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पापड़ा में पेयजल संकट
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पापड़ा में पेयजल संकट
पिनगवां। सरकार द्वारा पीने के पानी पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी पिनगवां खंड के अधिकतर गांवों में पीने का पानी भी नसीब नहीं हैं। खंड के गांव पापड़ा की महिलाएं एक किलीमीटर दूर से मटके में पीने का पानी भर कर लाने के लिए मजबूर हैं।
पिनगवां कस्बे से मात्र दो किलोमीटर दूर लगभग 5 हजार की आबादी वाला गांव पापड़ा अरावली की पहाड़ी पर बसा है। काफी समय से गांव के लोग पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। जमीनी पानी खारा होने और गांव के वाटर चैंबर में पर्याप्त पानी नहीं आने की वजह से महिलाओं को करीब एक किलोमीटर दूर गांव मामलीका के जंगल में बने कुएं से पानी लाना पड़ रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि जो संपन्न वर्ग से हैं उन्होंने अपने घरों में वाटर टैंक बनवा रखा है उनमें टैंकरों से पानी भरवा लेते हैं लेकिन यह सभी से संभव नहीं। टैंकरों पर लोगों को हजारों रुपये महिने का खर्च आता है। गांव में रेनीवेल का चेंबर है लेकिन आठ दिन में एक बार चेंबर में पानी आता है।
समाज सेवी बल्लू का कहना है कि हमारे गांव को रेनीवेल से जोड़ा हुआ है बीच में लोगों ने लाइन में अवैध कनेक्शन किये हुए हैं। गांव के वाटर चैंबर को रेनीवेल की मैन लाइन से जोड़ने की बजाए दूसरी पाइप लाइन से जोड़ा हुआ है, जिसकी वजह से पानी बहुत कम आता है।
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गांव के अली मोहमद का कहना है कि गांव में पानी की गंभीर समस्या है आज भी पूरा गांव कुएं के पानी पर निर्भर हैं।
आस मोहम्मद का कहना है कि इस भीषण गर्मी में पानी की समस्या सबसे बड़ी है अगर नसीरपुरी से गांव चेंबर का कनेक्शन हो जाये पानी समस्या किसी हद तक खत्म हो जाएगी।
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गांव के रैनीवैल का वाटर चेंबर बना रखा है, जिसमें पानी छोड़ा जाता है। लोगों को किन कारणों से पानी नहीं मिल रहा है वह इसकी जांच कराएंगे। अगर इसमें कर्मचारियों की लापरवाही पाई गई तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लोगों को हर हालत पीने का पानी मुहैया कराई जाएगी।
जनक राज, एसई पब्लिक हेल्थ पलवल रेंज
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पिनगवां। सरकार द्वारा पीने के पानी पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी पिनगवां खंड के अधिकतर गांवों में पीने का पानी भी नसीब नहीं हैं। खंड के गांव पापड़ा की महिलाएं एक किलीमीटर दूर से मटके में पीने का पानी भर कर लाने के लिए मजबूर हैं।
पिनगवां कस्बे से मात्र दो किलोमीटर दूर लगभग 5 हजार की आबादी वाला गांव पापड़ा अरावली की पहाड़ी पर बसा है। काफी समय से गांव के लोग पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। जमीनी पानी खारा होने और गांव के वाटर चैंबर में पर्याप्त पानी नहीं आने की वजह से महिलाओं को करीब एक किलोमीटर दूर गांव मामलीका के जंगल में बने कुएं से पानी लाना पड़ रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि जो संपन्न वर्ग से हैं उन्होंने अपने घरों में वाटर टैंक बनवा रखा है उनमें टैंकरों से पानी भरवा लेते हैं लेकिन यह सभी से संभव नहीं। टैंकरों पर लोगों को हजारों रुपये महिने का खर्च आता है। गांव में रेनीवेल का चेंबर है लेकिन आठ दिन में एक बार चेंबर में पानी आता है।
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समाज सेवी बल्लू का कहना है कि हमारे गांव को रेनीवेल से जोड़ा हुआ है बीच में लोगों ने लाइन में अवैध कनेक्शन किये हुए हैं। गांव के वाटर चैंबर को रेनीवेल की मैन लाइन से जोड़ने की बजाए दूसरी पाइप लाइन से जोड़ा हुआ है, जिसकी वजह से पानी बहुत कम आता है।
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गांव के अली मोहमद का कहना है कि गांव में पानी की गंभीर समस्या है आज भी पूरा गांव कुएं के पानी पर निर्भर हैं।
आस मोहम्मद का कहना है कि इस भीषण गर्मी में पानी की समस्या सबसे बड़ी है अगर नसीरपुरी से गांव चेंबर का कनेक्शन हो जाये पानी समस्या किसी हद तक खत्म हो जाएगी।
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गांव के रैनीवैल का वाटर चेंबर बना रखा है, जिसमें पानी छोड़ा जाता है। लोगों को किन कारणों से पानी नहीं मिल रहा है वह इसकी जांच कराएंगे। अगर इसमें कर्मचारियों की लापरवाही पाई गई तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लोगों को हर हालत पीने का पानी मुहैया कराई जाएगी।
जनक राज, एसई पब्लिक हेल्थ पलवल रेंज