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Noida News: तुगलकाबाद रेलवे स्टेशन पर बनेगा पूर्ण कोचिंग टर्मिनल
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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर रेल यातायात कम करने के लिए उठाया जा रहा कदम
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162.87 करोड़ रुपये आंकी गई लागत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली मंडल के तुगलकाबाद रेलवे स्टेशन पर पूर्ण कोचिंग टर्मिनल बनेगा। इसके लिए दो अतिरिक्त प्लेटफार्म, दो वाशिंग लाइन और दो स्टेबलिंग लाइन विकसित की जाएंगी। योजना के लिए अनुमानित लागत करीब 162.87 करोड़ रुपये आंकी गई है।
तुगलकाबाद का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और यह दिल्ली-मथुरा मुख्य रेलखंड पर स्थित है। दक्षिणी और मध्य भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए यह स्टेशन बेहद उपयुक्त है। इस संबंध में दिल्ली रेल मंडल ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) को भेजा है। आरएलडीए प्रस्ताव का अध्ययन कर रिपोर्ट देगा फिर निर्माण कार्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि नई दिल्ली स्टेशन के पुनर्विकास कार्य के दौरान यात्रियों को किसी तरह की परेशानी से बचाने व दबाव कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है। पुनर्विकास प्रोजेक्ट के कारण कई प्लेटफॉर्म लंबे समय तक बंद रहेंगे। ऐसे में ट्रेन संचालन पर सीधा असर पड़ेगा और करीब 105 जोड़ी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों को वैकल्पिक स्टेशनों से चलाना पड़ेगा। रेलवे की योजना है कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से दक्षिण भारत, मध्य प्रदेश और राजस्थान की ओर जाने वाली कुछ प्रमुख मेल व सुपरफास्ट गाड़ियां तुगलकाबाद से संचालित की जाएं। इससे यात्रियों को सीधे दक्षिणी दिल्ली और फरीदाबाद की ओर से कनेक्टिविटी मिलेगी।
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35 से 40 ट्रेनों का हो सकता है संचालन
नई दिल्ली स्टेशन से हटाई जाने वाली 105 जोड़ी ट्रेनों में से लगभग 35–40 जोड़ी ट्रेनें तुगलकाबाद टर्मिनल से संचालित की जाएंगी यानी यहां से रोजाना 70 से 80 ट्रेनें (आना-जाना मिलाकर) चलने लगेंगी। तुगलकाबाद टर्मिनल में न सिर्फ नए प्लेटफार्म और लाइनें होंगी बल्कि यात्रियों की सुविधाओं के लिए प्रतीक्षालय, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। वाशिंग लाइन और स्टेबलिंग लाइनें बनने से यहां ट्रेन रखरखाव और सफाई का काम भी नियमित रूप से हो सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि योजना से अस्थायी समाधान नहीं होगी बल्कि नई दिल्ली स्टेशन के पुनर्विकास के बाद भी तुगलकाबाद के टर्मिनलों का उपयोग जारी रहेगा। आने वाले वर्षों में जब ट्रेन संख्या और यात्री दबाव और बढ़ेगा तब ये नए टर्मिनल रेलवे नेटवर्क की रीढ़ साबित होंगे।
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162.87 करोड़ रुपये आंकी गई लागत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली मंडल के तुगलकाबाद रेलवे स्टेशन पर पूर्ण कोचिंग टर्मिनल बनेगा। इसके लिए दो अतिरिक्त प्लेटफार्म, दो वाशिंग लाइन और दो स्टेबलिंग लाइन विकसित की जाएंगी। योजना के लिए अनुमानित लागत करीब 162.87 करोड़ रुपये आंकी गई है।
तुगलकाबाद का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और यह दिल्ली-मथुरा मुख्य रेलखंड पर स्थित है। दक्षिणी और मध्य भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए यह स्टेशन बेहद उपयुक्त है। इस संबंध में दिल्ली रेल मंडल ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) को भेजा है। आरएलडीए प्रस्ताव का अध्ययन कर रिपोर्ट देगा फिर निर्माण कार्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
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रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि नई दिल्ली स्टेशन के पुनर्विकास कार्य के दौरान यात्रियों को किसी तरह की परेशानी से बचाने व दबाव कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है। पुनर्विकास प्रोजेक्ट के कारण कई प्लेटफॉर्म लंबे समय तक बंद रहेंगे। ऐसे में ट्रेन संचालन पर सीधा असर पड़ेगा और करीब 105 जोड़ी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों को वैकल्पिक स्टेशनों से चलाना पड़ेगा। रेलवे की योजना है कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से दक्षिण भारत, मध्य प्रदेश और राजस्थान की ओर जाने वाली कुछ प्रमुख मेल व सुपरफास्ट गाड़ियां तुगलकाबाद से संचालित की जाएं। इससे यात्रियों को सीधे दक्षिणी दिल्ली और फरीदाबाद की ओर से कनेक्टिविटी मिलेगी।
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35 से 40 ट्रेनों का हो सकता है संचालन
नई दिल्ली स्टेशन से हटाई जाने वाली 105 जोड़ी ट्रेनों में से लगभग 35–40 जोड़ी ट्रेनें तुगलकाबाद टर्मिनल से संचालित की जाएंगी यानी यहां से रोजाना 70 से 80 ट्रेनें (आना-जाना मिलाकर) चलने लगेंगी। तुगलकाबाद टर्मिनल में न सिर्फ नए प्लेटफार्म और लाइनें होंगी बल्कि यात्रियों की सुविधाओं के लिए प्रतीक्षालय, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। वाशिंग लाइन और स्टेबलिंग लाइनें बनने से यहां ट्रेन रखरखाव और सफाई का काम भी नियमित रूप से हो सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि योजना से अस्थायी समाधान नहीं होगी बल्कि नई दिल्ली स्टेशन के पुनर्विकास के बाद भी तुगलकाबाद के टर्मिनलों का उपयोग जारी रहेगा। आने वाले वर्षों में जब ट्रेन संख्या और यात्री दबाव और बढ़ेगा तब ये नए टर्मिनल रेलवे नेटवर्क की रीढ़ साबित होंगे।