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एयरपोर्ट के 30 किमी दायरे में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देगा यीडा

Thu, 03 Mar 2022 02:11 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 02:11 AM IST
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yida to promote rural tourism within 30 km radius of the airport
ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 30 किमी के दायरे के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और ग्रामीण विरासतों का संरक्षण होगा। इनको संजोने की जिम्मेदारी यमुना प्राधिकरण (यीडा) की होगी। जल्द इस मामले में एक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार किया जाएगा। यमुना प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। यहां से पास कराने के बाद इस पर काम शुरू हो जाएगा। क्षेत्र में 30 वर्ष के लिए विरासत संरक्षित रखने की योजना बनाई गई है।
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अधिकारियों का कहना है कि इसे इस तरह से विकसित किया जाएगा कि लोग इसे देखने को उत्सुक हो उठें। एयरपोर्ट के निर्माण के साथ-साथ इसे भी विकसित करने का काम चलता रहेगा। पूरा क्षेत्र ग्रामीण पर्यटन के लिए जाना जाएगा। यहां लोग घूमने के लिए आ सकेंगे और ग्रामीण परिवेश की जानकारी ले सकेंगे। इससे क्षेत्र के लोगों को रोजगार भी मिलेगा। यमुना प्राधिकरण कार्यालय में दो दिन पहले इंडियन ट्रस्ट फॉर रूरल हेरिटेज ने एक प्रजेंटेशन दिया है। प्राधिकरण के सीईओ अरुणवीर सिंह ने बताया कि एजेंसी की ओर से एयरपोर्ट के 30 किमी के दायरे में आने वाले सभी धार्मिक और सांस्कृतिक इमारतों के संरक्षण के लिए योजना पेश की गई है। इसके माध्यम से स्मारकों का जिर्णोद्धार किया जा सकेगा। यहीं नहीं दायरे में आने वाले वेटलैंड, तालाब, पेड़-पौधे, मंदिर, जल, गीत, संगीत आदि का भी संरक्षण होगा। इसके माध्यम से पूरे क्षेत्र में दोबारा से लोक कलाओं की समृद्धि की लहर उठेगी।
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चार तरीके से होगा विकसित
प्रजेंटेशन में इसे चार तरीके से विकसित करने की योजना है। पहले तरीके में क्षेत्र में बने बनाए ऐसे स्मारकों को विकसित किया जाएगा, जिनकी क्षेत्र में पहले से ही पहचान है। इसमें क्षेत्र का प्रसिद्ध मंदिर या स्मारक आदि होगा। इसके बाद अगले चरण में पेड़-पौधे और जल के स्रोत का संरक्षण होगा। तीसरे तरीके में क्षेत्र के गीत- संगीत और लोक कलाओं को और उभारा जाएगा। चौथे तरीके में खाने-पीने के स्थानीय खाद्य उत्पादों को और बढ़ावा दिया जाएगा।
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चार चरण में अलग-अलग क्षेत्र होगा विकसित
पहले चरण में जेवर एयरपोर्ट से 30 किलोमीटर के दायरे में स्थानीय ऐतिहासिक, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का काम होगा। इसके बाद एक्सप्रेसवे के दोनो ओर, वृंदावन-मथुरा और फिर आगरा में इस तरह के संरक्षण का काम होगा।
क्षेत्र के बाहर के अनुभवों को भी किया जाएगा शामिल
प्राधिकरण के सीईओ अरुणवीर सिंह ने बताया कि डीपीआर में क्षेत्र के बाहर के अनुभवों को भी शामिल किया जाएगा। इसमें चोखी ढाणी समेत अन्य दर्शनीय स्थलों के विशेषताओं के अध्ययन के बाद इनको यहां के संरक्षण में स्थान दिलाने का काम होगा। इसके लिए वैसे लोगों की मदद ली जाएगी, जिन्हें इसकी बखूबी जानकारी है।

जून तक अप्रूव कराने की योजना
अधिकारियों का कहना है कि इस योजना का अप्रूवल जून तक कराने की योजना है। इसके लिए सबसे पहले डीपीआर पर काम किया जाएगा। इसके बाद इसे बोर्ड में रखा जाएगा। फिर बोर्ड से पास कराने के बाद शासन से अनुमति लेकर इसका काम जून तक शुरू कराने की योजना है।
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