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वीजा नियम उल्लंघनों के कारण यूट्यूब व्लॉगर कार्ल रॉक को काली सूची में डाला गया: केंद्र
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को हाईकोर्ट को बताया कि यूट्यूब व्लॉगर कार्ल रॉक को वीजा नियमों के उल्लंघन के कारण काली सूची में डाला गया था। इसके अलावा अपनी पत्नी के भारतीय होने के आधार पर मिले वीजा पर यहां कारोबार कर रहे थे। कार्ल रॉक की पत्नी ने पति को काली सूची में डालने के कदम को मनमाना व अतार्किक बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के समक्ष केंद्र सरकार के वकील अनुराग अहलूवालिया ने कहा कार्ल रॉक को वीजा नियमों के उल्लंघन के लिए काली सूची में डाला गया था। इस याचिका पर वह स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करना चाहते हैं। अदालत हांसी हिसार निवासी मनीषा मलिक की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें उसने उसके पति कार्ल रॉक को भारत में प्रवेश पर प्रतिबंध को मनमाना व तार्किक बताया है।
अदालत ने कहा कि बेशक वीजा देना केंद्र सरकार का अधिकार क्षेत्र है लेकिन ये तार्किक होना चाहिए और इसकी जानकारी आवेदक को भी दी जानी चाहिए। अदालत ने केंद्र सरकार अपने कदम को न्यायोचित ठहरा सकती है लेकिन इसकी जानकारी याची के पति को दी जानी चाहिए। ये केंद्र का अधिकार क्षेत्र है लेकिन ये उचित होना चाहिए।
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अदालत ने ये बात केंद्र सरकार को याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कही। अदालत ने केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने कहा कि अगर कोई गोपनीय तथ्य हैं तो इसकी जानकारी केंद्र सरकार अपनी रिपोर्ट सीलबंद कवर में पेश कर सकती है।
याची की ओर से अधिवक्ता फुजैल अहमद अयूबी ने कोर्ट को बताया कि वीजा न देने का कोई कारण सरकार ने उनके मुवक्किल को नहीं बताया और जब वह अक्तूबर 2020 में भारत से गया तो उसके वीजा पर कैंसिल की मुहर लगा दी गई। उनके मुवक्किल ने वीजा को बढ़ाने का आग्रह किया लेकिन इसके बजाय उसे एक्सिट परमिट जारी कर दिया गया।
उन्होंने आगे कहा कि उनके मुवक्किल ने भारत में अपने प्रवास के दौरान कोरोना से रिकवर होने के बाद दो बार प्लाज्मा दान किया था। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है।
पेश याचिका में मनीषा मलिक ने कहा है कि उनके पति कार्ल एडवर्ड राइस ने भारत की सुंदरता को कैमरे में कैद किया और देश में पर्यटन के प्रोत्साहन में अपना योगदान दिया। याची ने कहा कि 2019 में उनकी शादी होने के बाद वे दिल्ली में रह रहे थे लेकिन अक्तूबर में भारत से न्यूजीलैंड जाने के बाद राइस को वापस नहीं आने दिया गया है। - एजेंसी
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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के समक्ष केंद्र सरकार के वकील अनुराग अहलूवालिया ने कहा कार्ल रॉक को वीजा नियमों के उल्लंघन के लिए काली सूची में डाला गया था। इस याचिका पर वह स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करना चाहते हैं। अदालत हांसी हिसार निवासी मनीषा मलिक की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें उसने उसके पति कार्ल रॉक को भारत में प्रवेश पर प्रतिबंध को मनमाना व तार्किक बताया है।
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अदालत ने कहा कि बेशक वीजा देना केंद्र सरकार का अधिकार क्षेत्र है लेकिन ये तार्किक होना चाहिए और इसकी जानकारी आवेदक को भी दी जानी चाहिए। अदालत ने केंद्र सरकार अपने कदम को न्यायोचित ठहरा सकती है लेकिन इसकी जानकारी याची के पति को दी जानी चाहिए। ये केंद्र का अधिकार क्षेत्र है लेकिन ये उचित होना चाहिए।
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अदालत ने ये बात केंद्र सरकार को याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कही। अदालत ने केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने कहा कि अगर कोई गोपनीय तथ्य हैं तो इसकी जानकारी केंद्र सरकार अपनी रिपोर्ट सीलबंद कवर में पेश कर सकती है।
याची की ओर से अधिवक्ता फुजैल अहमद अयूबी ने कोर्ट को बताया कि वीजा न देने का कोई कारण सरकार ने उनके मुवक्किल को नहीं बताया और जब वह अक्तूबर 2020 में भारत से गया तो उसके वीजा पर कैंसिल की मुहर लगा दी गई। उनके मुवक्किल ने वीजा को बढ़ाने का आग्रह किया लेकिन इसके बजाय उसे एक्सिट परमिट जारी कर दिया गया।
उन्होंने आगे कहा कि उनके मुवक्किल ने भारत में अपने प्रवास के दौरान कोरोना से रिकवर होने के बाद दो बार प्लाज्मा दान किया था। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है।
पेश याचिका में मनीषा मलिक ने कहा है कि उनके पति कार्ल एडवर्ड राइस ने भारत की सुंदरता को कैमरे में कैद किया और देश में पर्यटन के प्रोत्साहन में अपना योगदान दिया। याची ने कहा कि 2019 में उनकी शादी होने के बाद वे दिल्ली में रह रहे थे लेकिन अक्तूबर में भारत से न्यूजीलैंड जाने के बाद राइस को वापस नहीं आने दिया गया है। - एजेंसी