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आज फिर प्राधिकरण कूच करेंगे किसान, गोपनीय रहेगी रणनीति

Thu, 21 Oct 2021 01:21 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 21 Oct 2021 01:21 AM IST
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Today again farmers will move towards the authority, the strategy will remain confidential
नोएडा। आबादी, मुआवजा व नक्शा नीति समेत अन्य मांगों को लेकर किसान एक बार फिर प्राधिकरण को अपनी ताकत दिखाएंगे। किसान बृहस्पतिवार को हरौला स्थित धरनास्थल पंचायत करेंगे। यहां रणनीति बनाकर प्राधिकरण कार्यालय के लिए कूच करेंगे। प्राधिकरण पर जाकर क्या करना है, इसके बारे में भी किसी को कुछ नहीं बताया जाएगा। इससे पहले बुधवार को किसानों ने 81 गांवों में बैठक कर अधिक से अधिक लोगों से पहुंचने की अपील की है। भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखवीर सिंह खलीफा ने बताया कि 81 गांवों के किसान अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन प्राधिकरण उनकी मांगों के प्रति गंभीर नहीं है।
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बृहस्पतिवार को प्राधिकरण पर भीड़ के साथ धरना दिया जाएगा। इस दौरान किसान क्या करेंगे, यह निर्णय पंचायत में लिया जाएगा। इसे गोपनीय रखा जाएगा। यदि प्राधिकरण के अंदर प्रवेश करना होगा तो उसके बारे में भी टीम के कुछ ही लोगों को बताया जाएगा। ग्रामीणों को अलग-अलग टीमों में बांटा जाएगा। हर टीम का एक नेता होगा। वह अपनी टीम को लीड करेगा। यदि अंदर जाना है तो नेता आगे रहेंगे और बाकी लोग पीछे। यदि प्राधिकरण गेट तक ही जाना है तो इसके लिए अलग रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि 50 दिन से किसान घर और खेत छोड़कर धरने पर बैठे हैं, लेकिन प्राधिकरण ने कोई ठोस उपाय नहीं सोचा है। इस बार ऐसा नहीं होगा। किसानों की मांगों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उधर, धरने को लेकर पुलिस भी सतर्क है।
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जिलाधिकारी से 32 साल पहले हुए समझौते को लागू करने की मांग
दादरी विधायक के नेतृत्व में एनटीपीसी क्षेत्र के किसानों ने बुधवार को जिलाधिकारी सुहास एलवाई से सेक्टर-27 स्थित आवास पर मुलाकात की। इसमें विधायक ने डीएम को 32 साल पहले किसानों और एनटीपीसी प्रबंधन के बीच हुए समझौते को लागू कराने की मांग की। साथ ही बारिश के कारण बर्बाद हुई फसल की जांच रिपोर्ट पर नाराजगी व्यक्त कर कर्मचारियों पर कार्रवाई और फिर से सर्वे कराने की मांग की। विधायक तेजपाल सिंह नागर ने बताया कि एनटीपीसी ने 32 साल पहले बिजली प्लांट लगाने के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण की थी।
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इसमें 250 रुपये प्रति वर्गगज के हिसाब से किसानों को मुआवजा, स्थानीय लोगों को रोजगार और बिजली समेत अन्य मांगे शामिल थीं। इन मांगों के संबंध में तत्कालीन जिला प्रशासनिक अधिकारी और एनटीपीसी प्रबंधन ने एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी किए थे। उन्होंने कहा कि अब उस समझौते को लागू किया जाए। इसके अलावा धान की फसल को 80 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है, लेकिन तहसील अधिकारी-कर्मचारियों ने केवल 20 फीसदी नुकसान की रिपोर्ट भेजी है। ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही फिर से सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। मौके पर सुभाष भाटी, संजय, मोहित, संजू, रविंद्र, अनूप, गोपाल, रामपाल और घनश्याम आदि मौजूद रहे।
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