{"_id":"68fe6bfea55686b41109a104","slug":"unnao-news-na-news-c-221-1-uno1004-139178-2025-10-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: जानकारी ही नहीं तो कैसे मिले शव वाहन की सुविधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: जानकारी ही नहीं तो कैसे मिले शव वाहन की सुविधा
विज्ञापन
फोटो-36-जिला अस्पताल में लगे सिटीजन चार्टर में कहीं नहीं दी गई शव वाहन की जानकारी। संवाद
उन्नाव। जिला अस्पताल में शव वाहन की सुविधा तो उपलब्ध है लेकिन यह कहां और कैसे मिलेगा, इसकी जानकारी देने वाला पोस्टर अस्पताल परिसर में कहीं भी नहीं लगा है। इस कारण लोग इस सरकारी सुविधा का फायदा नहीं उठा पाते हैं जबकि अन्य सरकारी सुविधाओं वाले पोस्टर, वॉल पेंटिग और बोर्ड अस्पताल में कई जगह लगे हैं।
जिला अस्पताल में दो और सीएमओ कार्यालय में एक शव वाहन है। शासन के निर्देश हैं कि अस्पताल में मृत्यु के बाद शव को सम्मानपूर्वक परिजनों के घर पहुंचाने में नि:शुल्क सेवा उपलब्ध कराई जाए। यह भी स्पष्ट निर्देश हैं कि जिला अस्पताल में शव वाहन की उपलब्धता की जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्शायी जाए। साथ ही हेल्पलाइन नंबर और वाहन चालक का संपर्क नंबर भी सूचना बोर्ड पर लिखा जाना चाहिए लेकिन इसमें भी घालमेल चल रहा है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी के बाहर लगी होर्डिंग, पोस्टर और वॉल पेटिंग के माध्यम कहीं पर भी शव वाहन की जानकारी नहीं लिखी गई है जबकि अन्य सरकारी सुविधाएं, मरीज और उनके परिजनों के अधिकार, उत्तरदायित्व आदि की जानकारी दी गई।
प्राइवेट वाहन से शव ले जाना मजबूरी
इमरजेंसी वार्ड में किसी मरीज की मृत्यु होने पर जब परिजन शव ले जाने की बात स्वास्थ्यकर्मियों से कहते तो वह ठीक से जवाब नहीं देते हैं। परिजनों के बार-बार कहने पर शव वाहन अन्य जगह व्यस्त होने की जानकारी दे देते हैं। वहीं पास में प्राइवेट वाहन चालक भी घूमते रहते हैं। वह परिजनों को घर तक छोड़ने की बात कहते हैं। इसके बाद परिजन मजबूरी में प्राइवेट वाहन से रुपये खर्च कर शव ले जाते हैं।
विज्ञापन
वर्जन....
प्रयास किया जाता है कि जिला अस्पताल में अगर किसी की मृत्यु होती है तो उसे शव वाहन से सम्मान सहित पहुंचाया जाए। इमरजेंसी में संबंधित डॉक्टर व जनरल वार्ड में इंचार्ज नर्स से संपर्क करने पर वह शव वाहन उपलब्ध कराते हैं। -डॉ.राजीव गुप्ता, सीएमएस जिला अस्पताल
विज्ञापन
जिला अस्पताल में दो और सीएमओ कार्यालय में एक शव वाहन है। शासन के निर्देश हैं कि अस्पताल में मृत्यु के बाद शव को सम्मानपूर्वक परिजनों के घर पहुंचाने में नि:शुल्क सेवा उपलब्ध कराई जाए। यह भी स्पष्ट निर्देश हैं कि जिला अस्पताल में शव वाहन की उपलब्धता की जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्शायी जाए। साथ ही हेल्पलाइन नंबर और वाहन चालक का संपर्क नंबर भी सूचना बोर्ड पर लिखा जाना चाहिए लेकिन इसमें भी घालमेल चल रहा है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी के बाहर लगी होर्डिंग, पोस्टर और वॉल पेटिंग के माध्यम कहीं पर भी शव वाहन की जानकारी नहीं लिखी गई है जबकि अन्य सरकारी सुविधाएं, मरीज और उनके परिजनों के अधिकार, उत्तरदायित्व आदि की जानकारी दी गई।
विज्ञापन
प्राइवेट वाहन से शव ले जाना मजबूरी
इमरजेंसी वार्ड में किसी मरीज की मृत्यु होने पर जब परिजन शव ले जाने की बात स्वास्थ्यकर्मियों से कहते तो वह ठीक से जवाब नहीं देते हैं। परिजनों के बार-बार कहने पर शव वाहन अन्य जगह व्यस्त होने की जानकारी दे देते हैं। वहीं पास में प्राइवेट वाहन चालक भी घूमते रहते हैं। वह परिजनों को घर तक छोड़ने की बात कहते हैं। इसके बाद परिजन मजबूरी में प्राइवेट वाहन से रुपये खर्च कर शव ले जाते हैं।
विज्ञापन
वर्जन....
प्रयास किया जाता है कि जिला अस्पताल में अगर किसी की मृत्यु होती है तो उसे शव वाहन से सम्मान सहित पहुंचाया जाए। इमरजेंसी में संबंधित डॉक्टर व जनरल वार्ड में इंचार्ज नर्स से संपर्क करने पर वह शव वाहन उपलब्ध कराते हैं। -डॉ.राजीव गुप्ता, सीएमएस जिला अस्पताल

फोटो-36-जिला अस्पताल में लगे सिटीजन चार्टर में कहीं नहीं दी गई शव वाहन की जानकारी। संवाद