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एनआरआई से 67 लाख की धोखाधड़ी में दो गिरफ्तार

Thu, 14 Jan 2021 12:21 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 14 Jan 2021 12:21 AM IST
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Two arrested for fraud of 67 lakh from NRI
एनआरआई से धोखाधड़ी में पकड़ा गया आरोपी अनुज सिंह। - फोटो : Grnoida
एनआरआई से 67 लाख की धोखाधड़ी में दो गिरफ्तार
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ग्रेटर नोएडा। एनआरआई के खाते से पांच दिन में 67 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले दो आरोपियों को आईटी सेल की टीम ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया है। इनकी पहचान सतीश राणा निवासी बागपत और अनुज सिंह निवासी औरंगाबाद बुलंदशहर के रूप में हुई है। आरोपियों ने खाते से लिंक मोबाइल नंबर का नया सिम निकलवा कर धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। मामले में सिम देने वाली कंपनी में कार्यरत कर्मी, एक बैंक कर्मी समेत अन्य लोग शामिल हैं। पुलिस फरार तीन आरोपियों की तलाश में जुटी है।
आईटी सेल निरीक्षक संतोष त्रिपाठी ने बताया कि कुछ दिनों पहले ग्रेनो निवासी चेतन ने बीटा-2 थाने में पिता सुरेश यादव से धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चेतन के मुताबिक, उनके पिता एनआरआई हैं और इस समय म्यांमार में हैं। पिता के खाते से पांच दिन में 67 लाख रुपये निकाल लिए गए। आईटी सेल ने जांच में पाया कि सुरेश यादव का भारतीय मोबाइल कंपनी नंबर उस बैंक खाते में पंजीकृत था। लंबे समय से नंबर का इस्तेमाल नहीं होने की वजह से बंद हो गया। आरोपियों ने ऐसे खाते का पता लगाया, जिसमें बहुत दिनों से कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुआ था। बैंक के आरोपी कर्मचारी ने यह जानकारी साइबर ठगों तक पहुंचाई। आरोपियों ने वोडाफोन में नौकरी करने वाले अपने सहयोगी अनुज की मदद से वही नंबर जारी करवाया। इसके बाद आरोपियों ने बैंक में डेबिट कार्ड के लिए आवेदन किया। एक ही नंबर होने की वजह से बैंक को लगा कि खाता धारक ने ही कार्ड के लिए आवेदन किया है। बैंक की तरफ से नया डेबिट कार्ड जारी कर दिया गया। अक्तूबर 2020 में पांच दिन में ठगों ने 67 लाख रुपये खाते से निकाल लिए। मामले की जानकारी पीड़ित को तब हुई, जब उसने बैंक में संपर्क किया। अनुज ने ही सिम उपलब्ध करवाया था। आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल व दो सिम बरामद हुए हैं। ठगी में शामिल प्रदीप, रवि व एक अज्ञात बैंक कर्मी पुलिस की तलाश कर रही है।
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ऐसे करते थे धोखाधड़ी
ग्रेटर नोएडा के एडिशनल डीसीपी विशाल पांडे ने बताया कि गिरोह एक बैंक कर्मी और मोबाइल कंपनी के स्टोर पर काम करने वाले व्यक्ति की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा करते थे। आरोपी बैंक खाते में लिंक लोगों के मोबाइल नंबर का नया सिम निकलवाते थे। इसके बाद उस व्यक्ति के फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर उसके नाम से डेबिट कार्ड जारी करवा लेते थे। डेबिट कार्ड से उस व्यक्ति के बैंक खाते को खाली कर देते थे। एडीसीपी ने बताया कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों से धोखाधड़ी कर कितना पैसा हड़पा है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। इनके बैंक खातों को भी खंगाला जा रहा है। गिरोह में कितने लोग शामिल हैं, इसकी भी जांच चल रही है। उन्होंने बताया कि गैंग में शामिल फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद घटना की पूरी जानकारी मिल सकेगी। पुलिस की टीमें फरार आरोपियों प्रदीप राना (सतीश राणा का भाई), रवि और एक बैंक कर्मी की तलाश में जुटी है।
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