू नहीं की है। बताया जा रहा है कि गुप्त जांच के बाद सीबीआई ने इस केस को अपने स्तर का नहीं होने का हवाला देकर जांच शुरू नहीं की। इसके चलते पीड़ित पक्ष सुप्रीम कोर्ट चला गया है।

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