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Noida News: एसिड हमले में गिरफ्तार महिला की जमानत याचिका खारिज
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-आरोपी ने एक व्यक्ति की पत्नी के गले में एसिड जैसा पदार्थ डालने में मदद की थी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रोहिणी कोर्ट ने 2018 में अपनी पत्नी के गले में एसिड जैसा संक्षारक पदार्थ डालने में एक व्यक्ति की मदद करने की आरोपी महिला की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार ने कहा कि आरोपी पीड़िता की दूर की रिश्तेदार है। वह एक घोषित अपराधी होने की अपनी स्थिति को जानते हुए भी 2018 से जानबूझकर अपनी गिरफ्तारी से बचती रही।
अदालत शाहबाद डेयरी पुलिस स्टेशन द्वारा आरोपी सुमन के खिलाफ आईपीसी की धारा 326 ए (स्वेच्छा से तेजाब या संक्षारक पदार्थों से गंभीर चोट पहुंचाना) और 328 (जहर आदि से चोट पहुंचाना) के तहत दर्ज मामले की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता के बयान पर एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें आरोपी सुमन के खिलाफ आरोप लगाया है कि उसने अपनी सास के साथ मिलकर उसे पकड़ा था, जबकि उसके देवर ने उसके बाल पकड़े थे और पति ने जबरन उसके मुंह में तेजाब जैसा पदार्थ डाल दिया था। न्यायाधीश ने कहा कि सुमन को इस साल 24 मई को वर्तमान मामले में गिरफ्तार किया गया था, ऐसे में मामला दर्ज होने के लगभग आठ साल बाद यह दर्शाता है कि वह 2018 से जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रही थी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रोहिणी कोर्ट ने 2018 में अपनी पत्नी के गले में एसिड जैसा संक्षारक पदार्थ डालने में एक व्यक्ति की मदद करने की आरोपी महिला की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार ने कहा कि आरोपी पीड़िता की दूर की रिश्तेदार है। वह एक घोषित अपराधी होने की अपनी स्थिति को जानते हुए भी 2018 से जानबूझकर अपनी गिरफ्तारी से बचती रही।
अदालत शाहबाद डेयरी पुलिस स्टेशन द्वारा आरोपी सुमन के खिलाफ आईपीसी की धारा 326 ए (स्वेच्छा से तेजाब या संक्षारक पदार्थों से गंभीर चोट पहुंचाना) और 328 (जहर आदि से चोट पहुंचाना) के तहत दर्ज मामले की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता के बयान पर एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें आरोपी सुमन के खिलाफ आरोप लगाया है कि उसने अपनी सास के साथ मिलकर उसे पकड़ा था, जबकि उसके देवर ने उसके बाल पकड़े थे और पति ने जबरन उसके मुंह में तेजाब जैसा पदार्थ डाल दिया था। न्यायाधीश ने कहा कि सुमन को इस साल 24 मई को वर्तमान मामले में गिरफ्तार किया गया था, ऐसे में मामला दर्ज होने के लगभग आठ साल बाद यह दर्शाता है कि वह 2018 से जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रही थी।
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