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Noida News: जमीन विवाद में गोली मारने के मामले में दो भाइयों को 10-10 साल की सजा
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जल निकासी और जमीन कब्जे को लेकर हुआ था विवाद, 13 साल बाद आया फैसला
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव की अदालत ने वर्ष 2013 के एक फायरिंग मामले में सगे भाइयों सुंदर और सतीश निवासी गांव घंघोला को हत्या के प्रयास व लोकशांति भंग करने के आशय से अपमान के अंतर्गत दोषी करार दिया है। दोनों को 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 11-11 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर दोषियों को 1-1 माह की अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला 8 जनवरी 2013 की रात करीब 8 बजे का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी के मकान से सटी खाली जमीन व चकरोड को लेकर दोनों पक्षों के बीच वर्ष 2008 से विवाद चला आ रहा था। आरोपी इस जमीन पर पानी रोककर कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे, जिसका विरोध किए जाने पर विवाद बढ़ा और गोलीबारी हुई। डीजीसी अपराध ब्रह्मजीत भाटी ने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वादी सतेन्द्र, घायल ओमप्रकाश, चश्मदीद अशोक, अजय व माया देवी सहित कुल 11 गवाह पेश किए। घटनास्थल से बरामद खूनसना तहमद, जिस पर गोली से बना छेद मौजूद था जो महत्वपूर्ण साक्ष्य बना। बचाव पक्ष ने चोट के स्थान को लेकर विसंगति का तर्क दिया, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने घटना को निंदनीय और गंभीर प्रकृति का मानते हुए दोनों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव की अदालत ने वर्ष 2013 के एक फायरिंग मामले में सगे भाइयों सुंदर और सतीश निवासी गांव घंघोला को हत्या के प्रयास व लोकशांति भंग करने के आशय से अपमान के अंतर्गत दोषी करार दिया है। दोनों को 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 11-11 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर दोषियों को 1-1 माह की अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला 8 जनवरी 2013 की रात करीब 8 बजे का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी के मकान से सटी खाली जमीन व चकरोड को लेकर दोनों पक्षों के बीच वर्ष 2008 से विवाद चला आ रहा था। आरोपी इस जमीन पर पानी रोककर कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे, जिसका विरोध किए जाने पर विवाद बढ़ा और गोलीबारी हुई। डीजीसी अपराध ब्रह्मजीत भाटी ने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वादी सतेन्द्र, घायल ओमप्रकाश, चश्मदीद अशोक, अजय व माया देवी सहित कुल 11 गवाह पेश किए। घटनास्थल से बरामद खूनसना तहमद, जिस पर गोली से बना छेद मौजूद था जो महत्वपूर्ण साक्ष्य बना। बचाव पक्ष ने चोट के स्थान को लेकर विसंगति का तर्क दिया, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने घटना को निंदनीय और गंभीर प्रकृति का मानते हुए दोनों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया।
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