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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Three newborns suffering from heart disease got a new lease of life.

Noida News: दिल की बीमारी से जूझ रहे तीन नवजात को मिला नवजीवन

Sat, 29 Nov 2025 07:40 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 29 Nov 2025 07:40 PM IST
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Three newborns suffering from heart disease got a new lease of life.
फोटो है
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चाइल्ड पीजीआई में शिशुओं के हार्ट की सफल सर्जरी कर डाक्टरों ने सकुशल भेजा घर
सर्जरी में था रिस्क, नवजात की उम्र एक महीने से कम और वजन तीन किलोग्राम से भी कम था

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई में तीन नवजात शिशुओं के हार्ट की सफल सर्जरी कर डाक्टरों ने उन्हें नया जीवन दिया है। तीनों की उम्र एक महीने से कम और वजन तीन किलोग्राम से भी कम था। हालांकि नवजात प्री-मैच्योर नहीं थे, लेकिन गंभीर स्थिति में इलाज के लिए आए थे। चाइल्ड पीजीआई के डॉक्टरों ने सर्जरी के बाद एक-एक सप्ताह तक तीनों को भर्ती रखा। स्थिति में सुधार होने के बाद उन्हें सकुशल घर भेज दिया गया है।

पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमावत ने बताया, बच्चों के जन्म से ही उन्हें हार्ट की समस्या थी और तुरंत हार्ट सर्जरी की जरूरत थी। कार्डियोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनुज कुमार शर्मा ने जांच के बाद सर्जरी करने की तैयारी की। विशेषज्ञों के मुताबिक इन शिशुओं की जीवित रहने की संभावना मात्र 60-70 प्रतिशत ही थी। डॉ. मुकेश ने बताया कि बच्चों की सर्जरी में एनेस्थीसिया विभाग का भी बहुत सहयोग रहा है।
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पांच किलोग्राम से अधिक वजन पर सफल होती है सर्जरी
डॉ. मुकेश कुमावत ने बताया कि तीनों नवजात की बीमारी बहुत गंभीर थी लेकिन दुर्लभ नहीं थीं। सर्जरी में रिस्क बहुत था क्योंकि तीनों का वजन और उम्र बहुत कम था। आमतौर पर ऐसे बच्चों की सर्जरी उनके चार महीने से एक वर्ष की आयु या उनका वनज कम से कम पांच किलोग्राम से अधिक होने पर ही की जाती है। कम वजन और कम उम्र में सर्जरी का जोखिम अधिक होता है।
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तीनों नवजात को यह थी बीमारी
-पहले नवजात में- हार्ट से निकलने वाली खून की धमनी में सिकुड़न थी। इससे शरीर के निचले भाग को खून की सप्लाई सही से नहीं मिल रही थी। इस वजह से बच्चे के हार्ट पर दबाव अधिक पड़ रहा था और शरीर का विकास नहीं हो रहा था।
दूसरे नवजात में - फेफड़े से शुद्ध खून एक नली के जरिए बायें हार्ट में आना चाहिए था लेकिन वह दायें हार्ट में चला जाता था। बच्चा बुखार और निमोनिया के साथ आया था। इसकी सर्जरी में रिस्क बहुत ज्यादा था।

तीसरे नवजात में - इसका सिंगल वेंट्रिकल हार्ट था और फेफड़ों में अधिक मात्रा में खून की सप्लाई हो रही थी जिसे कंट्रोल किया गया है, ताकि फेफड़े में ज्यादा खून न जाए। बच्चे की ग्रोथ होने के बाद छह महीने बाद दूसरी सर्जरी की जाएगी।
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