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बिल्डरों के मामले में सधी रही चुप्पी, सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

Fri, 03 Sep 2021 01:22 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 03 Sep 2021 01:22 AM IST
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There was silence in the matter of builders, Supreme Court took cognizance
नोएडा। जिले में कई बिल्डर प्रोजेक्टों के मामले में प्राधिकरण के अफसर चुप्पी साधे रहे। मामला शासन तक भी गया। मंत्रियों की समिति भी बनी, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। अब सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया तो मामले में थोड़ा सुधार हुआ। अभी भी करीब दो लाख फ्लैट खरीदार कब्जे और रजिस्ट्री के लिए भटक रहे हैं। दरअसल, 2007-08 में जब रियल एस्टेट सेक्टर में बूम था तो उस दौरान प्राधिकरणों ने नरम नीति पर काम करते हुए बिल्डरों का जमकर साथ दिया। प्राधिकरण की मंशा थी कि बहुमंजिला इमारतें बने। यहां लोग रहें और क्षेत्र का विकास हो, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि आगे जाकर यह नासूर बनने वाला है। एक समय तक तो सब ठीक चलता रहा। जब बिल्डरों ने इससे पैसे बनाने शुरू किए तो उन्होंने फंड डायवर्ट कर दूसरे बिजनेस में भी हाथ पैर मारना शुरू किया। इसका मकसद भी बुरा नहीं था।
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उनकी सोच यह थी कि ज्यादा पैसे कमाकर प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा कर दिया जाए, लेकिन उन्होंने जहां पैसे डायवर्ट किए। वहां उनके पैसे फंस गए। ऐसे में उनके पुराने प्रोजेक्ट में या तो काम धीमा हो गया या फिर काम रुक गया। कुछ दिनों तक इसकी भनक खरीदारों को नहीं लगी। जब तीन साल की डेडलाइन पर कब्जा नहीं मिला तो खरीदारों का ध्यान गया। उन्होंने छानबीन शुरू की और मामला खुलता चला गया। उस दौरान प्राधिकरण की ओर से भी कोई जरूरी बात नहीं बताई जाती थी। कुछ दिनों तक बिल्डर-खरीदार बैठक हुई। एक वरिष्ठ अधिकारी के तबादले के बाद वह भी बंद हो गया। बाद में बिल्डरों ने इस मामले में अनाप शनाप फैसले लिए और फंसते चले गए। साथ में खरीदार भी फंस गए। बाद में जब मामले में काफी हंगामा हुआ तो सुप्रीम कोर्ट तक बात गई और मामले में बिल्डरों की गिरफ्तारी और सख्त हुई। तब जाकर बात बनती दिखी।
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अगर कोर्ट बीच में नहीं आता तो अभी एनबीसीसी के सहयोग से आम्रपाली के प्रोजेक्ट में काम नहीं हो पाता। यही नहीं जेपी के भी मामले में हल निकले तो वहां भी काम शुरू हो सकता है। यूनिटेक मामले में भी कोर्ट की सख्ती की वजह से काम बनता नजर आ रहा है। अब ब्याज का मामला भी कोर्ट में है। अगर यह हल हो जाता है तो खरीदारों की रजिस्ट्री और कब्जे का रास्ता साफ हो जाता। अब देखना यह है कि इस मामले में कोर्ट का क्या फैसला आता है।
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