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यूईआर-2 टोल : 26 अक्तूबर तक समाधान करने की चेतावनी

Sat, 27 Sep 2025 05:36 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 27 Sep 2025 05:36 PM IST
सार

नई दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों में यूईआर-2 टोल प्लाजा को लेकर पालम 360 खाप के नेतृत्व में बड़ा विरोध जारी है। ग्रामीणों ने 26 अक्तूबर तक समाधान न होने पर महापंचायत और आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दी है।

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UER-2 toll: Warning to resolve by October 26

विस्तार

पालम 360 खाप ने कहा - टोल टैक्स का समाधान नहीं निकलने पर आर-पार की लड़ाई होगी
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26 अक्तूबर को महापंचायत में पूरी दिल्ली के गांवों के प्रतिनिधि और ग्रामीण हिस्सा लेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी के ग्रामीण इलाके में यूईआर-2 टोल प्लाजा को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पालम 360 खाप के प्रमुख चौधरी सुरेंद्र सोलंकी के नेतृत्व में गांवों के प्रतिनिधियों ने बैठक कर सरकार को चेतावनी दी कि यदि 26 अक्तूबर तक यूईआर-2 पर लगे टोल का समाधान नहीं निकला तो आंदोलन आर-पार की लड़ाई का रूप लेगा।
26 अक्तूबर को महापंचायत में पूरी दिल्ली के गांवों के प्रतिनिधि और ग्रामीण हिस्सा लेंगे। सुरेंद्र सोलंकी ने कहा कि अगर सरकार ने इस मुद्दे का समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन दिल्ली के सीमाओं से आगे बढ़कर हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के ग्रामीणों तक फैलाया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि पंचायत के माध्यम से केंद्रीय सरकार के साथ बातचीत का अगला दौर भी जल्द ही संभव है। बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि यूईआर-2 सड़क परियोजना के लिए उनकी जमीन उचित मुआवजे के बिना अधिगृहीत की गई और खेत सड़क निर्माण के कारण दो हिस्सों में बंट गए। अब उन्हें अपने खेतों और अन्य गांवों में जाने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है जिससे पेट्रोल-डीजल का खर्च बढ़ा और आय प्रभावित हुई। इसी कारण उन्होंने टोल प्लाजा पर लगे शुल्क को अन्यायपूर्ण बताते हुए स्पष्ट किया कि इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।टोल रोड पर स्थानीय लोगों के लिए स्लिप रोड और यू-टर्न जैसी सुविधाएं बनवाना सरकार की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने कहा कि बिना इन उपायों के किसी भी हल पर सहमति असंभव है।
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बैठक में चौधरी धारा सिंह (बवाना-52), राजेंद्र प्रधान, मूलचंद प्रधान (हिरणकूदना), सुरेश शोकीन (नांगलोई-9), मुख्यातार सिंह, अनार सिंह (टिकरी-5), मास्टर जगबीर और सतपाल सोलंकी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण नेता मौजूद रहे। उन्होंने सरकार के समक्ष यह स्पष्ट किया कि गांवों की समस्या की अनदेखी करने का कोई विकल्प नहीं है और यदि दिल्ली देहात की मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन अब तेज होगा।
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