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कागजों में सिमटा ट्रामा सेंटर और अपग्रेडेड जिला अस्पताल
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कागजों में सिमटा ट्रॉमा सेंटर और अपग्रेडेड जिला अस्पताल
नगीना (राजूद्दीन जंग)। नीति आयोग के सबसे पिछड़े जिले नूंह को लेकर केंद्र और राज्य सरकार कतई गंभीर नहीं हैं, क्योंकि जुलाई 2018 से ट्रॉमा सेंटर और 200 बेड का जिला अस्पताल बनाने की प्रक्रिया धूल फांक रही है। अमलीजामा पहनाने का जिले वासियों को बेसब्री से इंतजार है। सवाल उन एजेंसियों पर भी उठने लगे हैं जो नीति आयोग की तरफ से नूंह जिले का मूल्यांकन करने में जुटी हैं। हालांकि नगीना क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर बनाने के लिए जमीन की तलाश स्वास्थ्य विभाग करने में जुटा हुआ है। दूसरी तरफ जिला अस्पताल मांडीखेड़ा को 100 से 300 बेड बनाने में सिविल सर्जन कार्यालय रुचि नहीं ले रहा है, बल्कि वह चाहते हैं कि जिला मुख्यालय नूंह में ही 200 बेड का नया अस्पताल बने, ताकि उन्हें 25 किलोमीटर दूर मांडीखेड़ा सिविल अस्पताल के धक्के नहीं खाने पड़ें। नूंह मुख्यालय में 500 बेड का मेडिकल कॉलेज पहले से बना हुआ है अगर यह भी वही बनता है तो जिले की आधी आबादी को समाज सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा। पिछले 5 साल के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में 1346 लोग मारे गए हैं और 3000 से अधिक घायल हुए।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिला अस्पताल मांडीखेड़ा को अपग्रेड करने की बजाय 200 बेड का नया अस्पताल नूंह खंड में बनाने की प्रक्रिया चल रही है।
-इसाक, मुलथान निवासी
दिल्ली के बाद अलवर में हाईवे पर ट्रामा सेंटर है जबकि 60 किलोमीटर की दूरी पर उच्च्तम न्यायालय के आदेश अनुसार ट्रॅामा सेंटर होना चाहिए। नूंह-अलवर हाईवे पर ट्रामा सेंटर के कोरे दावे हैं।
-सामियान, छात्रा
हाईवे, ट्रॉमा सेंटर और जिला अस्पताल का अपग्रेडेशन अत्यंत आवश्यक है क्योंकि सड़क दुर्घटनाएं सबसे ज्यादा इसी जिले में हो रही हैं।
-पवन कुमार, उप तहसीलदार, नगीना
हमने मांग पत्र तैयार कर लिया है 22 नवंबर को हरियाणा के उपमुख्यमंत्री इन सभी मांगों को पूरा करें।
-आजाद मोहम्मद, पूर्व मंत्री एवं जजपा प्रभारी नूंह
जिला अस्पताल मांडीखेड़ा में जगह की कमी है इसलिए नूंह मुख्यालय में 200 बेड का नया अस्पताल बनाने के लिए जमीन की तलाश जारी है। वहीं ट्रॉमा सेंटर को भी नूंह के आसपास बनाया जाएगा।
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-सुरेंद्र यादव, सिविल सर्जन नूंह
फोटो : नगीना क्षेत्र के गांव मांड़ीखेडा में बना 100 बेड जिला अलआफिया अस्पताल
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नगीना (राजूद्दीन जंग)। नीति आयोग के सबसे पिछड़े जिले नूंह को लेकर केंद्र और राज्य सरकार कतई गंभीर नहीं हैं, क्योंकि जुलाई 2018 से ट्रॉमा सेंटर और 200 बेड का जिला अस्पताल बनाने की प्रक्रिया धूल फांक रही है। अमलीजामा पहनाने का जिले वासियों को बेसब्री से इंतजार है। सवाल उन एजेंसियों पर भी उठने लगे हैं जो नीति आयोग की तरफ से नूंह जिले का मूल्यांकन करने में जुटी हैं। हालांकि नगीना क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर बनाने के लिए जमीन की तलाश स्वास्थ्य विभाग करने में जुटा हुआ है। दूसरी तरफ जिला अस्पताल मांडीखेड़ा को 100 से 300 बेड बनाने में सिविल सर्जन कार्यालय रुचि नहीं ले रहा है, बल्कि वह चाहते हैं कि जिला मुख्यालय नूंह में ही 200 बेड का नया अस्पताल बने, ताकि उन्हें 25 किलोमीटर दूर मांडीखेड़ा सिविल अस्पताल के धक्के नहीं खाने पड़ें। नूंह मुख्यालय में 500 बेड का मेडिकल कॉलेज पहले से बना हुआ है अगर यह भी वही बनता है तो जिले की आधी आबादी को समाज सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा। पिछले 5 साल के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में 1346 लोग मारे गए हैं और 3000 से अधिक घायल हुए।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिला अस्पताल मांडीखेड़ा को अपग्रेड करने की बजाय 200 बेड का नया अस्पताल नूंह खंड में बनाने की प्रक्रिया चल रही है।
-इसाक, मुलथान निवासी
दिल्ली के बाद अलवर में हाईवे पर ट्रामा सेंटर है जबकि 60 किलोमीटर की दूरी पर उच्च्तम न्यायालय के आदेश अनुसार ट्रॅामा सेंटर होना चाहिए। नूंह-अलवर हाईवे पर ट्रामा सेंटर के कोरे दावे हैं।
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-सामियान, छात्रा
हाईवे, ट्रॉमा सेंटर और जिला अस्पताल का अपग्रेडेशन अत्यंत आवश्यक है क्योंकि सड़क दुर्घटनाएं सबसे ज्यादा इसी जिले में हो रही हैं।
-पवन कुमार, उप तहसीलदार, नगीना
हमने मांग पत्र तैयार कर लिया है 22 नवंबर को हरियाणा के उपमुख्यमंत्री इन सभी मांगों को पूरा करें।
-आजाद मोहम्मद, पूर्व मंत्री एवं जजपा प्रभारी नूंह
जिला अस्पताल मांडीखेड़ा में जगह की कमी है इसलिए नूंह मुख्यालय में 200 बेड का नया अस्पताल बनाने के लिए जमीन की तलाश जारी है। वहीं ट्रॉमा सेंटर को भी नूंह के आसपास बनाया जाएगा।
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-सुरेंद्र यादव, सिविल सर्जन नूंह
फोटो : नगीना क्षेत्र के गांव मांड़ीखेडा में बना 100 बेड जिला अलआफिया अस्पताल